Tuesday, June 25, 2024
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समय रहते ही संभालिए दिल को

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नीतू गुप्ता |
दिल से संबंधित बीमारियां दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। अब तो हृदय रोग कम उम्र के लोगों में भी होता देखा जा रहा है। उसका मुख्य कारण जीवन में तनाव का बढ़ना है। हम सदैव तनाव से ग्रस्त रहते हैं। दूसरा कारण यह है कि हमारे खान-पान का तरीका गलत होता जा रहा है जो हृदय रोगों को बढ़ावा दे रहा है। यदि हम इस रोग पर समय रहते ही ध्यान दें तो हम अपने छोटे से पर महत्वपूर्ण काम करने वाले दिल को संभाल सकते हैं।
-शाकाहारी भोजन का सेवन करना चाहिए। शाकाहारी भोजन हृदय के लिए लाभदायक है। भारत में मांसाहार बढ़ने के कारण हमारे देश में हृदय रोग की दर में भी बढ़ोतरी हुई है जबकि विदेशों में लोग अब शाकाहार की ओर मुड़ रहे हैं इसलिए उन देशों में हृदय रोग की दर में कमी आ रही है।
-सरसों का शुद्ध तेल हृदय के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए भोजन में घी-मक्खन के स्थान पर रिफाइंड आॅयल और सरसों के तेल का ही प्रयोग करना चाहिए।
-जो लोग नाश्ते के तुरन्त बाद काम के लिए निकल जाते हैं उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि वे हल्का नाश्ता लें। भारी नाश्ता हृदय पर दबाव डालता है। यदि भारी नाश्ता खाना पड़े तो उसके बाद कुछ आराम करें, तुरंत काम पर न निकलें।
-हृदय रोग से बचने के लिए शरीर को सक्रिय रखना बहुत जरूरी होता है, इसलिए व्यायाम और सैर को अपना साथी बना लें। सैर और व्यायाम करते समय मानसिक रूप से शांत रहें। ध्यान भी मानसिक तनाव को कम करता है।
-आधुनिक युग प्रतिस्पर्धा युग होने के कारण जब महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं होती तो लोग अक्सर अवसाद और मानसिक तनाव में आ जाते हैं। इसलिए महत्वाकांक्षाएं उतनी रखें जिनको आप पूरा कर सकें या फिर यह सोच कर प्रयत्न करें कि पूरी नहीं होने पर पुन: उसे पूरा करने का प्रयास करेंगे। निराश नहीं होंगे।
-सूर्य की रोशनी जब हरे पत्तों पर पड़ती है तब प्रकाश संश्लेषण होने से हवा में आॅक्सीजन की मात्र बढ़ती है। इसका अर्थ है सुबह अंधेरे और देर रात तक घूमने के लिए  न निकलें। सूर्योदय के बाद ही सैर के लिए जाएं।
-मानसिक तनाव रक्त की रासायनिक संरचना को बिगाड़ने में मदद करता है। तनावग्रस्त होने से हृदय पर अतिरिक्त जोर पड़ता है जिससे रक्तचाप बढ़ता है और रक्त में एलडीएल बढ़ जाता है जो हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
-भागदौड़ से स्वयं को दूर रखें। वैसे तो आज की मांग के अनुसार कम समय में अधिक काम करने पड़ते हैं जिससे भागदौड़ करना स्वाभाविक होता है। भागदौड़ भी हृदय पर अतिरिक्त भार डालता है जो हृदय हेतु गलत है। कामों को योजनाबद्ध तरीके से करें और काम पर पूरा ध्यान और समय दें ताकि अंत में भागदौड़ न करनी पड़े।
-भोजन धीरे-धीरे चबा कर करना चाहिए और पेट को स्वाद के चक्कर में ठूंसना नहीं चाहिए। अधिक भोजन सेवन करने से और जल्दी भोजन करने से भी हृदय पर जोर पड़ता है।
-हृदय के लिए सिगरेट, बीड़ी व शराब पीना सब हानिकारक हैं, इसलिए इन चीजों से परहेज ही करें।
-उच्च रक्तचाप और मधुमेह हृदय रोग को बढ़ावा देते हैं। ऐसी शिकायत होने पर शीघ्र ही उचित इलाज करवायें।
-रात्रि के खाने के बाद तुरंत टहलना नहीं चाहिए। इससे दिल पर जोर पड़ता है। कोई भी व्यायाम या सैर खाना खाने से पहले ही करें। खाना खाने के बाद कदापि न करें। खाने के बाद कुछ देर विश्राम अवश्य करें।
-चालीस वर्ष से ऊपर होने पर हर छ: माह पश्चात रक्तचाप, रक्त की जांच और रक्त में चर्बी की जांच अवश्य करवायें। जरूरत पड़ने पर टीएमटी और ईको भी करवाएं।
-पैंतीस वर्ष की उम्र के पश्चात अपने खान-पान और रहन सहन पर विशेष ध्यान दें ताकि स्वयं को रोगों से दूर रख सकें।


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