Thursday, January 27, 2022
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दैनिक जनवाणी की खास रिपोर्ट: कागजों में अभियान, शुद्ध का अधूरा युद्ध

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मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान कागजों में उलझकर रह गया है। हालात यह है कि ज्यादातर मामलों में जुर्माने से ही काम चलाना पड़ रहा हैं, जिन मामलों में एफआईआर हुई हैं, उन पर कार्रवाई के लिए सैम्पल रिपोर्ट का महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। अकेले मेरठ की बात करें तो अभी सैकड़ों मामलों की रिपोर्ट ही नहीं आई हैं। इस कारण मिलावटखोर आराम से घूम रहे हैं।


अभियान चलाये जाने में बरती जा रही लापरवाही

धड़ल्ले से बनाया जा रहा मिलावटी पनीर, नहीं हो रही कार्रवाई


जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले सामने आने के बाद भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है। विभाग को त्योहारों के नजदीक ही अभियान की याद आती है। जबकि साल भर खाने का सामान बेचा जाता है। इसी साल की बात करें तो अप्रैल माह में भेजे गये आधे से ज्यादा सैंपल के फेल साबित हुए थे, उसके बावजूद अभियान नहीं चलता। शहर में नकली पनीर और मावे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

शहर में त्योहारों के मौके पर ही खाद्य पदार्थों की शुद्धता की जांच की जाती है इसके अलावा विभाग को लोगों की जान की कोई परवाह नहीं होती। सालभर खाद्य पदार्थों की बिक्री खुलेआम होती है। उस पर किसी की नजर नहीं होती। शहर में लोग मिलावटी सामान खा खाकर बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन किसी को कोई परवाह नहीं है।

अभी तक विभाग की कार्रवाई की बात की जाये तो विभाग की ओर से सैंपल भरकर भेज दिये जाते हैं, लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं होती। सैंपल भरे जाने के बाद भी खाद्य पदार्थों की बिक्री होती रहती है। जिस कारण लोग मिलावटी खाद्य पदार्थ खाकर बीमार पड़ रहे हैं।

डॉक्टरों की मानें तो गैस्टिक, फूड प्वाइजन समेत कई ऐसी बीमारियां है जो मिलावटी खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल के कारण हो रही हैं। विभाग की कार्रवाई की ही बात की जाये तो त्योहारों के मौके पर खूब खाद्य पदार्थ नष्ट किये जाते हैं। उन्हें नष्ट कर दिया जाता है, लेकिन वहां दोबारा से बनने वाला सामान जांच में नहीं लाया जाता।

सिंथेटिक दूध और मावे का खूब हो रहा इस्तेमाल

शहर में कई जगहों पर नकली मावा और नकली दूध का इस्तेमाल तक किया जाता है, लेकिन विभाग इस ओर आंखे मूंदे बैठा है। बता दें कि नकली दूथ से मावा बनाकर खुलेआम बेचा जाता है। कहीं-कहीं तो मावे के दाम 200 रुपये किलो तक हैं और कहीं पर 300 रुपये किलो मिलता है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मावे के दामों पर असर किन कारणों से हो सकता है। लाला के बाजार, हापुड़ अड्डा समेत कई ऐसे बाजार हैं। जहां मावे का व्यापार होता है, लेकिन पिछले एक साल की बात करें तो विभाग की ओर से मावे के सैंपल भेजने अलावा कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। इस तरह से खुलेआम नकली मावे का व्यापार चल रहा है और कोई रोकने वाला नहीं है।

मिलावटी पनीर की भी हो रही खूब बिक्री

मिलावटी मावे की तरह मिलावटी पनीर भी खूब बिक रहा है। आजकल शहर के हर बाजार में सोया चाप, चाप कबाब आदि बेचे जा रहे हैं इसमें किस प्रकार का पनीर लगाया जाता है, यह किसी को नहीं बता। यहां मिलावटीपनीर भी खुलेआम तैयार किया जर रहा है। इसके अलावा सोया पनीर भी खूब बिक रहा है। इन खाद्य पदार्थों में किस प्रकार का पनीर इस्तेमाल होता है। यह किसी को नहीं पता, लेकिन इसके बावजूद दुकानों पर भीड़ लगी रहती है। लोग फास्ट फूड की ओर तेजी से भाग रहे हैं।

मिलावटी मसाले भी किये जाते हैं तैयार

खाद्य विभाग के अधिकारियों की ही मानें तो यहां शहर में कई बार मिलावटी मिर्च, नकली मसाले तक पकड़ में आये हैं। इन पर विभाग की ओर से जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन इनके द्वारा तैयार किये गये यह मिलावटी मिर्च मसाले खुलेआम बाजार में बेचे जाते हैं। इनका इस्तेमाल बाजारों में किया जाता है और इनसे तैयार होने वाले प्रोडक्ट लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं जिस कारण आज लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं।

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