Friday, May 15, 2026
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सर्द रही सोमवार की रात, कांपते रहे शहरवासी

  • रात का तापमान गिरा, 5.6 किया गया दर्ज

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: सोमवार की रात सर्द रहने पर शहरवासी कांपते रहे। दिन और रात मेंं ठंड का असर बढ़ता जा रहा है। तापमान में गिरावट के साथ सुबह और शाम में ठंड का ज्यादा जोर है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो आगामी चार पांच दिन ठंड में इजाफा होगा। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी चलते वेस्ट यूपी में मौसम बदल रहा है। सर्दी में तापमान गिरता जा रहा और मौसम ठंडा हो रहा है। दो-तीन दिन से सर्दी में इजाफा होने से मौसम बदला है।

सुबह के समय अभी धुंध का असर दिख रहा है। दिन में हवा में भी नमी दिख रही है और मौसम भी सर्द बना हुआ है। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 22.8 डिग्री व रात का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 92 व न्यूनतम 56 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अभी आगे भी ठंड का दौर ऐसे ही बना रहेगा, दिन-रात का तापमान गिरने से ठंड में और इजाफा होगा।

पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले तीन-चार दिन से बर्फबारी हुई है, जिसका असर मैदानी इलाकों में दिखाई दे रहा है। वहां से आने वाली हवाओं के चलते मौसम और बदलेगा। वहीं, इस संबंध में मौसम वैज्ञानिक कृषि विवि डा. यूपी शाही का कहना है कि अगले 5 दिन 17 दिसंबर तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। रात के तापमान में हल्की गिरावट के आसार है। गेहूं सहित अन्य खड़ी फसलों में हल्की सिंचाई कर उचित नमी बनाए रखें।

फिर से बढ़ा शहर का प्रदूषण

हवा के चलते राहत मिलने के बाद मंगलवार को प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। प्रदूषण एनसीआर में बढ़ते हुए 331 पर पहुंच गया, जो खतरनाक स्तर पर दर्ज किया गया। मेरठ का 331, बागपत में 336, गाजियाबाद में 300, मुजफ्फरनगर में 354, जयभीमनगर में 322, गंगानगर में 38, पल्लवपुरम में 323 दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा गंगानगर क्षेत्र प्रदूषित रहा है। यहां का एक्यूआई मानक से भी ज्यादा पहुंच गया, जो बहुत ही खतरनाक है।

शीत लहरी के दृष्टिगत जन समुदाय के लिए जारी की एडवाजरी

जिला प्रशासन की ओर से जनपद में शीत लहर के दृष्टिगत जन समुदाय के बीच विस्तृत प्रचार प्रसार कराए जाने संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये हैं। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सूर्यकान्त त्रिपाठी ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि दैनिक मौसम की जानकारी अखबार, टीवी, रेडियो एवं मोबाइल फोन के माध्यम से लेते रहे। लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से बचें अपने शरीर को सूखा रखें एवं गर्म कपड़ों से ढक कर रखें। अपने सर, गर्दन, हाथ-पैरों को मुख्य रूप से ढकें। शरीर को गर्म रखने के लिए गर्म पेय पदार्थों एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें।

आवश्यकता के अनुसार सामानों की आवश्यक आपूर्ति और पर्याप्त पानी का भंडारण करें। क्योंकि अत्यधिक ठंड में पानी के पाइप जमने की संभावना होती है। हीटर, ब्लोअर, कोयले की अंगीठी आदि चलाते वक्त थोड़ी खिड़की खोल कर रखें और सोने से पहले सभी हीटर, ब्लोअर, कोयले की अंगीठी इत्यादि को बंद कर दें। घर के अंदर बंद कमरों में कोयला न जलाएं, क्योंकि इससे उत्पन्न होने वाली कार्बन मोनोआॅक्साइड जानलेवा साबित हो सकती है। शरीर के अंगों के सुन्न पड़ने, हाथ-पैरों, कान एवं नाक पर सफेद या पीले रंग के दाग इत्यादि पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

शीत लहर के समय बुजुर्गों, नवजात शिशुओं तथा वच्चों का विशेष ध्यान रखें। अपने आस पड़ोस में अकेले रहने वाले बुजुर्गों का भी ध्यान रखें। शराब का सेवन न करें, क्योंकि इससे शरीर का तापमान कम हो जाता है एवं हाइपोथर्मिया की संभावना बढ़ जाती है। शीतदंश से प्रभावित स्थान पर किसी प्रकार का मसाज या मालिश न करें। एवं प्रभावित स्थान को सीधे आग के संपर्क में लाने से बचें। बल्कि शीतदंश प्रभावित अंग को गर्म सूती कपड़े से सिकाई कर गर्माहट दें। उन्होंने एडवाइजरी में कहा कि शीतलहर/पाला के दौरान-मौसम की जानकारी का बारीकी से पालन करें और सलाह के अनुसार कार्यवाही करें।

ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचने के लिए घर के अंदर रहें और यात्रा कम से कम करें, अपने शरीर को सूखा रखें एवं गर्म कपड़ों से ढक कर रखें। अपने सर गर्दन, हाथ एवं पैरों को मुख्य रूप से ढकें, पर्याप्त रोग प्रतिरोधक शक्ति और शरीर के तापमान के संतुलन को बनाए रखने के लिए स्वस्थ्य भोजन, विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। शरीर को गर्म रखने के लिए गर्म पेय पदार्थों एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। हाइपोथर्मिया होने पर प्रभावित व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाएं और कपड़े बदलें, व्यक्ति के शरीर को त्वचा से त्वचा के संपर्क, कंबल, कपड़े, तौलिये या कंबल की सूखी परतों से गर्म करें, शरीर का तापमान बढ़ाने में मदद करने के लिए गर्म पेय दें,

शराब कदापि न दें, हालत ज्यादा बिगड़ने पर डॉक्टर का परामर्श लें। इसी प्रकार खेती और पशुओं को सर्दी के मौसम में सुरक्षित रखने के उपाय के बारे में बताया गया है। जिसके अनुसार कृषि-शीत लहर और पाला फसलों को बीमारी के कारण नुकसान पहुंचाता है जिसमें ब्लैक रस्ट, व्हाइट रस्ट, लेट ब्लाइट आदि शामिल है। शीत तहर अंकुरण विकास, फूल, उपज और भंडारण जीवन में कई तरह के शारीरिक व्यवधान का कारण बनती है। शीत लहर के दौरान पशुओं और पशुओं को भरण-पोषण के लिए अधिक भोजन की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ जाती है।

भैंसों, मवेशियों के इष्टतम प्रजनन काल के दौरान तापमान में अत्यधिक भिन्नता पशुओं में प्रजनन दर को प्रभावित कर सकती है। जलवायु स्मार्ट शेड का निर्माण जो सर्दियों के दौरान अधिकतम धूप और गर्मियों के दौरान कम विकिरण की अनुमति देता है, सर्दियों के दौरान जानवरों के नीचे कुछ बिस्तर सामग्री जैसे सूखा पुआल लगाएं। इन स्थितियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त पशु नस्लों का चयन करना चाहिए। शीत तहर के दौरान पशुओं को खुले में न बांधे/घूमाएं, शीत लहर के दौरान पशु मेले आयोजित न करें, पशुओं को ठंडा चारा और ठंडा पानी देने से बचे, पशु आश्रय में नमी और धुंआ इकट्ठा न होने दें, मृत पशुओं के शवों को पशुओं के नियमित चरने वाले मार्गों पर नहीं फेंकना चाहिए।

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