Sunday, May 26, 2024
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भाजपा में बगावत!: काली का तेवर हार की वजह न बन जाए!

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पूर्व विधायक गोपाल काली ने खटीक के खिलाफ किया अमर्यादित शब्दों का प्रयोग           

रामबोल तोमर |

मेरठ: भारतीय जनता पार्टी ने जैसे ही विधानसभा प्रत्याशियों के टिकट घोषित किये, ठीक वैसे ही कुछ लोगों के चेहरे खिल गए…तो कहीं बगावत की चिंगारी भी भड़क गई। सबसे बड़ी बगावत की चिंगारी ऐतिहासिक धरती हस्तिनापुर से उठी हैं। भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने वाला कोई और नहीं, बल्कि उनकी ही पार्टी के पूर्व विधायक गोपाल काली हैं।

फेसबुक पर गोपाल काली ने भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक के खिलाफ ऐसे अमर्यादित शब्दों का भी प्रयोग कर दिया हैं, जो आमतौर पर नहीं किया जा सकता। हस्तिनापुर में भाजपा में उठी बगावत की चिंगारी क्या करेगी? इसको लेकर भाजपा के बड़े नेता भी सकते में आ गए हैं। क्योंकि गोपाल काली का हस्तिनापुर में अच्छा वजूद हैं, जिसके चलते भाजपा को बड़ा नुकसान इस बगावत से हो सकता हैं।

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गोपाल काली ने दो टूक ऐलान कर दिया है कि हस्तिनापुर की धरती से अब भाजपा को नहीं जीतने देंगे। भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक को प्रत्याशी बनाने पर गोपाल काली ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने, भाजपा प्रत्याशी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं तथा विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के भी स्पष्ट संकेत दिए हैं।

सूत्रों का कहना है कि गोपाल काली भाजपा को हराने के लिए निर्दलीय चुनाव भी लड़ सकते हैं। हस्तिनापुर में जिस तरह से भाजपा में बगावत शुरू हुई है, शायद पार्टी हाईकमान को इसका अंदाजा नहीं था। नामांकन दाखिल होने से पहले ही भाजपा में इतना बड़ा तूफान उठेगा, ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।

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अब देखना यह होगा कि भाजपा के बड़े नेता बगावत की चिंगारी को कैसे शांत करते हैं? बगावत सिर्फ हस्तिनापुर में ही नहीं, बल्कि राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त सुनील भराला के घर से भी बगावत की ‘बू’ आने लगी है। पं. सुनील भराला के छोटे भाई अजय भराला जो वर्तमान में भाजपा किसान मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष भी ने फेसबुक पर लिख दिया है कि भाजपा के निर्णय का धन्यवाद, लेकिन अब रास्ता दूसरा अख्तियार करना पड़ेगा।

यह अजय भराला की चेतावनी भाजपा में बगावत की सुगबुगाहट है। इससे स्पष्ट है कि मेरठ शहर सीट पर भी बगावत हो सकती है। दरअसल, पंडित सुनील भराला मेरठ शहर सीट से टिकट मांग रहे थे। लगभग उनका टिकट पार्टी ने फाइनल भी कर दिया था, लेकिन दो दिन पहले अचानक सुनील भराला का टिकट काट दिया गया, जिसके बाद ही कमलदत्त शर्मा का शहर सीट से भाजपा का टिकट घोषित कर दिया गया। बगावत सिवालखास विधानसभा क्षेत्र में भी शुरू हो गई है।

माना जा रहा है कि मीनाक्षी भराला भी भाजपा से बागी हो गई है, जिसके चलते मीनाक्षी सिवालखास विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक सकती हैं। मीनाक्षी भराला सिवालखास से भाजपा का टिकट मांग रही थी। इस तरह से भाजपा को मेरठ शहर, हस्तिनापुर और सिवालखास विधानसभा क्षेत्रों में बागियों का सामना
करना पड़ेगा।

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भाजपा ने सिवालखास से मनिंदरपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। यहां जितेन्द्र सतवाई का टिकट भाजपा ने काटकर मनिंदरपाल को टिकट दिया हैं। उनके खिलाफ भाजपा नेत्री मीनाक्षी भराला ने बगावत का झंडा उठा लिया है। मीनाक्षी भराला ने ‘जनवाणी’ से बातचीत में कहा कि सोमवार को उन्होंने नानू स्थित आईटीआई कॉलेज पर समर्थकों की मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में फैसला किया जाएगा कि सिवालखास से निर्दलीय चुनाव लड़ा जाए या फिर नहीं।

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