- उद्यमियों को हर कदम उठानी पड़ती परेशानी
- अभी तक नहीं हुई केबलिंग, न बदले गये विद्युत पोल
- बिजली दरें सस्ती हों तो और राज्यों से भी हो कॉम्पिटिशन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देशभर में मेरठ का नाम करने वाले यहां के उद्यमी ही अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। कहीं बिजली महंगी है तो कहीं उद्योगों पर एनजीटी का डंडा है कि कोयले और डीजल का इस्तेमाल उद्याग फैक्ट्रियों में नहीं किया जायेगा। पिछले काफी समय से मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे उद्यमियों को न तो सस्ती बिजली मिली है और न ही उन्हें एनजीटी से कोई छूट मिल पाई है।
पीएनटी गैस इस्तेमाल करने के लिये कहा जाता है, लेकिन यहां पीएनजी गैस महंगी है। जिसके दामों से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है। उधर, बिजली व्यवस्था की बात की जाये तो बिजली सस्ती होनी तो दूर पर यहां अभी तक पिछले साठ सालों से पड़े बिजली के तार तक नहीं बदले गये हैं।
मेरठ में औद्योगिक क्षेत्र की बात करें ता यहां फैक्ट्रियों की संख्या हजारों में हैं। इन फैक्ट्रियों में लाखों कारीगर काम करते हैं और न जाने कितने लोगों का इन फैक्ट्रियों से परिवार चलता है, लेकिन सालों बीत गये, अभी तक यहां उद्यमियों की मांगे पूरी नहीं हुई हैं।
ऊपर से उन्हें नये नियम कायदों का इस्तेमाल करने के लिये मजबूर किया जाता है। कभी प्रदूषण विभाग से एनओसी के नाम पर तो कभी एनजीटी के अपने नियम कायदे हैं। जिससे उद्योगों को चलाना मुश्किल हो जाता है। अब बिजली की बात करें तो सरकारे आती रहीं और सरकारें जाती रहीं, लेकिन यहां बिजली के दाम कम नहीं हो पाये हैं।
बिजली के दाम कम न हो पाने के कारण उद्यमी परेशान हैं। शहर में खेल उपकरण बनाने की एसजी, एसएस, स्पोर्ट्स लैंड, पीआर, भल्ला स्पोर्ट्स, बीडीएम समेत तमाम फैक्ट्री हैं। इसके अलावा बैंडबाजा, ट्रांसफार्मर बनाने की फैक्ट्री, केमिकल फैक्ट्री समेत हजारों की संख्या में फैक्ट्री हैं।
इन फैक्ट्रियों से बनकर जाने वाला सामान विदेशों तक पहुंचता है। जिससे मेरठ का नाम रोशन होता है। उसके बावजूद उद्यमियों को महंगी बिजली का इस्तेमाल करना पड़ता है। एनजीटी के नियमों का पालन करना पड़ता है और महंगी गैस का इस्तेमाल करना पड़ता है। अब इस विषय में कोई सोचने को तैयार नहीं है। हालांकि बिजली की बात की जाये तो यहां कट कम हैं और कनेक्शन भी आसानी से मिल जाता है आपूर्ति सही है, लेकिन बिजली महंगी मिल रही है।
बिजली के तार 60 सालों से नहीं बदले गये
औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति तो ठीक है, लेकिन यहां सबसे अधिक समस्या बिजली के पुराने तारों की है। यहां 60 वर्षों से भी अधिक समय से पुराने तार लगे हैं। जिन्हें अभी तक नहीं बदला गया है। उनकी केबलिंग तक नहीं की गई है। जिस कारण तार कभी भी टूट जाते हैं और फैक्ट्रियों में कार्य प्रभावित होता है। खंभों की हालत भी जर्जर हो चुकी है, लेकिन उन्हें अभी तक बदला नहीं गया है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है। मूलभूत सुविधाओं के लिये उद्यमी पहले से ही परेशान हैं। उन्होंने कहा अगर बिजली की दरें कम होती हैं तो रोजगार भी बढेÞगा और प्रोडक्शन भी।
कम हों दाम तो प्रोडक्शन में होगी बढ़ोतरी

परतापुर इंडस्ट्रीयल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन ने बताया कि बिजली दरों को सस्ती करने की बात हर बार की जाती है, लेकिन अभी तक बिजली दरें सस्ती नहीं हो पाई है। इंडस्ट्रीयल एरिया में यूनिट अलग हैं। यहां सबमर्सिबल कनेक्शन, साधारण कनेक्शन और कमर्शियल कनेक्शन, हेवी कनेक्शन इंडस्ट्रीज संचालक को अलग अलग लेना होता है उसके हिसाब से सभी यूनिट भी अलग हैं। कोई यूनिट आठ रुपये है तो कोई 12 रुपये। इस तरह से बिजली का बिल काफी अधिक रहता है। हर बार बिजली दरों को कम करने की बात की जाती है, लेकिन बिजली दरों को कम नहीं किया जाता। अगर बिजली की दरें यहां कम हो जाएंगी तो प्रोडक्शन भी अधिक होगा और 3प्रोडक्शन में लगने वाला खर्च भी कम होगा। जिसमें उत्तर प्रदेश दूसरे राज्यों से प्रतियोगिता कर पायेगा।
बिजली महंगी, पीएनजी महंगी, परेशान हैं उद्यमी

आईआईए आध्यक्ष सुमनेश अग्रवाल ने बताया कि मेरठ में काफी संख्या में फैक्ट्रियां हैं। यहां बिजली की दरें महंगी हैं लेकिन बिजली उद्यमियों के लिये इतनी बड़ी समस्या नहीं है। हालांकि बिजली की दरों और टैक्स को लेकर कई उद्यमी अन्य राज्यों की ओर गये थे। उन्होंने अपना कारोबार अन्य राज्यों में ही शुरू किया, लेकिन यहां मेरठ में बिजली दरों के साथ साथ अगर एनजीटी के नियमों से राहत मिल जाये तो उद्योगों की हालत और अच्छी हो जायेगी। उन्होंने बताया कि एनजीटी की सख्ती के कारण उद्यमी अधिक परेशान हैं। यहां न तो उद्यमी कोयले का और न ही डीजल का इस्तेमाल फैक्ट्रियों में कर सकता है। एनजीटी की ओर से लगातार नोटिस दिये जाते हैं जिससे उद्यमी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि पीएनजी गैस के दाम काफी महंगे और इस गैस का इस्तेमाल ही फैक्ट्रियों में करने के लिये कहा जाता है।

