- एनजीटी ने लोहिया नगर में जलता देखा कूड़ा
- टीम ने जताई सख्त नाराजगी, अधिकारियों को लगाई फटकार
- अधिकारियों के साथ किया डंपिंग ग्राउंड का निरीक्षण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लोहिया नगर में पहले ही डल रहे कूड़े से परेशान लोगों के लिए कोढ में खाज का काम यहां कूड़े के ढेर में आग लगाना है। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ कई तरह की बीमारियां फैलने का अंदेशा बना हुआ है। एनजीटी की टीम जब मौका मुआयना करने लोहिया नगर पहुंची तो उसने यहां अपनी आंखों से कूड़ा जलते हुए देखा। एनजीटी ने इसपर सख्त नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। इसके साथ ही एनजीटी की टीम ने ट्रांसफर स्टेशन तथा गावंड़ी के कूड़ा संयंत्र को भी देखा। देर शाम को निरीक्षण करने के बाद टीम दिल्ली वापिस लौट गई।
लोहिया नगर डंपिंग ग्राउंड में नगर निगम की गाड़ियां लगातार कूड़ा डालती रहती हैं। यहां कूड़े के पहाड़ लगे हुए हैं। कूड़ा डालने और कूड़े में आग ल गाने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। जिससे आसपास का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष रोहित गुर्जर समेत आसपास के इलाके के लोग इसकी शिकायत एनजीटी और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कर चुके हैं, लेकिन कोई सबक लेने का तैयार नहीं है। यहां आये दिन कूड़े के ढेर में आग लगा दी जाती है। क्षेत्रवासी इसका आरोप नगर निगम के ही कर्मचारियों पर जड़ते हैं। उनका कहना है कि कर्मचारी इसलिए कूड़े के ढेर में आग लगाते हैं, ताकि कूड़ा उठाना न पड़े।
रोहित कहते हैं कि कई बार इसकी शिकायत एनजीटी व क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की गई है। एनजीटी नई दिल्ली के आदेश के क्रम में गुरुवार को एक संयुक्त टीम नगर निगम मेरठ पहुंची। इस टीम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ के अधिकारी व प्रतिनिधि शामिल थे। कूड़ा निस्तारण कार्य प्रणाली की जांच करने के लिए टीम ने धरातल पर परीक्षण किया। संयुक्त टीम सुबह लगभग साढे 11 बजे सीधे लोहिया नगर डंपिंग ग्राउंड पहुंची तथा जलते हुए कूड़े का दृश्य देखते हुए काफी नाराज हुई। टीम ने अपने साथ मौजूद नगर निगम अधिकारियों से पूछा कि यह कैसे आग लग रही है? खुद अपने सामने आग लगी देखकर नगर निगम अधिकारी भी जवाब देने की स्थिति में नहीं थे।

निगम अधिकारियों ने सफाई दी कि यह आग क्षेत्रवासियों ने लगाई होगी। क्योंकि निगम तो यहां पर कूड़े से बिजली बनाने की प्रक्रिया का क्रियान्वयन करता है। लेकिन निगम अधिकारियों के जवाब से एनजीटी की टीम संतुष्ट नजर नहीं आई। यहां से एनजीटी की संयुक्त टीम नौचंदी ग्राउंड पहुंची तथा यहां बने ट्रांसफर स्टेशन की प्रक्रिया देखी। निगम अधिकारियों ने टीम को बताया कि कूड़ा एकत्र करने के लिए यहां कैप्सूल टैक्निक का उपयोग किया जाता है। टीम ने अपने सामने कूड़ा उठते हुए देखा। इसके बाद टीम गावड़ी सॉलिड वेस्ट प्लांट का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए पहुंची।
संयुक्त टीम को परतापुर बाईपास पर विजेंद्र एनर्जी कंपनी को यह बताया गया कि यह नगर निगम मेरठ का प्लांट है कूड़े से जितना भी प्लास्टिक आदि निकलता है उससे हम यहां पर अलग-अलग छांटकर उसका उपयोग करते हैं तथा कूड़े से जितना भी प्लास्टिक आदि निकलता है उससे हम यहां पर बिजली तैयार करके बिक्री करते हैं। धरातल पर गोपनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ कि यह एक प्राइवेट कंपनी है। इसपर भी एनजीटी की संयुक्त टीम ने काफी नाराजगी व्यक्त की। टीम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली से नामित सदस्य भुवन यादव, लखनऊ से साइंटिस्ट सत्या सिंह, मेरठ के क्षेत्रीय प्रदूष नियंत्रण अधिकारी के साथ-साथ नगर निगम के अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. हरपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
एनजीटी दिल्ली को सौंपेंगे गोपनीय रिपोर्ट, अफसर दिखे बेचैन
एनजीटी को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि एक तो सघन आबादी क्षेत्र लोहिया नगर में कूड़ा सड़क पर डाला जा रहा है। इससे पूरा ही हापुड़ रोड कूड़े के पहाड़ में तब्दील हो गया है। हालांकि नगर निगम द्वारा इस कूड़ा संयंत्र के पास लोहे की चादरें लगाकर ढका गया है। लेकिन बदबू की समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। दूसरी एनजीटी को शिकायत मिल रही थी कि कूड़े को जलाया जा रहा है। जबकि कूड़ा जलाने पर एनजीटी के साथ-साथ हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रतिबंध लगा रखा है। अब एनजीटी की टीम ने खुद अपनी आंख से कूड़ा जलते देखा। अब टीम अपना निरीक्षण खत्म करने के बाद वापिस दिल्ली लौट गई है। जहां वह गोपनीय निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेगी। इसको लेकर नगर निगम के अधिकरी बेचैन हैं।

