Saturday, May 25, 2024
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जल को प्रदूषित कर रही सरशादी लाल डिस्टलरी

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  • मंसूरपुर नाले के माध्यम से काली नदी व हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा प्रदूषित जल

  • प्रदूषण विभाग की जांच में हुआ था खुलासा, नागरिकों की शिकायत पर जिला प्रशासन ने कराई थी जांच

  • सुधार होने तक 30 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूलने के है आदेश

  • डिस्टलरी को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का दिया गया था समय

मिर्जा गुलजार बेग |

मुजफ्फरनगर: सरशादी लाल डिस्टलरी एंड कैमिकल वर्क्स एक बार फिर चर्चाओं में है। डिस्टलरी पर प्रदूषण विभाग ने शिकंजा कसा है। यह शिकंजा आस-पास के ग्रामीणों की शिकायत के बाद कसा गया है। प्रदूषण विभाग की जांच में डिस्टलरी द्वारा जल को प्रदूषित करने का खुलासा हुआ है, जिसमें डिस्टलरी पर सुधार होने तक 30 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाये जाने के आदेश भी दिये गये हैं।

प्रदूषण विभाग द्वारा डिस्टलरी को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन तीन माह बाद भी डिस्टलरी ने अपना पक्ष नहीं रखा है। ग्रामीणों द्वारा लगातार डिस्टलरी से प्रदूषण फैलाये जाने की शिकायत की जा रही है।

बता दें कि सरशादी लाल डिस्टलरी में शीरे का प्रयोग कर एथेनॉल, ईएनए, रेक्टीफाइड स्प्रिट व डिनेचर स्प्रिट बनाने का कार्य होता है। जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1974 की यथा संशोधित धारा 47 के अंतर्गत सरशादी लाल डिस्टलरी एंड कैमिकल रजिस्टर्ड है।

डिस्टलरी के खिलाफ जिला प्रशासन के माध्यम से शिकायत मिलने पर प्रदूषण विभाग द्वारा चार मई 2023 को डिस्टलरी का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के समय उद्योग संचालित नहीं पाया गया था। सीपीयू के पीछे खाली पड़ी कच्ची भूमि पर भूरे रंग का उत्प्रवाह भंडारित पाया गया था।

प्रदूषण विभाग द्वारा भंडारित उत्प्रवाह के जल नमूने लेकर उनका विश्लेषण किया गया, तो विश्लेषण में सीओडी का मान 1200/मिली/लीटर पाया गया, जिससे साबित हो गया था कि भंडारित उत्प्रवाह प्रदूषित श्रेणी का था। इस उत्प्रवाह से भूमि जल के प्रदूषित होने के पूरे-पूरे चांस पाये गये थे।

संरक्षण के दौरान मंसूरपुर ड्रेन के जल नमूने की विश्लेषण आख्या के अनुसार परिचालक सीओडी का मान 1360 मिली/लीटर पाया गया। प्रदूषण विभाग को जिला प्रशासन के माध्यम से शिकायत मिली थीकि रात के समय फलेक्सेबल पाइप से रोड साइड के माध्यम से अधुद्धिकृत उत्प्रवाह मंसूरपुर ड्रेन में निस्तारित किया गया है।

नाले के जल नमूने में सीओडी की मात्रा अधिक पाये जाने से यह स्पष्ट हो गया था कि उद्योग द्वारा अशुद्धिकृत उत्प्रवाह का निस्तारण मंसूरपुर नाले में किया गया है। यह नाला कली नदी पश्चिमी में मिलता है, जो अंत में हिंडन नदी में समाहित हो जाती है। इस उत्प्रवाह के कारण काली नदी व हिंडन नदी का जल प्रदूषित हो रहा है।

बता दें कि मंसूरपुर डिस्टलरी को 31 दिसम्बर 2024 तक सशर्त जल सहमति प्रदान की गई है, परन्तु उद्योग द्वारा इसका उलंघन किया जा रहा है और शर्तों को पूरा नहीं किया जा रहा है। डिस्टलरी द्वारा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974 यथा संशोधित की धारा 25/26 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रदूषण बोर्ड से मिली एनओसी का उलंघन कर मंसूरपुर नाले व आस-पास के पर्यावरण एवं जनमानस के स्वास्थ्यों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जो कि एक दंडनीय अपराध है। प्रदूषण विभाग द्वारा शर्तों का उलंघन किये जाने पर इस उद्योग के संचालन को रोकने पर सहमति जताते हुए बोर्ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन डिस्टलरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

यह था कारण बताओ नोटिस

प्रदूषण विभाग द्वारा जिन बिन्दुओं पर मंसूरपुर डिस्टलरी से कारण बताओ नोटिस मांगा गया, उनमें पहली शर्त में तीन मार्च 2020 को मिली निर्गत सहमति जल को निलंबित कर दिया गया। दूसरी शर्त में प्रदूषण विभाग द्वारा कहा गया कि क्यों न उद्योग मैसर्स सरशादी लाल डिस्टलरी एवं कैमिकल वर्क्स मंसूरपुर के उत्पादन व संचालन कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाये।

तीसरी शर्त में कहा गया कि क्यों न सक्षम अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाये कि मंसूरपुर डिस्टलरी को मिलने वाली बिजली पानी एवं अन्य सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाये।

इसके अलावा यह भी स्पष्ट करने के लिए कहा गया कि राष्ट्रीय हरित अधिनियम नई दिल्ली द्वारा पारित आदेशों के उपक्रम में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित की गई मैथोडोलोजी के अनुसार पर्यावरण मानकों का उलंघन मानते हुए 30 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से सुधारात्मक कार्रवाई किये जाने तक उलंघनकारी अवधि के लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाकर वसूली की जाये।

विभाग द्वारा डिस्टलरी को 15 दिन के अंदर अपना जवाब देने के लिए कहा गया था और जवाब न देने व संतोषजनक जवाब न मिलने पर डिस्टलरी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस की पुष्टि तथा उलंघनकारी दिवसों के लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति करने के लिए कहा गया था।

क्या कहते हैं अधिकारी

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुजफ्फरनगर के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन से प्राप्त शिकायत के आधार पर चार मई को मंसूरपुर डिस्टलरी का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान कुछ खामियां पाई गई थी, जिसके लिए उद्योग को नोटिस दिया गया था, परन्तु अभी तक नोटिस का जवाब नहीं मिला है। जवाब न मिलने पर विधिक कार्रवाई की जायेगी।

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