Wednesday, September 22, 2021
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Homeसंवादसप्तरंगअपनी हिफाजत खुद करें

अपनी हिफाजत खुद करें

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कोरोना संक्रमण देश में अब भयावहता की सीमा पार कर चुका है और संक्रमितों का आंकड़ तेरह लाख को भी पार कर गया है। बीते चौबीस घंटों में दो लाख से ज्यादा लोगों का कोरोना संक्रमित होना यह साबित करता है कि कोरोना अब घर के दरबाजे आकर खड़ा हो गया है तो कुछ गलत नहीं होगा। हालत इतनी खराब है कि मरीज ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं हैं, एंबुलेंस है तो उसमें आक्सीजन नहीं है, अस्पतालों में बैड तक नहीं हैं, वहां डाक्टर नहीं हैं, डाक्टर हैं तो नर्स नहीं है, नर्स है तो वार्ड व्याय नहीं हैं, दवाई नहीं हैं, इंजेक्शन नहीं हैं, जेब में रुपये हैं लेकिन बाजार में इंजेक्शन नहीं हैं, रोगी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। रोगी को घर पर रखकर आक्सीजन दें तो बाजार में आक्सीजन का सिलेंडर नहीं है। अस्पतालों और टीकाकरण सेंटर पर वैक्सीन नहीं है। हालात से जूझते आखिरकार मरीज मर जाए तो उस हालत में श्मशानों और कब्रिस्तानों में जगह नहीं है। इन हालात ने कोरोना से निपटने के सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है। इस सबके बावजूद हम विश्व गुरु बनने का दावा करते घूम रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक में टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीन खत्म होने और टीका लगवाने आए लोगों द्वारा शोर-शराबा किए जाने की खबरें आ रही हैं। ऐसी हालत में देश के दूरदराज ग्रामीण इलाकों की तो बात ही दीगर हैं। ऐसी स्थिति में देश में बहुतेरे राज्यों में सैकड़ों टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है। अब यह तो जगजाहिर है कि देश में वैक्सीन की कमी का संकट है।

जबकि उसका विदेशों को निर्यात बराबर जारी है। यही वजह है कि अब टीकाकरण की दूसरी डोज का समय बढ़ाकर 28 से 45 दिन कर दिया गया है। दुर्भाग्य तो यह है कि इतने प्रयास और प्रचार के बावजूद वैक्सीनेट का आंकड़ा बीस फीसदी के करीब भी नहीं पहुंच पाया है।

सबसे चिंतनीय बात तो यह है कि हमारी लोकप्रिय सरकार ने एक सौ पैंतीस करोड़ की आबादी को दो कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के भरोसे छोड़ रखा है। जबकि फिलीपींस जैसे छोटे देश में जानसन एंड जानसन सरीखी छह कोरोनारोधी कंपनियों के विकल्प मौजूद हैं।

इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी कि जब देश कोरोना संक्रमण के भयावह दौर से गुजर रहा है, दिनोंदिन कोरोना संक्रमितों की मौत के मुंह में जाने का आंकड़ा सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रहा है, उस हालत में मोदी जी विश्व के महानायक बनने की चाह में कोरोना वैक्सीन दुनिया के 86 देशों को निर्यात कर रहे हैं। है ना गर्व करने वाली बात।

इसलिए अब सरकार के भरोसे रहने से कुछ नहीं होने वाला। यदि कोरोना को हराना है, अपनी अपने परिवार की जिंदगी बचानी है तो घर में रहकर देश के जाने माने डॉक्टरों के इन सुझावों पर अमल कर लीजिए। इसमें आपका कुछ नहीं जाएगा। प्राइवेट अस्पतालों में जाकर चौदह से अट्ठाइस हजार रुपये रोजाना खर्च करने से बेहतर है आप इन सुझावों पर ध्यान दीजिएगा।

