Wednesday, May 6, 2026
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…तो बंद चौकियों से होगी एनएच-58 की सुरक्षा

  • सुरक्षा के लिहाज से हाइवे पर चौकी बनी शोपीस

जनवाणी संवाददाता  |

मोदीपुरम: सेवा, सुरक्षा और सहयोग की भावना से काम करने वाली पुलिस ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है। इससे शहर के लोगों की सुरक्षा रामभरोसे हैं। शहर में आए दिन आपराधिक वारदात हो रही हैं। सर्दी के मौसम में शहर की कालोनियों व बाजारों से चोरी के मामले सामने आने लगे हैं। इसके बावजूद रात को 10 बजते ही शहर के चौक चौराहों और एनएच-58 से पुलिसकर्मी नदारद हो जाते हैं।

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हालांकि आधिकारिक रूप से पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है।
किसी भी वारदात की शिकायत करने या किसी मुश्किल में फरियादियों के लिए सबसे आसान इलाके की पुलिस चौकी में पहुंचना होता है। पीड़ित को आसानी से और जल्दी से राहत मिले इसके लिए हर इलाके में पुलिस चौकी बनाई गई है, लेकिन हालात ये हैं कि शहर अधिकतर पुलिस चौकी में ही ताले लटके मिलते हैं।

यहां यहां फरियादी बहुत उम्मीदें लेकर जाता है, लेकिन ताला देखकर उसे मजबूरी में थाने जाना पड़ता है। जहां से उसे फिर चौकी भेजा जाता है। अगर चौकी खुली मिल गई तो बाहर मौजूद होमगार्ड भी थाने जाने की नसीहत दे देता है। ऐसे में इलाके की सुरक्षा व्यवस्था का क्या हाल होगा, अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

वहीं, इस संबंध में क्षेत्राधिकारी दौराला आशीष शर्मा का कहना है कि हाइवे पर सुरक्षा के लिहाज से चौकियां स्थापित है। इन चौकियों पर स्टाफ की जरूर कमी है, लेकिन हाइवे पर सुरक्षा के इंतजाम के लिए सम्बंधित थाना क्षेत्रों के प्रभारियों को कड़े निर्देश दे रखे हैं कि सुरक्षा के इंतजाम हाइवे पर बेहद पुख्ता होने चाहिए।

एनएच-58 पर सुरक्षा सिर्फ रामभरोसे

शहर के चौक चौराहों पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी नहीं होने से अपराधियों के हौसले भी बढ़ जाते हैं। जिससे उनको वारदात को अंजाम देकर फरार होने के लिए खुला रास्ता नजर आता है। सर्दी का मौसम चल रहा है। ऐसे में हाइवे की सुरक्षा राम भरोसे चल रही है।

एनएच-58 पर सुरक्षा के लिहाज से कई स्थानों पर चौकी स्थापित की गई है, लेकिन यह चौकी सिर्फ खानापूर्ति के लिए रह गई है। अगर हाइवे पर सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं होंगे तो फिर यहां से गुजरने वाले यात्रियों की सुरक्षा कैसे होगी। अगर फिलहाल देखा जाए तो हाइवे पर सुरक्षा राम भरोसे चल रही है।

ज्यादातर बंद ही रहती है चौकियां

कंकरखेड़ा से लेकर दादरी चेकपोस्ट तक हाइवे पर तीन अलग-अलग थाना क्षेत्र पड़ते हैं। मोदीपुरम फ्लाईओवर तक कंकरखेड़ा थाना ओर मोदीपुरम फ्लाई ओवर से एटूजेड कालोनी तक पल्लवपुरम थाना एवं कृषि विवि के मुख्य द्वार से लेकर दादरी चेकपोस्ट तक दौराला थाने की सीमा शामिल है।

अगर हम हाइवे पर सुरक्षा को देखे तो हाइवे पर कृष्णा स्कूल की चौकी, मोदीपुरम चेकपोस्ट चौकी, दुल्हैड़ा चुंगी चौकी, सकौती और दादरी चौकी स्थापित है, लेकिन इन चौकियों पर पुलिस की तैनाती तो नाम मात्र की है। रात में इन चौकियों पर पुलिस कर्मी तैनात नहीं रहते हैं। जिससे एनएच-58 की ज्यादातर पुलिस चौकियां बंद ही रहती है।

अपराधिक घटनाओं में हो रहा इजाफा

सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पुलिस चौकियों पर भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं रहते हैं। जिससे अपराधिक घटनाओं में काफी इजाफा हो रहा है। ऐसे में पुलिस के अलर्ट का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस चौकियों पर पुलिकर्मी मौजूद नहीं होने के कारण चोर, अपराधी घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं। ऐसी स्थिति शहर में कई जगह बनाई गई पुलिस चौकियों की है, जिन पर ताला ही लगा रहता है।

चौकसी और चौकीदार न होने से अपराधी बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। क्योंकि चौकियों पर कम स्टाफ होना और रात में पुलिस का मौजूद न रहना। सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हालांकि सुरक्षा की कमी होने के कारण हाइवे पर हाल ही में मोदीपुरम फ्लाईओवर पर बाइक सवार के साथ बदमाशों ने लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया था।

चौकियों की भरमार पर पुलिस बल नहीं

जिले में पिछले कई सालों में चौकियों की भरमार हो गई। हालांकि यह चौकिया शासन के रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं। इन चौकियों को बनाने के पीछे शासन का उद्देश्य यही था कि यहां पुलिस बल तैनात रहेगा।

जिससे आसपास के क्षेत्र में बदमाश सक्रिए नहीं रहेंगे, लेकिन नई चौकियों पर बल उपलब्ध कराना तो दूर, पुरानी चौकियों को एक साल के अंदर सूना कर दिया गया। एनएच-58 पर कई चौकियां सूनी पड़ी रहती हैं। हैरानी इस बात की है कि जब इनका लाभ आम जनता को मिलना ही नहीं है तो पैसे की बबार्दी किस लिए की गई।

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