- रैलियों पर रोक के बाद सभी राजनीतिक दलों ने किया है डिजिटल प्लेटफार्म का रुख
- वोटरों तक पहुंचने के लिए लगा रहे ऐड़ी-चोटी का जोर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: तकनीक के इस दौर में जब चुनाव सिर पर है तो कोरोना भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती अपने वोटरों को कैसे साधा जाए इसको लेकर पैदा हो रही है। हालांकि सभी दलों ने अपनी आईटी सैल को सक्रिय कर लिया है लेकिन जो लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम व ट्वीटर पर नहीं है उनतक कैसे पहुंचा जाए यह बड़ा सवाल है।
चुनावी दंगल अब अपने अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ चला है, लेकिन कोरोना की वजह से चुनाव आयोग नें 31 जनवरी तक सभी चुनावी सभाओं पर रोक लगानें की घोषणा कर दी है। इसको लेकर पार्टियां डिजिटल प्लेटफार्म का रुख करने को मजबूर है। राजनीतिक दलों ने अपनी पार्टी के वोटरों को साधने के लिए आईटी सैल को सक्रिय कर दिया है, लेकिन समस्या यह पैदा हो रही है कि डिजिटल प्लेटफार्म पर जानें के बाद यह तय नहीं हो पा रहा है कि जिस क्षेत्र का प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है।
उस क्षेत्र के वोटरों तक कैसे पहुंचा जाए। फेसबुक पर लाइव भी चल रहा है, लेकिन उन वोटरों तक कै से पहुंचा जाए जो फेसबुक का प्रयोग नहीं करते। यही हालात इंस्टाग्राम व ट्वीटर पर जाने के बाद भी सामनें आ रहें है। ऐसे में प्रत्याशी डोर-टू-डोर प्रचार करनें की तैयारी भी कर चुके हैं, लेकिन जमाना तो डिजिटल मीडिया का है।
लोकल एक्सपर्ट की तलाश
मेरठ के सभी सातों विधानसभा क्षेत्रों के वोटरों को तलाश करना और उनतक अपना संदेश पहुंचाना सबसे टेढ़ी खीर साबित हो रही है। अब प्रत्याश्यिों ने अपनी विधानसभा सीटों के आसपास रहनें वाले ऐसे लोगों की तालाश करनी शुरू कर दी है जिनके पास उस क्षेत्र के अधिकतर लोगों के वाट्सऐप नंबर है या जो उनके संपर्क में है।
क्योंकि इंस्टाग्राम, ट्वीटर व फेसबुक के मुकाबले वाट्सऐप का प्रयोग करनें वाले लोग अधिक है। ऐसे में राजनीतिक दल अपने लोकल प्रत्याशी को वाट्सऐप के जरिए वोट देने को कह रहे हैं, लेकिन उन तक कैसे पहुंचा जाए इसके लिए लोकल वाट्सऐप ग्रुपों के लोगों संपर्क किया जा रहा है।
500 से पांच हजार प्रतिदिन तक देने को तैयार
चुनावों में जहां पहले चुनाव सामाग्री बेचने वालों की चांदी रहती थी तो अब उन लोगों के हाथ में लड्डू आ रहें है जो सारा दिन बिना कुछ काम किए अपना समय फोन पर वाट्सऐप में चेटिंग करते हुए ही बिता देते थे। ऐसे लोगों की अचानक डिमांड बढ़ गई है। जिनके पास अपने आसपास के लोगों के वाट्सऐप नंबर है।
इन लोगों को राजनीतिक दल 500 से पांच हजार रुपये प्रतिदिन के पैकेज पर हायर करने को तैयार है। यानी कह सकते हैं। चुनावों में कुछ लोगों का रोजगार कम रह गया है तो ज्यादातर को नया काम मिल गया है।

