- दम तोड़ गए कैंट में वाटर एटीएम, पब्लिक ने नहीं पिया वाटर एटीएम का शुद्ध और स्वच्छ पानी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट क्षेत्र की जनता को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 75 लाख की खर्च किये थे। वाटर एटीएम लगाये गए थे। पैसे देकर शुद्ध व आरओ का स्वच्छ पानी लोगों को उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हैं। पानी कितना शुद्ध? इस पर सवाल उठ रहे हैं। जनता की सेहत के साथ सीधे खिलवाड़ कैंट बोर्ड के अधिकारी कर रहे हैं। आरओ एटीएम से पानी तो निकलता हैं, लेकिन कैंट का टैंकर हर रोज पानी भरकर जाता हैं,
जिसे जनवाणी फोटो जर्नलिस्ट ने अपने कैमरे में तब कैद कर लिया, जब टैंकर से आरओ एटीएम में पानी भरा जा रहा था। इस पानी की शुद्धता कितनी हैं? ये तो कैंट के अफसर भी बता सकते हैं कि कहां से आरओ का पानी लाकर इसमें डाला जा रहा हैं? ये तो सीधे जनता की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा हैं। आरओ का पानी देने के नाम पर जनता के साथ धोखा क्यों किया जा रहा हैं?

बात आरओ वाटर एटीएम की करें तो उनकी निगरानी की व्यवस्था नहीं हैं, जिसके चलते अधिकांश मशीनों को पब्लिक ने तोड़ डाला। आमदनी चवन्नी और खर्च एक रुपये होने पर कैंट बोर्ड ने खराब मशीनों को ठीक कराना बंद कर दिया। इनमें अधिकांश मशीनों को उखड़वाकर कैंट बोर्ड के गोदाम में रखवा दिया गया। अब लोग शुद्ध और स्वच्छ पानी को तरस रहे हैं। टैंक का पानी भरकर जनता को पिलाया जा रहा हैं। लोगों को बेहद सस्ती दर पर शुद्ध और आरओ का स्वच्छ ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए कैंट बोर्ड ने सन 2016 में लगभग साढ़े तीन लाख रुपये प्रति दर वाली 21 वाटर एटीएम मशीनें खरीदी थीं।
करीब 75 लाख रुपये की इन मशीनों को गांधी बाग, आबूलेन तिराहा, सदर घंटाघर, सदर थाने के पास, तोपखाना, लालकुर्ती चौराहे के पास, हजारी की प्याऊ चौराहे के पास आदि कैंट क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर लगाया गया था। इन मशीनों को संचालित करने के लिए अस्थाई बिजली के कनेक्शन भी लेने पड़े। इन वाटर एटीएम से एक लीटर पानी के लिए मशीन में एक रुपये का सिक्का और दो लीटर पानी के लिए दो रुपये का सिक्का और पांच लीटर पानी के लिए पांच रुपये का सिक्का डाला जाता था।
इसके अलावा इन मशीनों से पानी लेने के लिए कैंट बोर्ड ने एक स्पेशल एटीएम कार्ड भी जारी किया। इस एटीएम कार्ड के जरिए भी पानी लेने की व्यवस्था थी। इस मशीन के नल के नीचे बोतल रखकर जब मशीन में सिक्का डाला जाता या एटीएम कार्ड लगाया जाता था तो तुरंत मशीन से निर्धारित मात्रा में पानी निकलता था। कुछ व्यापारियों ने कैंट बोर्ड कार्यालय से इन मशीनों के एटीएम कार्ड भी खरीदे। कुछ लोगों को यह मशीन पसंद आई, लेकिन अधिकांश लोगों को पैसा अदा करने को लेकर यह मशीन अच्छी नहीं लगी।

अधिकांश लोग मुफ्त में पानी लेना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इन मशीनों से मुंह मोड़ लिया। शुरू में तो इन मशीनों से रोजाना हजारों रुपये की आय कैंट बोर्ड को प्राप्ति हुई, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने जब इन मशीनों को पीठ दिखाई तो इनकी आय में गिरावट आती गई। करीब दो वर्ष बाद इन मशीनों में मेंटीनेंस भी शुरू हो गई। इनकी मेंटीनेंस पर हजारों रुपये खर्च होने लगे। इसी बीच मशीन खराब होने पर लोगों ने इन मशीनों के नल तोड़ दिए। कुछ शरारती तत्वों ने इन मशीनों के कैश बॉक्स को भी तोड़कर लूटने का प्रयास किया। रात को चौकीदार की व्यवस्था न होने से इन मशीनों को शरारती तत्वों द्वारा खासा नुकसान पहुंचाया गया।
धीरे-धीरे इन मशीनों से होने वाली आय पूरी तरह खत्म हो गई और इनकी मरम्मत का बोझ कैंट बोर्ड पर पड़ने लगा। वर्षांे से आर्थिक संकट से जूझ रहे कैंट बोर्ड ने इन मशीनों को उखड़वाना बेहतर समझा। अधिकांश मशीनों को उखड़वाकर कैंट बोर्ड के गोदाम में बंद करा दिया गया। अब मात्र पांच मशीनें ही लगी हैं। इनके एटीएम सिस्टम को बंद कर दिया गया। अब इनमें आरओ के पानी की सीधी सप्लाई की व्यवस्था कर दी गई। अब बिना शुल्क के इन मशीनों से पानी मिल रहा है।

