Wednesday, February 21, 2024
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लापरवाही! सीएम योगी ‘सख्त’ अधिकारी ‘बेफिक्र’

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  • बूढ़ी गंगा को लेकर पीएमओ को भेजा गया था पत्र
  • बिना आख्या के ही कर दी गई शिकायत निस्तारित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनमानस की शिकायतों को लेकर सख्त हैं। वहीं, दूसरी ओर तहसील स्तर पर बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। नेचुरल साइंसेज ट्रस्त के अध्यक्ष एवं शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती द्वारा हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र भेजा गया था। पीएमओ ने इस पत्र को मुख्यमंत्री कार्यालय को कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पत्र को जिलाधिकारी कार्यालय भेजा और इस पूरे मामले पर आख्या प्रस्तुत कर कार्रवाई के लिए प्रेक्षित कर दिया। प्रियंक भारती के इसी पत्र को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर डाल दिया गया। प्रो. प्रियंक भारती के अनुसार तहसीलदार मवाना ने बिना आख्या के ही इसे अपलोड कर शिकायत को निस्तारित कर दिया। हालांकि बाद में जिलाधिकारी द्वारा इसे अस्वीकृत कर दिया गया।

हस्तिनापुर की फसली 1359 की खतौनी हुई लापता

प्रो. प्रियंक के अनुसार खतौनी फसली 1359 तहसील में नहीं है। यह बात मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में स्वीकार भी की गई है। वहीं, दूसरी ओर कलक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रूम में भी यह रिकॉर्ड उलपब्ध नहीं है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड आखिर गुम कैसे हुआ।

आख्या ही सवालों के घेरे में

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प्रियंक भारती का कहना है कि तहसीलदार मवाना द्वारा प्रेषित की गई आख्या सवालों के घेरे में हैं। इसमें लिखा गया है कि बूढ़ी गंगा (महाभारतकालीन पर कृषि आवंटन किया गया था)। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवंटन कृषि के लिए था तो फिर इस पर निर्माण कैसे हुए।

जिलाधिकारी की सख्ती के बाद अपलोड हुई आख्या

तहसील स्तर पर की गई लापरवाही पर जब जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाई तब फिर आख्या अपलोड की गई। लापरवाही की हद यह थी कि तहसीलदार एवं एसडीएम सबने ही बिना आख्या के इसे प्रेषित कर दिया।

हस्तिनापुर की फसली 1359 की खतौनी हुई लापता

प्रो. प्रियंक के अनुसार खतौनी फसली 1359 तहसील में नहीं है। यह बात मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में स्वीकार भी की गई है। वहीं, दूसरी ओर कलक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रूम में भी यह रिकॉर्ड उलपब्ध नहीं है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड आखिर गुम कैसे हुआ।

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