- नाम मात्र की शिकायतों का हो रहा है निस्तारण
जनवाणी ब्यूरो |
सहारनपुर: आम जन की समस्याओं के तेज गति एवं गुणवत्ता युक्त निस्तारण के लिए प्रशासन की ओर से समाधान दिवस की शुरुआत की गई थी। लेकिन यह मात्र औपचारिक बन कर रह गया है।
कोरोना की लहर के मंद पड़ जाने के बाद जुलाई में जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने प्रत्येक माह के प्रथम एवं तीसरे शनिवार को तहसील मुख्यालयों पर समाधान दिवस आयोजित करने के आदेश जारी किए थे। समाधान दिवस का आयोजन तो जरूर किया जा रहा है लेकिन उसमें आने वाले शिकायतों का निस्तारण नही हो पा रहा है। बता दें कि 17 जुलाई को आयोजित सदर तहसील में कुल 30 शिकायतें प्रशासन के सामने आई थी, जिनमें से मात्र एक का ही मौके पर निस्तारण हो पाया था।
17 जुलाई को ही नकुड़ तहसील के सामाधान दिवस में 18 शिकायतों में से एक शिकायत का भी मौके पर निस्तारण नहीं हो पाया था। तो 24 जुलाई को बड़गांव में आयोजित तहसील दिवस में एक शिकायत आई थी जिसका मौके पर ही निस्तारण कर दिया था। 7 अगस्त को देवबंद में आयोजित तहसील दिवस में कुल 16 शिकायतें आई थीं। इनमें से मात्र एक शिकायत का ही मौके पर निस्तारण हो पाया था।
जबकि मंडलायुक्त लोकेश एम द्वारा तहसील दिवस में अनुपस्थित रहने के कारण 6 अधिकारियों का एक दिन का वेतन भी रोकने के आदेश दिए गए थे। 7 अगस्त 14 अगस्त एवं 21 अगस्त को नकुड़ तहसील में आयोजित तहसील दिवस में आई कुल 85 शिकायतों में से मात्र 7 शिकायतों का ही मौके पर निस्तारण हो पाया था।
28 अगस्त को गंगोह में आयोजित समाधान दिवस में 15 में से 5 शिकायतों का निस्तारण अधिकारियों द्वारा किया गया था, जबकि 4 सितंबर नकुड़ तहसील दिवस में 41 शिकायतों में मात्र एक का ही निस्तारण मौके पर हो पाया था। 4 सितंबर को ही देवबंद में आई 12 शिकायतों में से किसी का भी निस्तारण नहीं हो पाया था। जबकि नगर निगम में आई एक शिकायत का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया था। आकंडे बताते हैं कि समाधान दिवस पर मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है।

