Tuesday, May 28, 2024
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HomeUttar Pradesh Newsलखनऊ / आस-पासमां के दूध से नहीं होता कोविड का संक्रमण

मां के दूध से नहीं होता कोविड का संक्रमण

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  • लक्षण रहित महिलाएं प्रोटोकॉल के साथ
  • अपने नवजात के साथ रह सकती हैं

जनवाणी  संवाददाता  |

GIRISH PANDEYफिलहाल कोविड के ही साथ जीना है। इसके वायरस के वैरिएंट (प्रकार) बदल सकते हैं। बदले वैरिएंट के अनुसार इससे होने वाला खतरा भी कम और अधिक हो सकता है। ऐसे में बचाव के लिए कोविड प्रोटोकॉल ( मास्क, सोशल डिस्टेंन्सिग, बाहर से आने पर हाथ धुलना या सैनिटाइज करना) का अनुपालन जरूरी है।

बड़ी समस्या संक्रमित होने वाली उन महिलाओं के लिए है जिनको अपने नवजात बच्चों को दूध पिलाना है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी संक्रमण एक बड़ी समस्या है।

इस बाबत अपोलो हॉस्पिटल नवी मुंबई की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर तृप्ति दुबे से हुई बातचीत के कुछ अंश।

 

कोविड के लक्षण हैं तो क्या करें?

पहली बात जिसे सिर्फ दूध पिलाने वाली मां को ही नहीं हर किसीको गाँठ बांध लेनी चाहिए। माँ के दूध से बच्चे के संक्रमण का खतरा अपवाद (रेयर) है। संक्रमण सिर्फ ड्राप्लेट (मुंह और नाक से सांस लेने,खांसने,छीकने या थूकने के दौरान निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदें ) से फैलता है।

संक्रमण के लक्षण वाली महिलाएं

अगर संभव हो तो जिस कमरे में आइसोलेट हों बच्चे को उससे अलग कमरे में रखें। अपने कमरे में ब्रेस्ट पंप से दूध निकालकर जो बच्चे की देखरेख कर रहा हो उसे पिलाने को दें। दूध निकालने के पहले हर बार ब्रेस्ट पंप को सैनिटाइज जरूर करें।

अगर संक्रमण के लक्षण नहीं हैं तो क्या करें?

ऐसी महिलाएं कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए बच्चे को आइसोलेट होने वाले कमरे में साथ रख सकती हैं। कमरे में बच्चे को दो मीटर की दूरी पर रखें। हर समय प्रॉपर तरीके (ठुड्डी से नाक) से मास्क (एन-95) लगाकर रखें। हर बार दूध पिलाने के पहले कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार साबुन से हाथ को जरूर धुलें।

मास्क प्रॉपर तरीके से लगा है कि नहीं यह जरूर चेक कर लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी कहा है कि कोविड के दौरान भी महिलाओं को बच्चों को दूध पिलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यह दोनों के लिए लाभदायक है।

गर्भवती महिलाएं क्या करें

कोविड का असर इनपर भी वैसे ही होता है जैसे और लोंगों पर। चूंकि गर्भावस्था महिलाओं के लिए एक खास अवस्था होती है ऐसे में उनको सांस संबंधी दिक्कत अधिक हो सकती है। इस अवस्था में वह सांस संबंधी कुछ संस्तुत मेडिकेशन भी नहीं कर सकती हैं। ऐसी महिलाओं के इलाज में यह एक गंभीर समस्या है।

क्या गर्भावस्था में भी टीका लगवा सकते हैं

बिल्कुल। इससे कोई खतरा नहीं है। वैसे तो वह कभी भी टीका लगवा सकती हैं, पर सबसे बढ़िया समय गर्भावस्था के तीन महीने के बाद का होता है। दोनों टीकों के बीच अंतराल भी उतना ही होगा जितना सामान्य लोंगों के लिए।
आंख,मुंह,नाक और मास्क को न छूना। सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचना।

उन जगहों या चीजों (दरवाजे के हैंडिल,मेज,लाइटर, बाहर से आये समान के गत्ते आदि) को छूने से बचना जिनको लोग छूते हों। कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धुलना, 60 फीसद वाले एल्कोहल वाले सैनिटाइजर का प्रयोग कोविड के ये सामान्य प्रोटोकाल सबके लिए हैं।

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