Tuesday, May 28, 2024
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बगावत से सहमी भाजपा ने नहीं बदले प्रत्याशी, कितना सही पुराने चेहरों पर दांव

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पश्चिमी यूपी के प्रथम चरण के चुनावी ‘रण’ में ज्यादातर पार्टियों ने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है। चुनावी महारथी अपने-अपने पक्ष में ताल ठोंकने लगे हैं, वहीं भाजपा ने भी अपनी 58 प्रत्याशियों की सूची फाइनल घोषित कर दी। भाजपा की सूची में पुराने दिग्गज ही चुनावी ‘रण’ में उतारे गए हैं। एक तरह से भाजपा पुराने दिग्गजों पर ही दांव लगा रही है। मेरठ की सातों विधानसभा सीट के प्रत्याशी भाजपा ने घोषित कर दिये हैं, जिसमें मेरठ के सिवालखास, मेरठ शहर और मेरठ कैंट पर अवश्य ही भाजपा ने नये चेहरे को वरीयता दी हैं। बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा ने सीटिंग एमएलए को ही चुनाव मैदान में उतारा है। बागपत में भी पुराने दिग्गजों पर ही भाजपा ने भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया है।

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पश्चिमी यूपी में भाजपा के सीटिंग एमएलए का टिकट कटने की कई दिनों से चर्चाएं चल रही थी, उन पर भाजपा हाईकमान ने सीटिंग विधायकों पर भरोसा कर विराम लगा दिया। मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर व बिजनौर में भी भाजपा ने पुराने दिग्गजों को ही चुनावी ‘रण’ में उतारा हैं।

भाजपा में कई दिनों से टिकटों को लेकर भारी मारा-मारी चल रही थी। बुढ़ाना के भाजपा विधायक उमेश मलिक के टिकट को लेकर भी खार्सी चर्चाएं थी, लेकिन तमाम विरोधाभास के बीच उमेश मलिक को ही भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने सिंबल देकर चुनाव मैदान में उतारा हैं।

दरअसल, बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत और भाजपा विधायक उमेश मलिक कृषि कानून के मुद्दे को लेकर आमने-सामने आ गए थे। सिसौली में उमेश मलिक का भारी विरोध हुआ था तथा कुछ लोगों ने उमेश मलिक की गाड़ी पर कालिख पोत दी थी। इसके बाद से ही किसानों में उमेश मलिक का विरोध हो गया था। यह माना जा रहा था कि उमेश का टिकट कट सकता हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेरठ कैंट सीट से सत्यप्रकाश अग्रवाल चार बार विधायक रह चुके हैं।

उम्र भी 82 वर्ष हो चुकी हैं। ऐसे में उनका टिकट काटकर पूर्व विधायक अमित अग्रवाल को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया हैं। सिवालखास विधानसभा ऐसी सीट हैं, जहां पर भाजपा के सीटिंग विधायक जितेन्द्र सतवाई का टिकट कटा हैं, उनकी जगह कोपरेटिव बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया हैं।

भाजपा के शीर्ष नेताओं ने भी माना है कि यदि ज्यादा टिकट भाजपा विधायकों के कटेंगे तो पार्टी में असंतोष पैदा हो जाएगा। इसी वजह से भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने बड़े ही सलीके से चुनावी ‘रण’ में प्रत्याशियों को उताकर सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशियों की घेराबंदी करने की रणनीति बनाई हैं। अब देखना यह है कि भाजपा अपनी इस रणनीति में कितनी कामयाब होती हैं।

शहर सीट: बसपा से दिलशाद शौकत                                                       

बसपा ने मेरठ शहर सीट से दिलशाद शौकत को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। दिलशात शौकत दो बार शहर में पार्षद चुने जा चुके हैं तथा वर्तमान में बसपा से जुड़े हुए थे। बसपा ने दिलशाद शौकत पर अपना दांव लगाया है। इस तरह से शहर सीट से दो मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में आ गए हैं। सपा से रफीक अंसारी और बसपा से दिलशाद शौकत।

कमल दत्त शर्मा एक नजर में                                               

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  • नाम: कमल दत्त शर्मा
  • उम्र: 46
  • निवास: इंदिरा नगर ब्रह्मपुरी

पद-                                                                                                 

  • दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष
  • क्षेत्रीय कार्यकारिणी में मंत्री
  • महानगर भाजपा में महामंत्री
  • महानगर भाजपा में उपाध्यक्ष

वेस्ट यूपी में व्यवसायिक प्रकोष्ठ के संयोजक                                                   

मेरठ शहर से पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का टिकट काट दिया गया है। उनकी जगह कमल दत्त शर्मा को यहां से प्रत्याशी बनाया गया है। डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेरठ से तीन बार विधायक रह चुके हैं। यदि लक्ष्मीकांत वाजपेयी का राजनीतिक इतिहास देखा जाए तो काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा हैं।

लक्ष्मीकांत वाजपेयी 1977 में जनता पार्टी युवा मोर्चा के युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष बनाए गए। वे 1980 से लेकर 1987 तक भाजपा के मेरठ जिला महासचिव रहे। 1984 से 86 तक उत्तर प्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष रहे। वह अपनी ईमानदारी और जीवन शैली के लिए जाने जाते रहे। मेरठ विधानसभा क्षेत्र के नए प्रत्याशी कमल दत्त शर्मा की बात करें तो वह भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं।

अपनी हिंदूवादी छवि के कारण वह हमेशा विवादों में रहें। कमल दत्त शर्मा अपना राजनीतिक गुरु लक्ष्मीकांत वाजपेयी को ही मानते हैं। वह लक्ष्मीकांत वाजपेयी के बहुत करीबी माने जाते हैं। इस बार मेरठ शहर में मुकाबला भाजपा, सपा और बसपा के बीच होगा। यहां पर बसपा ने दिलशाद शौकत को चुनाव मैदान में उतारा हैं, जिसके बाद सपा प्रत्याशी रफीक अंसारी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

