- फ्लैटों के रखरखाव और सड़कों की मरम्मत में खर्च हो रहे लाखों, फिर हालत बद से बदतर
- आवंटियों को आज तक नहीं मिल पाया कब्जा, दो मार्च को होनी है वार्ता
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जागृति विहार एक्सटेंशन स्कीम 11 बनने से पहले ही यहां के हालात खस्ता होने शुरू हो गये हैं। योजना की सड़कों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। फ्लैट पहले से ही कम बिक रहे हैं। ऊपर से जो बिके भी हैं, उनमें आवंटियों को आज तक कब्जा नहीं मिल पाया है जिस कारण परिषद के लाखों रुपये महीना के इनके रखरखाव और फ्लैटों की टूट-फूट सही कराने में खर्च हो रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर किसानों का विवाद सुलक्षता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि आवंटियों किसानों और अधिकारियों को भी दो मार्च को होने वाली वार्ता से कुछ हल निकलने की उम्मीद है। आवास विकास परिषद की अभी तक की सभी योजनाओं पर नजर डाली जाए तो सबसे बेहतर योजनाओं में शास्त्रीनगर शामिल है।
इसके अलावा परिषद की ओर से मंगलपांडेनगर, माधवपुरम समेत अभी हाल ही में स्कीम 11 शुरू की गई। जागृति विहार एक्सटेंशन स्कीम 11 से परिषद को काफी उम्मीदे हैं। आस-पास में इस प्रकार की योजना शायद ही मिले, लेकिन यहां आवंटियों की संख्या में कमी और किसानों का विवाद आवास विकास परिषद के लिये मुसिबत बना हुआ है।
परिषद ने वर्ष 2009 में योजना के लिये किसानों से जमीन एक्वायर की थी, लेकिन अभी तक किसानों को उनका मुआवजा और प्लॉट नहीं मिल पाये हैं जिस कारण किसान यहां आवंटियों को कब्जा नहीं लेने देते। अभी हाल ही में किसानों ने यहां आवंटियों के पहुंचने पर हंगामा कर दिया था। यह योजना 2019 तक पूरी होनी थी, लेकिन अभी तक परिषद की ओर से न तो सभी फ्लैट बेचे गये न ही भूखंडों को बेचा जा सा सका है। कुछ का आवंटन हुआ भी है तो उनके कब्जा नहीं मिल पाया।
टूटने लगीं सड़कें
आवास विकास की ओर से इस योजना में 40-40 फीट चौड़ी सड़कें बनाई गर्इं। बीच में डिवाइडर दोनों ओर सड़कें। योजना में बड़े-बड़े पाक काफी कुछ लोगों को लुभाने के लिये है। लेकिन जो सड़के परिषद ने बनाई थी वो भी अब आवंटियों के आने से पहले ही टूटनी शुरू हो गई हैं। फ्लैटों की हालत भी कुछ ऐसी ही है इनकी खिड़की दरवाजे तक टूटने शुरू हो गये हैं।
टूट-फूट और मरम्मत में खर्च हो रहे लाखों
इन सड़कों की टूट-फूट और फ्लैटों की टूट-फूट और रख रखाव आदि में परिषद की ओर से लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। सड़कों की हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि यहां सड़कों पर टूटने के बाद रोड़ी बिखरी पड़ी है। जिससे यहां बाइक आदि फिसलकर गिर रही हैं।
सड़कों में कई जगह गड्ढे तक हो चुके हैं जिन्हें सही करने के लिये विभाग की ओर लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। परिषद के योजना में करीब 2220 फ्लैट हैं जिनमें से 810 आवंटित हो चुके हैं, इनमें भी आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पाया है। इसके पीछे किसानों से चला आ रहा विवाद है।
लोगों को आकर्षित करने के लिये घटाये जा रहे दाम
शासन की ओर डेढ़ वर्ष पहले लोगों को इस योजना की ओर आकर्षित करने के लिये इनके दामों 10 फीसदी की कमी की गई थी, इसके बावजूद यहां लोग आकर्षित नहीं हो पाये। इसके बाद अब लोगों को आकर्षित करने के लिये शासन की ओर फ्लैटों की कीमत को और कम करने की योजना बनाई जा रही है जिसे लेकर प्रस्ताव भी भेजा चुका है। वहीं अधिकारियों की मानें तो उनका कहना है कि शासन को सभी हालात के बारे में अवगत करा दिया गया है जल्द ही कोई न कोई नतीजा निकल आयेगा।

