Sunday, May 16, 2021
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आम लोगों को छोड़िये विधायकों की नहीं सुन रहे नर्सिंग होम

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना के बढ़ते प्रकोप ने अस्पतालों को फुल कर दिया है। एक एक बेड लेने के लिये लोगों को ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि नर्सिंग होम पैसा कमाने के लिये विधायकों तक को बेड के लिये सॉरी बोल रहे है जबकि सेटिंग के जरिये मोटी रकम लेकर लोगों को भर्ती कर रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है।

प्रतिदिन निकल रहे हजारों संक्रमितों के कारण शहर के तीस कोविड सेंटर पूरी तरह से फुल बताये जा रहे हैं। शहर के विधायकों, एमएलसी और सांसद तक से लोग बेड मुहैय्या कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनको बेड न होने की बात की जा रही है, जबकि कई नर्सिंगहोम मोटी रकम लेकर लोगों को बेड दे रहे हैं। कई जगहों पर तो एक एक लाख रुपये तक लेकर बेड दिलाए गए हैं।

नर्सिंग होमों के इस खेल से जनप्रतिनिधि भी खासे नाराज हैं। कहने को प्रशासन ने 30 कोविड सेंटरों को अनुमति दे रखी है, लेकिन इनमें से अधिकांश ने तो अभी काम भी शुरु नहीं किया है। मेडिकल कालेज, आनंद अस्पताल, न्यूटिमा और सुभारती जैसे अस्पतालों में बेड फुल होने की बात हर वक्त की जाती है।

एक विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्वीट करते हुए नर्सिंग होम के हालातों की जानकारी भी दी है। वहीं जहां तक आम मरीजों की बात है उनकी हालत बेहद खराब है। नर्सिंगहोम और अस्पताल उनकी सुनने को तैयार नहीं है।

मेडिकल में अब एक भी आॅक्सीजन बेड खाली नहीं

कोरोना मरीजों को लेकर एलएलआरएम मेडिकल के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मेडिकल में अब एक भी आॅक्सीजन बेड खाली नहीं बचा है। वर्तमान में 280 संक्रमित भर्ती है। जिन संक्रमितों को वेंटिलेटर की जरूरत है उनके लिए अब केवल आईसीयू ही बाकि है।

मेडिकल प्रशासन ने उन लोगों से संक्रमितों को लाने को माना किया है जिन्हें आक्सीजन की उम्मीद में मेडिकल लाया जा रहा है। मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि शनिवार की शाम तक सभी आक्सीजन बेड पूरी तरह से भर गए हैं। एक भी आक्सीजन बेड किसी भी सूरत में खाली नहीं। आक्सीजन बेड को लेकर मची मारामारी के चलते स्थिति से जिला प्रशासन को भी अवगत करा दिया गया है। वहीं दूसरी ओर जहां तक मेडिकल के वेंटिलेटर आईसीयूु की बात है तो आंकडे मेडिकल सिस्टम की पोल खोलने को काफी हैं। सबसे ज्यादा डेथ रेट वेटिलेटर आईसीयू का है।

बिगड़ते-बिगड़ते बचे हालात

शनिरवार की शाम आक्सीजन को लेकर मेडिकल के हालात बाल-बाल बिगड़ते बचे। आक्सीजन खत्म होने की नौबत आ गयी थी। आॅक्सीजन के सहारे चल रही सांसें थम सकती थीं। हुआ यू कि मेडिकल में इनोक्स कंपनी के प्लांट के लिए भेजा गया आक्सीजन टैंकर दो से तीन घंटे की देरी से पहुंचा। निश्चित समय पर जब आक्सीजन टैंकर नहीं पहुंचा तो मेडिकल प्रशासन की भी धड़कने तेज होने लगीं।

कंपनी के प्रबंधकों को फोन घड़घड़ाए तो वहां से पता चला कि टैंकर तो सही समय पर रवाना कर दिया गया। लेकिन जैसे जैसे देरी हो रही थी मेडिकल प्रशासन के हाथ पांव फूलने लगे थे। क्योंकि चालक से संपर्क नहीं हो पा रहा था। करीब तीन घंटे की देरी से ही सही लेकिन टैंकर पहुंच गया तब कहीं जाकर मेडिकल प्राचार्य ने राहत की सांस ली।

रीता नर्सिंग होम में आॅक्सीजन को लेकर हाहाकार

कोविड-19 बीमारी चलने के बाद से आॅक्सीजन सिलेंडर की खपत बढ़ गई है। हालात यह हो गए कि दिल्ली सहित अन्य कई राज्य में आॅक्सीजन की कमी हो गई और आॅक्सीजन नहीं मिलने से जगह-जगह अस्पतालों में मरीजों की मौत हो रही है। शनिवार को नेशनल हाइवे शोभापुर स्थित गीता नर्सिंग होम में भी आॅक्सीजन के सिलेंडर खत्म हो गये। जिस पर तीमारदारों ने जमकर बवाल काटा। दरअसल मरीजों को आॅक्सीजन नहीं लगाई जा रही थी और जिससे कुछ मरीजों को आॅक्सीजन की कमी के कारण काफी परेशानी हुई।

मनिंदरपाल ने सीएम से की शिकायत

निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना वैश्विक महामारी को लेकर मनमानी करने के विरोध में जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन मनिंदर पाल सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं मंडल आयुक्त मेरठ को पत्र भेजकर निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही दौराला स्थित आर्यव्रत अस्पताल मोदीपुरम स्थित एसडीएस ग्लोबल अस्पताल कंकरखेड़ा कैलाशी अस्पताल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उनका आरोप है कि इन अस्पतालों में दलालों के माध्यम से लाखों रुपये लेकर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बल्कि दलालों के माध्यम से बाहरी जनपदों के मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कर रहे हैं। मनिंदर पाल सिंह का कहना है कि इस संबंध में शिकायत कर दी गई है। जल्द ही अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी जनपद के तमाम बड़े अधिकारियों के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी शिकायती पत्र भेज दिया गया है। जनपद के अधिकारियों ने ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

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