दरअसल, सपा-बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी आ गए हैं, जिसके चलते चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला हैं। रफीक व दिलशाद शौकत दोनों ही मजबूत प्रत्याशी हैं, ऐसे में मुस्लिमों में बिखराव हो सकता हैं, जिसके बाद भाजपा चुनाव में अच्छी बेटिंग कर सकती हैं। भाजपा में कमलदत्त शर्मा को हिन्दुत्ववादी होने का ही इनाम मिला है।

कमल दत्त शर्मा की छवि हिन्दुत्व वाली हैं, बवाल में खड़ा रहना, फिर सरकार किसी की भी हो, लेकिन कमलदत्त शर्मा की मौजूदगी से टकराव भी बन जाता हैं। इसी वजह से भाजपा ने उसे शहर सीट से चुनाव मैदान में उतारा हैं। क्योंकि भाजपा भी पश्चिम यूपी का माहौल 2017 वाला लौटाना चाहती हैं।

क्योंकि भाजपा किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी यूपी में कमजोर पड़ी हैं, जिसके चलते हिन्दुत्ववादियों को ही चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है। दरअसल, शहर सीट से पंडित सुनील भराला भी टिकट मांग रहे थे। तीन दिन पहले वायरल हुई भाजपा की सूची में उनका शहर सीट से नाम भी आ गया था।

मेरठ दक्षिण में इस बार और दिलचस्प होगा मुकाबला                                                

भाजपा विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर को इस बार भी भाजपा ने मेरठ दक्षिण से प्रत्याशी बनाया हैं। 2017 में डा. सोमेन्द्र तोमर मेरठ दक्षिण से विधायक निर्वाचित हुए थे। इस बार भी भाजपा ने उन पर ही भरोसा जताया है। मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प रहेगा क्योंकि यहां से सपा ने आदिल चौधरी को चुनाव मैदान में उतार दिया हैं। इससे पहले बसपा ने कुवंर दिलशाद अली को चुनाव मैदान में उतारा हैं।

इसलिए भी चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है क्योंकि दो मुस्लिम तथा डा. सोमेन्द्र तोमर अकेले हैं। हालांकि अभी कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा होना बाकी हैं। इसके बाद तो स्थिति क्लीयर हो जाएगी। भाजपा पिछले दो बार से मेरठ दक्षिण सीट से जीत दर्ज करती आ रही है।

इससे पहले 2012 में भड़ाना भाजपा से चुनाव जीते थे। इस तरह से भाजपा इस सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी कर रही हैं। 2017 के चुनाव में डा. सोमेन्द्र तोमर के सामने कांग्रेस ने आजाद सैफी और बसपा ने हाजी इमरान कुरैशी को चुनाव मैदान में उतारा था।

आजाद सैफी व इमरान कुरैशी के बीच मुस्लिमों का बटवारा हुआ, जिसके बाद भाजपा प्रत्याशी डा. सोमेन्द्र तोमर ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी वैसे ही स्थिति मेरठ दक्षिण क्षेत्र में पैदा हो रही हैं। इस बार सपा मैदान में हैं। सपा ने मेरठ दक्षिण क्षेत्र से आदिल चौधरी को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।

आदिल चौधरी वर्तमान में सपा के महानगर अध्यक्ष थे। आदिल चौधरी लंबे समय से सपा से जुड़े हुए हैं। गठबंधन होने के बाद सपा से यह सीट पिछली बार कांग्रेस के खाते में चली गई थी, जिसके चलते आदिल चौधरी का टिकट कट गया था। इस बार मेरठ दक्षिण सीट से सपा ने अपने पास रखी है। सपा के आदिल चौधरी यहां से चुनावी ताल ठोकेंगे।

डा. सोमेंद्र तोमर एक नजर में                                           

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  • नाम: डा. सोमेन्द्र तोमर
  • निवास: शास्त्रीनगर
  • उम्र: 41 वर्ष
  • शिक्षा: पीएचडी, एमफिल

राजनीतिक जीवन                                                     

  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में छह वर्ष
  • चौधरी चरण सिंह विवि छात्रसंघ में महामंत्री
  • चौधरी चरण सिंह विवि छात्रसंघ में अध्यक्ष
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश संयोजक
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा में प्रदेश मंत्री
  • पुणे में आदर्श युवा विधायक पुरस्कार से सम्मानित
  • वर्तमान विधायक मेरठ दक्षिण से

अमित अग्रवाल एक नजर में                                

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  • नाम: अमित अग्रवाल
  • उम्र: 67 वर्ष
  • शिक्षा: बीएससी, एलएलबी

राजनीतिक जीवन                                                                  

  • 1962 से आरएसएस और जनसंघ में
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तमाम पदों पर
  • 1975 में आपातकाल में जेल व मीसा में जिला बदर
  • 1993 में कैंट से विधायक
  • 1996 में कैंट से रिकार्ड 42000 मतों से जीते
  • पार्टी के स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक

मनिंदरपाल सिंह एक नजर में                                                         

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  • नाम: मनिंदरपाल सिंह
  • उम्र: 52 वर्ष
  • शिक्षा: एमए, बीएड, एलएलबी

राजनीतिक जीवन                                                                   

  • 1995 में भाजपा महानगर कार्यकारिणी में
  • दो साल वेस्ट यूपी पंचायत राज प्रकोष्ठ के संयोजक
  • 2005 – जिला पंचायत सदस्य
  • जिला पंचायत अध्यक्ष
  • अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक
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