Saturday, April 11, 2026
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हरियाणा से सकारात्मक संदेश

SAMVAD


49 4 हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद अधिकांश खाप पंचायतें, ‘इंडिया’ मोर्चे की अधिकांश पार्टियां और तमाम वामपंथी संगठन जैसे किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, सीटू, महिला समिति, लेखक और कवि और हरियाणा की अधिकांश जनता किसान मजदूर नौजवान महिला समिति, हरियाणा में अमन और शांति कायम करने की मुहिम में जुट गए हैं और इन सब ने मिलकर जैसे सांप्रदायिक ताकतों को जोरदार झटका दिया है। यहां के अधिकांश लोगों का मानना है कि ‘बाहरी लोगों’ ने शांति के वातावरण को बिगाड़ा है। यहां दोनों समुदाय शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे थे।

बाहरी असामाजिक तत्वों ने सांप्रदायिक सौहार्द का विनाश कर दिया। प्रशासन और सरकार को मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी को गिरफ्तार तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए। उनका मानना है कि मोनू मानेसर समेत सभी सांप्रदायिक तत्वों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन्हें सख्त से सख्त सजा देकर जेल की सलाखों के पीछे भेज देना चाहिए।

उनका कहना है कि हमें इन सांप्रदायिक यात्राओं की जरूरत नहीं है। हम अपने मंदिरों का इंतजाम खुद कर लेंगे। आरएसएस और बीजेपी हिंदू धर्म के ठेकेदार नहीं हैं। उनका कहना है कि जनता की बुनियादी समस्याओं जैसे गरीबी भुखमरी बेरोजगारी, महंगाई जैसी मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ये दंगे किए गए हैं, माहौल खराब किया गया है। यात्रा में हथियारबंद लोगों को क्यों नहीं रोका गया? और दंगाई भीड़ के वीडियो क्यों नहीं बनाए गए? यह सब सरकार की मिलीभगत, नाकामी और उदासीनता का जीता जागता उदाहरण है।

उनका कहना है कि हम यहां का सांप्रदायिक सद्भाव और माहौल खराब नहीं करने देंगे। इसलिए शांति मार्च का आयोजन किया जा रहा है, हम धार्मिक दंगों में शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि हिंदू धर्म खतरे में नहीं है बल्कि हिंदुत्ववादियों की साजिश खतरे में आ गई हैं। यहां के लोगों बुल्डोजर चलाने से भी नाराज हैं। उनका कहना है कि ‘चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात।’

यह शासन ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। वे मुख्यमंत्री की जनविरोधी नीतियों और जनता को हिंदू मुसलमान के आधार पर समाज को बांटने की साजिशों को समझ गए हैं। वे मुख्यमंत्री खट्टर को एक्सीडेंटल सीएम बता रहे हैं।

लोगों का कहना है कि हरियाणा हमारा है, हम भाईचारे से रहेंगे। हमारे यहां के अधिकांश किसानों मजदूरों का इन दंगों और दंगाइयों से कोई वास्ता नहीं है। मेवात के लोगों ने हमेशा शांति और भाईचारा कायम रखा है। मेवात के लोगों ने बाबर का विरोध किया था। बाबर के साथ हुई लड़ाई में 12,000 से ज्यादा मेवाती शहीद हुए थे।

1857 में अंग्रेजों का विरोध किया था, जिसमें 10,000 से ज्यादा मेवातियों को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ाया गया था। 1992 में भी बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय यहां पर कोई दंगा फसाद नहीं हुआ था। मेवात के लोगों ने दो साल पहले दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया था उस में भाग लिया था और उसके लिए लंगर लगाए थे।

