जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पंजाब के सीमांत क्षेत्र अजनाला के गांव साहूवाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रावी दरिया में आई बाढ़ से गांव में चार-चार फीट तक पानी भर गया है, जिससे 60 परिवारों का यह छोटा-सा गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है। ग्रामीण बीते कई दिनों से पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि अब लोगों की लड़ाई सिर्फ बचाव की नहीं, बल्कि जीने की है।
बीमारियों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी
गांववासियों — जसपाल सिंह, हरदीप सिंह, मंगा सिंह और हरजिंदर — ने बताया कि पानी का स्तर कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अब बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ गया है।
बुखार और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं
प्रशासन ने मेडिकल किटें बांटी हैं
पर्याप्त जांच और इलाज की सुविधा नहीं होने से लोग डरे हुए हैं
पशुधन पर दोहरी मार, सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ीं
गांव के मवेशी भूखे और बीमार हैं।
पानी में लगातार खड़े रहने से पशुओं के पैरों में संक्रमण फैल गया है
चारे की भारी कमी बनी हुई है
अब तक चार ग्रामीण सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से जान बची
ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हालात रहे तो पशुधन का भारी नुकसान होना तय है।
राहत सामग्री पर सवाल, असली ज़रूरतमंद वंचित
ग्रामीणों का आरोप है कि राहत सामग्री का वितरण अनियमित और अपारदर्शी रहा।
जरूरतमंदों को मदद नहीं मिली
कई ऐसे लोग राहत ले गए जिन्हें उसकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी
समान वितरण ना होने से गांव में असंतोष का माहौल बन गया है
चोरी की वारदातें, असुरक्षा का माहौल
बाढ़ के कारण जब लोग सुरक्षित स्थानों पर गए, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने घरों में चोरी कर ली।
अब तक तीन-चार घरों में सेंधमारी की शिकायतें आई हैं
लोग डरे हुए हैं और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं
खड़ी फसल पूरी तरह तबाह, रोज़ी-रोटी पर संकट
साहूवाल गांव की आर्थिक रीढ़ खेती पर टिकी हुई है।
इस बाढ़ ने पूरी फसल बर्बाद कर दी है
किसानों का कहना है कि अब सिर्फ मौसमी नुकसान नहीं, बल्कि आने वाले महीनों की आजीविका पर भी गहरा असर पड़ेगा
सरकार से उचित मुआवजा और खेती फिर से शुरू कराने के लिए सहायता की मांग की जा रही है
राहत कार्य जारी, लेकिन जरूरतें कहीं ज्यादा
प्रशासन, सेना, बीएसएफ, एनडीआरएफ और एनजीओ की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है
मेडिकल टीमें गांव का दौरा कर रही हैं लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह सहायता केवल शुरुआती है, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए लंबे समय तक समर्थन की जरूरत है।
सरकार से ग्रामीणों की बड़ी अपेक्षा
356 की आबादी वाले इस गांव में 184 पुरुष और 172 महिलाएं हैं। घर टूट चुके हैं, मवेशी बीमार हैं, और खेत बर्बाद हो चुके हैं। गांववाले पुनर्निर्माण के लिए ठोस योजना चाहते हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
तुरंत और पारदर्शी मुआवजा वितरण
टूटे घरों की मरम्मत
बीमार पशुओं का इलाज
चारे की व्यवस्था
राहत सामग्री का सही वितरण
गांव में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए

