Sunday, January 23, 2022
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निगम की बोर्ड बैठक में सदन बना सियासी अखाड़ा

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  • सत्तापक्ष के पार्षदों ने लगाए चुनावी नारे, 730.46 करोड़ के पुनरीक्षित बजट पर लगी मुहर
  • तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच सरकारी डिस्पेंसरी बनाने का प्रस्ताव अटका
  • कम्प्यूटर आॅपरेटरों की तनख्वाह में बढ़ोतरी, सफाई कर्मियों को सिर्फ दिलासा

जनवाणी संवाददाता  |

मेरठ: बुधवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक सियासी अखाड़ा बन गई। सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने एक-दूसरे के प्रस्तावों का जमकर विरोध किया। सत्तापक्ष की ओर से सदन में चुनावी नारेबाजी की गई, जिससे हाल गूंज उठा। हालांकि पार्षदों की तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच वित्तीय वर्ष 2021-2022 पुनरीक्षित आय-व्यय का 730.46 करोड़ का बजट ध्वनिमत से सदन में पारित कर दिया गया।

टॉउन हाल स्थित तिलक भवन में बुधवार को निगम की बोर्ड बैठक मेयर सुनीता वर्मा व नगरायुक्त् मनीष बंसल के संचालन में हुई। बैठक के एजेंडे में पहला प्रस्ताव पुनरीक्षित बजट का था। बढ़ाए गए बजट पर नगरायुक्त की ओर से कहा गय कि निर्माण और विकास कार्यों के दृष्टिगत बजट में बढ़ोत्तरी की गई है।

इस पर सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने बिना चर्चा के स्वीकृति दे दी। लेखा विभाग में स्टॉफ की कमी पर शासन को सूचित करने के प्रस्ताव पर भी सदस्यों की ओर से सहमति जताई गई। मगर जैस ही सदन के सामने स्ट्रीट लाईट की खराब व्यवस्था का मुद्दा आया तो सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही ओर के सदस्यों ने इस पर कड़ी नाराजगी का इजहार किया।

राजीव काले व इकराम समेत अधिकांश सदस्यों ने ईईएसएल कंपनी पर ठीक से कार्य नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि कंपनी अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्य नहीं कर रही है। नगरायुक्त मनीष बंसल ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि इसी वित्तीय वर्ष में कार्य को अनुबंध के तहत पूरा किया जाएगा और हर वार्ड को 30-30 लाइट दी जाएगी।

इस पर सभी सदस्य शांत हो गए और सहमति जता दी। बैठक में जाकिर कालोनी क्षेत्र से पार्षद इकराममुद्दीन ने शहर में लगने वाले विज्ञापन पर टैक्स को लेकर आपत्ति की। कहा कि छोटे विज्ञापनों पर टैक्स लगाया जा रहा है, मगर बड़ों पर नहीं। अवैध रुप से लगे विज्ञापनों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अपर आयुक्त प्रमोद कुमार ने इस पर शीघ्र ही अवैध विज्ञापनों को हटाने का आश्वासन दिया है।

ये रहे मौजूद

अपर आयुक्त ममता मालवीय, सहायक आयुक्त इन्द्र विजय, ब्रजपाल सिंह, एफसी संतोष कुमार, जीएम जल निगम रामचन्द्र, सम्पत्ति अधिकारी राजेश कुमार, पार्षद धर्मवीर सिंह, सुनीता प्रजापति, शहजाद मेवाती, मोबीन, सलमा मलिक, ललित नागदेव, अनुज वशिष्ठ, अंशुल वर्मा आदि मौजूद रहे।

डिस्पेंसरी की राह में स्थान का अडंगा

शहर में निगम की रिक्त भूमि पर सरकारी डिस्पेंसरी बनाने का प्रस्ताव सदन में कार्यकारिणी सदस्य अब्दुल गफ्फार की ओर से दिया गया था। प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखा गया तो अब्दुल गफ्फार ने हापुड रोड स्थित भवानी नगर में पटेल मंडल के सामने रिक्त भूमि पर डिस्पेंसरी खोलने की बात रखी।

उन्होंने कहा कि मलिन और दलित बस्तियों में इनको चालू किय जाए, ताकि दुर्बल वर्ग को इसका लाभ मिल सकी। हापुड़ रोड का नाम आते ही सदन में सत्तापक्ष के सदस्य अंशुल गुप्ता और पंकज गोयल ने स्थान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड पर डिस्पेंसरी बनाई जाए। गफ्फार के पक्ष में कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन शर्मा, अहसान अंसारी, इकराम, धर्मवीर सिंह व इरफान खड़े हुए तो इस बात पर सदन में हंगामा शुरू हो गया।

दोनों ओर के सदस्य आमने-सामने आ गए और तीखी नोकझोंक हुई। इस सत्तापक्ष के सदस्यों ने चुनावी नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में करीब 10 मिनट तक गहमा-गहमी का माहौल बना रहा।

नगरायुक्त ने बीच का रास्ता निकालने की बात कहते हुए दोनों जगहों पर विचार करने की बात कही, जिसके बाद पुन: बैठक की कार्यवाही शुरू हुई। इस प्रस्ताव पर सदन में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है, हालांकि अधिकांश सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में दिखाई दिए।

आॅपरेटरों का बढ़ा वेतन, सफाईकर्मियों पर समीक्षा

सोर्सिंग पर कार्यरत कम्प्यूटर आपरेटरों के वेतन में बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव पर तो मुहर लग गई। मगर सफाई कर्मियों के सामान वेतन की मांग अधूरी ही रह गई। अब आपरेटरों को 15 हजार मासिक वेतन दिया जाएगा। अभी तक 12500 मिल रहा था।