आप सबसे पहले तो यह संकल्प लें कि आप खाली पेट नहीं रहेंगे। उपवास नहीं करेंगे। एयर कंडीशन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। रोजाना एक घंटे या फिर जब तक संभव हो धूप लीजिएगा। गरम पानी पीजिएगा। कोशिश करें कभी भी गला सूखा न रह पाए। उसे गीला रखियेगा। सरसों का तेल घर में रहता ही है, उसे नाक में लगाएं। घर में कपूर या गूगल जलाइयेगा। रोजाना कपूर व लौंग डाल कर धूनी दें। आधा चम्मच सौंठ को हर सब्जी में पकते हुए डालिए। रात को दही कभी भी न खाएं व हर रोज रात में हल्दी पड़ा हुआ एक गिलास नहीं तो एक कप दूध अवश्य पीजिए। संभव हो तो एक चम्मच च्यवनप्राश खाएं। चाय में लौंग डालकर पिएं।

ज्यादा से ज्यादा संतरा खाएं। आंवले का किसी भी रूप में वह चाहे अचार हो, मुरब्बा हो या फिर चूर्ण ही क्यों न हो, अवश्य लीजिएगा। यह ध्यान रखियेगा कि दूध में हल्दी आपके शरीर में इम्युनिटी बढा़ने में मदद करती है। इन सुझावों को जरूर अपनाइयेगा।

इसके अलावा डाक्टरों की राय है कि दिन में भरपूर पानी पिएं। गर्म पानी में नींबू मिलाकर रोजाना पीने से वायरस फेफड़ों तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाते हैं। साथ ही विटामिन ए व विटामिन सी लें। दिन में दो संतरे जरूर खाएं। चार कप चाय जरूर पीजिए।

इससे सोडियम पोटेशियम मिलेगा। सुबह शाम दो गिलास दूध लीजिए। जिंक की कमी के लिए एक अंडा रोज लीजिए। रोजाना दाल लें। प्रोटीन की कमी को पूरा कीजिए। भाग दौड़ न करें और बिस्तर पर आराम करें। सबसे बडी़ बात घर से बाहर न निकलें। घर में रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे। बहुत ही जरूरत हो तो मास्क पहनकर ही बाहर निकलें व दो गज की दूरी अवश्य बनाये रखिए। हाथ न मिलाइयेगा।

याद रखियेगा कि यदि हम जिंदा रहेंगे तभी कोरोना नामक महामारी से लड़ पाएंगे। हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि हम भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। जो लोग आस्था के वशीभूत हो कुंभ में गंगा स्नान कर वापस आएं हैं, उनके संपर्क में न आएं, न उनसे मिलें। उनसे दूरी बनाएं रखें। कारण यह कहना कि कुंभ में गंगा में स्नान करने से कोरोना नहीं होगा, यह सरासर जनता, परिवार और अपने सगे-संबंधियों के साथ धोखा है।

समझ नहीं आता कि जब धारा 144 के तहत चार से अधिक लोग एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते, तो धार्मिक आस्था के बहाने करोड़ों लोगों को कुंभ में जाकर गंगा स्नान की इजाजत देना कहां का न्याय है। यह साफ तौर पर निरीह धर्म परायण जनता को मौत के मुंह में झोंकने जैसा है। इससे जाहिर हो जाता है कि सरकार को जनता के जीवन की कोई चिंता नहीं है। इसलिए सरकार के भरोसे न रहें, अपनी हिफाजत खुद करें।

विडम्बना देखिए जो सरकार पिछले साल तबलीगी जमात के जलसे को कोरोना के विस्तार के लिए जिम्मेदार मान रही थी, वही सरकार कुंभ में करोड़ों हिंदू भक्तों के इकट्ठे होने को कैसे जायज करार दे सकती है। जबकि सच यह है कि कुंभ से कोरोना के विस्तार के लिए कोई खतरा नहीं है। गंगा में डुबकी लगाकर तो कोरोना मर जाता है।


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