
लगातार बढ़ती कीमतों, बिगड़ते स्वाद और बीमार करने वाला खाद्य-तेल उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचता है? बाजार और वैश्विक राजनीति उसे कितना प्रभावित करते हैं? एक जमाने के हमारे मूंगफली, नारियल, सरसों और तिल के देशी तेल कहां बिला गए हैं? सरकार ने खाद्य तेल के मामले में जो दखल दिया वह ‘आयात शुल्क’ कम करना था। इसका परिणाम है कि साल भर में आयात 18 फीसदी बढ़ गया, खाद्य तेल की कीमतें कम नहीं हुुर्इं (उनका बढ़ना भले कम हो गया है) और किसान हाय-हाय करने लगे हैं। चुनावी साल होने के चलते सरकार एक तरफ महंगाई के सवाल पर अतिरिक्त चौकसी बरत रही है तो वोट की ताकत दिखाते हुए किसान संगठन भी सरकार पर अपना दबाव बनाने का कोई अवसर नहीं चूक रहे हैं।