- खिर्वा बाइपास स्थित श्रद्धापुरी डिवाइडर पर दुकानों के निर्माण का मामला
- एमडीए अधिशासी अभियंता ने कहा जमीन एमडीए द्वारा अर्जित की गई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: खिर्वा बाइपास पर जिन अवैध दुकानों का निर्माण किया जा रहा है, उस जमीन को एमडीए ने अर्जन किया था। श्रद्धापुरी में डिवाइडर पर इस जमीन पर बनाई जा रही दुकानों पर प्राधिकरण के इंजीनियरों की टीम ने सील तो लगी थी, लेकिन सील तोड़कर दुकानों पर प्लास्टर कर दिया गया है। यह तो अवैध निर्माणकर्ता का दुस्साहस ही कहा जाएगा कि जमीन भी एमडीए की और दुकान भी अवैध बन रही है।
फिर भी इसमें कोई कार्रवाई एमडीए नहीं कर पा रहा है। दरअसल, इन दुकानों व इसके पीछे की कॉलोनी को लेकर एमडीए व लोगों के बीच विवाद हो चुका है। एमडीए ने तब कहा था कि यह जमीन एमडीए की अर्जन की गई है, लेकिन इस पर मकान बने हुए हैं। उन मकानों को तो तोड़ा नहीं गया, लेकिन जो दुकान नये सिरे से बनाई जा रही थी, उसे भी एमडीए के अधिकारी नहीं रोक पाए।
आखिर एमडीए अधिकारियों की क्या मजबूरी है कि दुकानों का निर्माण होने दिया जा रहा है। सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए ही एमडीए के इंजीनियरों ने दुकानों पर सील लगाई, फिर फोटो खींचे और एमडीए उपाध्यक्ष के ग्रुप पर डाल दिया। ऐसा करने से क्या जिम्मेदारी पूरी हो जाती है?
एमडीए के अधिशासी अभियंता अरुण शर्मा के अनुसार श्रद्धापुरी डिवाइडर रोड पर प्राधिकरण की अर्जित की गई जमीन है। यह जमीन करीब तीन हजार वर्ग गज बतायी गयी है। इस जमीन पर ही गैर कानूनी तरीके से दुकानों का निर्माण कर दिया गया है। इसमें एमडीए ने लॉकडाउन खुलने के बाद फोर्स की मांग की है, ताकि इन दुकानों का ध्वस्तीकरण किया जा सके।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इन दुकानों पर सील लगाई गयी थी, लेकिन सील तोड़कर दुकानों की फिनिशिंग की जा रही है। बता दें, जनवाणी ने एक सप्ताह पहले अवैध तरीके से पर्देदारी कर दुकानों के किये जा रहे निर्माण की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद एमडीए के इंजीनियरों को होश आया तथा उसके बाद ही इस पर सील लगाने की कार्रवाई की गई। मौके पर वर्तमान में कहीं कोई सील नहीं है।
सील को निर्माणकर्ता ने तोड़कर दुकानों का प्लास्टर चालू कर दिया है। इसके बाद पेंट भी किया जाएगा, ताकि दुकानों के निर्माण को पुराना साबित किया जा सके। वैसे पहले भी एमडीए यहां पर बनाई गयी दुकानों को अपनी जमीन बताते हुए ध्वस्तीकरण कर चुका हैं, लेकिन अवैधनिर्माणकर्ता की निडरता देखिये कि फिर से विवादित जमीन पर दुकानों को निर्माण कर दिया गया है।

