Wednesday, May 13, 2026
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दूषित हिंडन से तिल-तिल कर मर रहे लोग

  • दूषित पानी का बोझा ढो रही नदी से कैंसर हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारी

जनवाणी संवाददाता |

रोहटा: बेहद दूषित हो चली हिंडन नदी के किनारे बसे गांव के लोग तिल-तिल कर मर रहे हैं। खतरनाक हेपेटाइटिस सी, काला पीलिया, कैंसर और पथरी जैसी बीमारी ने गांवों में पैर पसार लिए हैं। चीनी मिल, पेपर मिल, केमिकल कारखानों के जहरीले अवशेष ढो रही नदी लोंगों के लिए काल साबित हो रही हैं। इन अवशेषों से हिंडन इस कदर प्रदूषित हो गई है कि इनके जल को प्रयोग करना मौत को दावत देना है।

सहारनपुर जिले से निकलने वाली हिंडन नदी औद्योगिक इकाइयां, स्लाटर हाउस, चीनी मिल, पेपर मिल, केमिकल कारखानों के जहरीले अवशेषों से हिंडन प्रदूषित हो गई है। इसका पानी पीना तो दूर सिंचाई के लायक भी नहीं है। आसपास के क्षेत्रों में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी तेजी से बढ़ रही है। प्रदूषित पानी के कारण कैंसर, हेपीटाइटिस, पीलिया, गैस्ट्रोएन्टराइटिस, खुजली, नेत्र रोग व पेट की विभिन्न प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं। तीन दशक पहले हिंडन नदी का पानी निर्मल था।

अब इसके किनारे के गांवों में तेजी से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां बढ़ रही हैं। सहारनपुर से निकली हिंडन नदी औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी के कारण नदी का अस्तित्व ही खत्म होता चला गया। मेरठ जिले के पिठलोकर, मुल्हेड़ा, बपारसी, पांचली बुजुर्ग, हर्रा, खेड़ीकलां, खिवाई, कलीना, किनौनी, रसलूपुर के अलावा बागपत जिले के भी दर्जनों गांवों में अब तक कैंसर से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग आज भी इन खतरनाक और गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

दो बूंद तो छोड़िए जनाब एक बूंद भी बन सकती है मौत का कारण

हिंडन नदी जहरीली हो चुकी है। इसकी एक बूंद भी पेट का इंफेक्शन,पीलिया,टाइफाइड और कैंसर जैसी बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है। यूपी पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने सहारनपुर से गौतमबुद्ध नगर तक हिंडन के पानी के क्या हालात है,इसकी एक रिपोर्ट हाल ही में जारी की है। छह जिलों से होकर गुजरने वाली नदी के पानी में आॅक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई,जबकि टीसीओ 2,80,000 और बीओडी की मात्रा 40 पाई गई। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इस नदी के पानी में पारा, कॉपर, जिंक,आर्सेनिक व फ्लोराइड, नाइट्रेट जैसे खतरनाक तत्वों की मात्रा भी बहुत अधिक है।

किसने बनाया हिंडन नदी को नाला?

भारतीय नदी परिषद के अध्यक्ष रमन कांत ने इस मुद्दे पर बात कि तो उन्होंने बताया कि हिंडन नदी का उदगम शिवालिक से होता है। झरने से यह नदी आती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है,पानी गंदा होता जाता है। सहारनपुर में इस नदी में पेपर मिल का सारा ड्रेन मिल जाता है। ढमोला नदी से पूरे सहारनपुर का सीवेज नदी में आ जाता है। मुजफ्फरनगर का सीवेज भी इसी नदी में मिल रहा है। कृष्णा नदी पर बने चेक डैम से भी हिंडन बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

एनजीटी के एक्शन के बाद भी…

लगभग 20 सालों से इन गावों के लोग परेशानियों को झेल रहे हैं। दोआबा पर्यावरण समिति ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में केस भी दायर किया था। 2019 में एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को इन गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और मुफ्त इलाज की सलाह दी थी। 124 फैक्ट्रियां बंद करने का भी आदेश दिया था, लोगों की मदद करने के लिए प्लान भी तैयार किए और पानी की सप्लाई की योजना बनाई गई पर इसके बाद क्या प्लान बनाने के बाद कितनने एक्शन लिया गया,यह हालात खुद बयां कर रहे हैं।

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