हरियाणा के दंगों का किसानों मजदूरों द्वारा विरोध करने के पीछे, किसान आंदोलन बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। हरियाणा के किसानों पर उसका बड़ा प्रभाव है। उसी की वजह से यहां की जनता हरियाणा के दंगों की आग को बुझाने में बड़ी भूमिका अदा कर रही है। यहां की जनता दंगों की मानसिकता और साजिश को समझकर, हरियाणा सरकार को ही इन दंगों के लिए दोषी मान रही है और दंगाइयों का विरोध कर रही हैं और गांव गांव में शांति समितियां और सद्भावना समितियां बनाकर, जनता को एकजुटता और आपसी सौहार्द बनाए रखने का आह्वान कर रही हैं।

इस सांप्रदायिक हिंसा का विरोध कर रहे अधिकांश नेताओं का कहना है कि यहां की जनता इन दंगों के खिलाफ है, वह इनमें भाग नहीं ले रही है, इनका समर्थन नहीं कर रही है, बल्कि वे इनका विरोध कर रहे हैं। किसान संयुक्त मोर्चा इनमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहा है और लोगों से शांति बनाए रखने का आह्वान कर रहा है और संयुक्त किसान मोर्चा की इस मुहिम ने जैसे हरियाणा में दंगों की आग की साजिश को बुझा ही दिया है।

हरियाणा में शांति और अमन कायम रखने में 419 गांवों में कायम की गई सर्व समाज की समितियां सबसे बड़ा रोल अदा कर रही हैं। मुस्लिम समाज के लोग 419 गांव के मंदिरों की रक्षा कर रहे हैं। इन लोगों का नेतृत्व करने में मरोड़ गांव के सरपंच मुस्ताक खान और भदास गांव के सरपंच शौकत अली की दिलेरी ने हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल कायम कर दी है। आचार्य तरुण महाराज ने बताया है कि मुस्लिम समुदाय ने दंगाइयों को गुरुकुल में घुसने नहीं दिया और उन्होंने हमारी पूरी रक्षा की। मुसलमान भाई हमारे सुख दुख के साथी हैं।

यहां के अधिकांश गांवों में मंदिर हैं। यहां 90 प्रतिशत मुसलमान आबादी है। यहां बने हिंदू मंदिरों की रक्षा की जिम्मेदारी मुस्लिम समुदाय बखूबी निभा रहा है। मंदिरों की हिफाजत करने के लिए 419 गांव में सर्व समाज की तालमेल कमेटी बनाई गई हैं जो घटना के दिन से लगातार मंदिरों पर पहरा दे रही हैं।

आरएलडी के जाट नेता का कहना है कि अधिकांश जाट इस हिंसा से दूरी बनाए हुए हैं, वे इन सांप्रदायिक दंगों का खुलकर विरोध कर रहे हैं। जाट इन दंगों का समर्थन नहीं करेंगे। सर्व खाप पंचायत का भी कहना है कि वे दंगा नहीं होने देंगे और सभी दंगाइयों का जमकर विरोध करेंगे। इन सबका कहना है कि सरकार दंगा करके 2024 के चुनाव में लाभ उठाना चाहती है, हम इसका विरोध करेंगे। हम हरियाणा में अमन शांति और आपसी सौहार्द को कायम रखने की पूरी कोशिश करेंगे, जनता को इन हरियाणा विरोधी ताकतों के झांसे में नहीं आने देंगे।

इस प्रकार जनता के अधिकांश किसानों मजदूरों ने अपनी शांति समितियां बनाकर सर्व समाज की सौहार्द बैठकें करके, हरियाणा को दंगों में झोंकने की सरकार की साजिश को, फिलहाल नाकाम कर दिया है और उसे बहुत बड़ा झटका दिया है। हरियाणा में शांति और सौहार्द कायम रखने में इन तमाम लोगों और विभिन्न संगठनों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। इनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की जानी चाहिए और इनसे सबक लेकर पूरे देश की जनता को सावधान हो जाना चाहिए ताकि भारत की जनता को हिंदू मुसलमान में बांटने की इस देशविरोधी हिंदुत्ववादी मुहिम को पूरी तरह से नाकाम किया जा सके।


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