जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देबजीत सरकार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उनका दावा है कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कोलकाता के मिंटो पार्क स्थित एक निजी अस्पताल के सीईओ को धमकाती हुई दिखाई और सुनाई दे रही हैं।
देबजीत सरकार ने अपने पोस्ट में अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल प्रमाणपत्र का हवाला भी दिया और आरोप लगाया कि मेडिकल रिपोर्ट में कोई गंभीर चोट नहीं होने के बावजूद ममता बनर्जी अस्पताल प्रबंधन पर अभिषेक को भर्ती कराने का दबाव डाल रही थीं।
भाजपा नेता ने कहा, “यह राजनीतिक मकसद से चिकित्सा संस्थानों के दुरुपयोग की चिंताजनक कोशिश है। अस्पतालों का काम मरीजों का इलाज उनकी चिकित्सीय जरूरत के आधार पर करना है, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार। डॉक्टरों, प्रशासकों या स्वास्थ्य संस्थानों को डराने-धमकाने की कोई भी कोशिश जनता के भरोसे को कमजोर करती है और लोकतंत्र तथा सुशासन के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।”
क्या है मामला?
शनिवार दोपहर, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में एक पार्टी कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने गए थे। बताया गया कि वह कार्यकर्ता चुनाव के बाद हुई हिंसा का शिकार हुआ था। इस दौरान स्थानीय लोगों के एक समूह ने अभिषेक का विरोध किया, जिसमें कई महिलाएं भी शामिल थीं। आरोप है कि उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार भी हुआ।
सुरक्षा बलों ने अभिषेक को वहां से सुरक्षित निकालकर पहले ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया। ममता बनर्जी भी अस्पताल पहुंचीं और आरोप लगाया कि उनके भतीजे का उचित इलाज नहीं हो रहा। इसके बाद उन्हें कोलकाता के मिंटो पार्क स्थित दूसरे निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्हें जांच के लिए आईटीयू में रखा गया।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
जब ममता बनर्जी को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने नाराजगी जताई। अस्पताल से बाहर निकलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों अस्पताल-ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाइपास और मिंटो पार्क—प्रशासनिक दबाव के कारण अभिषेक को भर्ती करने और उचित इलाज देने से इनकार कर रहे थे।
ममता ने कहा, “दूसरे अस्पताल के मामले में कोलकाता पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर की ओर से दबाव था कि अभिषेक को भर्ती न किया जाए। पहले उन्होंने फर्जीवाड़े और गुंडागर्दी के जरिए चुनाव जीता, फिर अभिषेक पर हमला कराया और अब यह सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है कि उन्हें सही इलाज न मिले।”