वर्तमान में विभाग में 32 आपरेटर रखे हुए हैं। वहीं, सफाई कर्मियों के वेतन बढ़ाने के मुद्दे पर नगरायुक्त की ओर से सदन में कहा गया कि पहले लेखाधिकारी इस बात की समीक्षा करें कि बढ़ोत्तरी करने से कितना भार विभाग पर आएगा और कितना वेतन बढ़ाया जा सकता है। वित्त अनुभाग की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद कार्यकारिणी में प्रस्ताव को पास कराकर नियमानुसार बोर्ड में लाया जाएगा। आउट सोर्सिंग सफाई कर्मियों के समान वेतन पर सदन में चर्चा तो खूब हुई पर बढ़ोत्तरी नहीं।

सांसद-विधायकों का करेंगे घेराव

सफाई कर्मचारी नेता कैलाश चंदौला ने उनकी समान वेतन की मांग नहीं मानने पर सांसद-विधायकों के घरों पर उनका घेराव कर धरना देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को सफाई कर्मचारियों के सभी संगठनों की संयुक्त बैठक की जाएगी। बैठक में अब आगे के आंदोलन की रुपरेखा तय होगी।

तंबाकू विक्रेताओं से शुल्क वसूली को एकजुटता

तम्बाकू उत्पाद के विक्रय के लिए नगर निगम क्षेत्रों में लाइसेंस प्रणाली लागू किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ पार्षदों ने एकजुटता दिखाई। सबसे पहले सदन में अब्दुल गफ्फार ने खड़े होकर इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि गरीब से शुल्क लगाने के बजाय ठोक विक्रेताओं से शुल्क की वसूली की जाए।

उनके समर्थन में सत्तापक्ष के विपिन जिंदल और दूसरे सदस्यों भी खड़े हुए और प्रस्ताव के खिलाफ असहमति जताई। इस संबंध में निगम प्रशासन की ओर से सरकार से उपविधि जारी करने का हवाला दिया गया, मगर सदस्य इस पर फिर भी राजी नहीं हुए।

हालांकि शासन की ओर से प्रस्ताव होने के चलते अभी इस पर सदन में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। हालांकि बोर्ड बैठक में रखे गए अधिकांश प्रस्तावों को सदन ने पारित कर दिया है।

अंदर बैठक चलती रही, बाहर जारी रहा धरना

निगम बोर्ड बैठक के दौरान बुधवार को टॉउन हाल का अजब ही नजारा रहा। जहां तिलक हाल में अंदर सदन चलता रहा, वहीं गेट पर समान वेतन की मांग के समर्थन में सफाई कर्मियों का धरना बारिश में भी जारी रहा। सदन में उनके मुद्दे पर चर्चा तो हुई, मगर वेतन में बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। धरने में तमाम कर्मचारी संगठनों के नेता शामिल रहे।

तीन सुपरवाइजर रखेगा निगम

बोर्ड बैठक में प्रस्ताव आउट सोर्सिंग पर छह सुपरवाइजर रखने का रखा गया था, मगर सदन में तीन के रखने पर सहमति बनी है। हालांकि विभाग में जेई के तीन पद खाली चल रहे हैं और विभाग की जरूरत को देखते हुए निर्णय लिया गया था।

सत्तापक्ष के विरोध के बाद उनकी संख्या का छह से घटाकर तीन किया गया। चीफ इंजीनियर ने सुपरवाइजर रखने के लिए सदन में तर्क देते हुए कहा कि गाजियबाद नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर 16 रखे गए हैं। मेरठ में भी आवश्यकता है।

15 करोड़ का कर्ज लेगा निगम

अमृत योजना के तहत शहर में कराए गए कार्यों के भुगतान को निगम 15 करोड़ रुपये का कर्ज लेगा। सदन में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। पं. दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत लोन लिया जाएगा। कर्ज से कार्यों की मद में निकाय के अंशदान का भुगतान किया जाएगा।

सदस्य रहे नदारद

बुधवार को बोर्ड बैठक के दौरान 23 सदस्य सदन से नदारद रहे। वर्तमान में 10 नामित समेत 94 की संख्या है। छह पार्षदों के निधन से पद खाली हैं। बैठक में 71 सदस्य उपस्थित रहे।

धरने पर बैठे अहसान तो मेयर ने ली चुटकी

इस्लामाबाद क्षेत्र के पार्षद अहसान अंसारी बोर्ड बैठक में शामिल होने अलग ही अंदाज में सदन पहुंचे। उन्होंने अपने वार्ड की समस्या लिखी जैकेट पहन रखी थी और हाथों में तख्ती पकड़ रखी थी। वह सदन में आते ही वेल में बैठ गए और शर्म करो…शर्म करो के नारे लगाने शुरू कर दिया।

करीब पांच मिनट तक यह नजारा रहा। इस पर मेयर सुनीता वर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि बस अब फोटो खिंच गया है आपका। इस पर हाल में मौजूद लोगों की हंसी छूट गई।

महिला सदस्यों ने जताई नाराजगी

वार्डों में निमार्ण और विकास कार्य नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए महिला सदस्यों ने सदन में नाराजगी का इजहार किया। शिखा सिंघल और सविता गुर्जर का कहना था कि उनके इलाकों में सीवर लाइन की बड़ी समस्या है। मगर उनके क्षेत्र की समस्याओं पर कोई ध्यान शिकायत दर्ज कराने के बाद भी नहीं दिया जा रहा है।

जगह-जगह रास्तों में जलभराव की समस्या बनी हुई। सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। निगम के कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक फोन नहीं नहीं उठाते हैं। क्षेत्रवासियों का रास्तों से निकला दूभर है।

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