- सहारनपुर में फैली शोक की लहर
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार राजेंद्र राजन का गुरुवार देर रात निधन हो गया। उन्हें फेफड़े में संक्रमण हो गया था, लिहाजा वह मेडिकल कालेज पिलखनी में दाखिल थे। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजन जी का गुरुवार दोपहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी मौत पर साहित्यकारों के अलावा सामाजिक संगठनों व राजनीतिज्ञों ने भी शोक व्यक्त किया है। पत्रकारों ने भी राजन की मौत पर दुख का इजहार किया है।
बता दें कि राजेंद्र राजन मूल रूप से शामली के एलम कस्बा के रहने वाले थे। उनका जन्म 9. 8. 1952 को हुआ था। विज्ञान में स्नातक राजन जी सहारनपुर के स्टार पेपर मिल में आफिसर सोशल वर्क थे। सन 2010 में वह सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद से स्वतंत्र लेखन और काव्य मंचों पर आते-जाते रहे। इनके बड़े पुत्र एयरफोर्स से कार्यरत होकर एक बैंक में सेवाएं देते हैं तो वहीं उनके छोटे बेटे एक कंपनी में जॉब करते हैं।
तबीयत खराब होने पर मुजफ्फरनगर के एक डॉक्टर से दिखाया गया था। राजन के पुत्र प्रशांत ने बताया कि उनके पिता कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवा चुके थे। जबकि अभी दूसरी डोज लगवानी बाकी थी। इसी बीच में उनकी तबीयत बिगड़ गई। और इनकी मौत हो गई। इस घटना से साहित्य जगत में शोक की लहर है।
राजेंद्र राजन पिछले 40 वर्षों से साहित्य जगत में कार्यरत थे। इनके लिखे कई गीत और ओर कविताएं काफी प्रचलित रहीं। दूर्दशन, आकाश्वाणी के साथ ही देश-विदेश के मंचों पर भी ये कविता पाठ कर चुके थे। अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति यूएसए से इनकों अमेरिका के 16 शहरों में हुए कवि सम्मेलन में भी काव्य पाठ किया था।
हिंदी उर्दू एकेडमी से साहित्यिक पुरुस्कार, कन्हैया लाल मिश्र पुरस्कार, महादेवी पुरस्कार व साहित्य भूषण पुरस्कार भी मिल चुका है। राजन की मौत पर साहित्यकार सुरेंद्र सिंघल, वीरेंद्र आजम, विनोद भृंग, रजनीश चौहान, पत्रकार जावेद साबरी, अवनीन्द्र कमल, अबूबकर सिबली, मशकूर, गौरव मिश्रा आदि ने भी शोक जताया। सदर विधायक संजय गर्ग ने कहा कि राजन सहारनपुर के गौरव थे।
उनका जाना लंबे समय तक अखरता रहेगा। सांसद हाजी फजर्लुहमान ने कहा है कि राजेंद्र राजन ने सहारनपुर का नाम दुनियाभर में रोशन किया। उनकी असामयिक मौत अखरने वाली है। नगर के कई सामाजिक संगठनों ने भी राजेंद्र राजन की मौत पर शोक व्यक्त किया है।

