- एमडीए बोर्ड की बैठक में नियमों के विरुद्ध प्लांट के मानचित्र स्वीकृति कराने का रखा गया प्रस्ताव
रामबोल तोमर |
मेरठ: मीट प्लांट को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद सख्त हैं। यही वजह है कि जब से योगी आदित्यनाथ ने सीएम की कमान संभाली हैं, तभी से शहर के कई मीट प्लांट बंद पड़े हैं। इनमें पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी भी शामिल हैं। इनका बड़ा रसूख है, लेकिन नियमो के विपरीत इनका मीट प्लांट भी नहीं चल पाया, मगर इसके बावजूद एमडीए बोर्ड की बैठक में तान्या मीट प्लांट के मानचित्र स्वीकृति कराने का प्रस्ताव रख दिया गया, जो फिर से सुर्खियों में आ गया हैं।
प्राधिकरण वीसी मृदुल चौधरी अभी नये आये है, उनको तान्या को लेकर जो पहले सुर्खियों में रहा, वह जानकारी नहीं है। लगता है उन्हें भी एमडीए इंजीनियरों ने तान्या मीट प्लांट के मामले में गुमराह कर दिया। एमडीए के कौन अधिकारी है, जो मीट प्लांट को लेकर खास मेहरबान है।
बोर्ड बैठक में देखा जाए तो सबसे चर्चित मामला अलीपुर जिजमाना में तान्या मीट प्लांट का ही रहा। कुल क्षेत्रफल 60208.83वर्ग मीटर में मौजूद मीट प्लांट की बिल्डिंग के मानचित्र स्वीकृति के लिए प्रस्ताव रखा गया। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि तान्या मीट प्लांट की बिल्डिंग पर दो दफा एमडीए इंजीनियर सील लगा चुके हैं, जो वर्तमान में भी लगी हुई है।
आॅन रिकॉर्ड, मगर कार्रवाई करने की बजाय एमडीए के अधिकारियों ने नियम विरुद्ध होने के बावजूद मीट प्लांट का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रख दिया, जबकि बोर्ड में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, उसमें इंजीनियरों ने निचले स्तर पर यह रिपोर्ट लगाई कि सड़क की चौड़ाई कम हैं।
इसलिए मानचित्र नियमनुसार स्वीकृत नहीं किया जा सकता। फिर भी यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में कैसे रख दिया? यह बड़ा सवाल है। जब एमडीए के इंजीनियर ही इसे गलत मान रहे है, तो फिर प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में क्यों रखा जा रहा हैं? इसको कई बार सील किया जा चुका। फिर भी मीट प्लांट का मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए एक लॉबी इसमें लगी। अलीपुर जिजमाना में कई मीट प्लांट तब से बंद है, जब से यूपी में मुख्यमंत्री की बागडौर योगी आदित्यनाथ ने संभाली हैं।
इसके बाद से ही प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं बसपा नेता याकूब कुरैशी हो या फिर अन्य, सभी के मीट प्लांट बंद पड़े हैं। वो मीट प्लांट चल रहे हैं, जो नियमों को पूरा करते हैं। मीट प्लांट को लेकर मुख्यमंत्री की कड़ा रुख हैं, उसके बावजूद तान्य मीट प्लांट पर आखिर एमडीए के अधिकारी इतने क्यों मेहरबान हैं? यह बड़ा सवाल है।
तान्या मीट प्लांट का कोई नया मामला नहीं हैं, बल्कि कोई भी अधिकारी इस हाइटेंशन लाइन को छूना भी नहीं चाहता था, लेकिन यह मीट प्लांट के मानचित्र को स्वीकृति देने का मामला बोर्ड बैठक तक पहुंच गया। इसके पीछे कौन हैं? आखिर मीट प्लांट को लेकर एमडीए के अधिकारियों पर कौन भाजपा नेता दबाव बना रहा है?
इसकी भी चर्चा अब आम हो गई है। एक तरफ तो अवैध रूप से चल रहे मीट प्लांट को लेकर मुख्यमंत्री सख्त है। वहीं, सीएम के आदेश पर अवैध मीट प्लांट पर कार्रवाई भी हो रही है, फिर कौन हैं, जो मीट प्लांट को चलवाना चाहता है? दरअसल, तान्या मीट प्लांट आॅनर शादाब कुरैशी की तरफ से एमडीए में मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया था।
मानचित्र अनुभाग में मीट प्लांट का यह मानचित्र पहुंचा, जिसमें इंजीनियरों ने देखा कि तान्या के नाम से फिर मानचित्र आया है। यह भी आपको बता दे, इससे पहले भी मानचित्र स्वीकृति के प्रयास किये जा चुके हैं। इंजीनियरों की टीम फिर से अलीपुर जिजमाना में पहुंची तथा धरातल स्तर पर पहुंचकर छानबीन की, जिसके बाद ही इंजीनियरों की टीम ने फाइल पर आपत्ति लगा दी।
फाइल पर इंजीनियरों की टीम ने स्पष्ट लिखा है कि तान्या मीट प्लांट पर जाने वाली रोड की चौड़ाई एमडीए लॉ के अनुसार नहीं है। उसकी चौड़ाई कम है, क्योंकि मीट प्लांट में वाहनों का आवागमन ज्यादा रहेगा, इसलिए इसको नियमानुसार अनुमति नहीं दी जा सकती। इंजीनियरों के यह लिखने के बाद भी एमडीए बोर्ड की बैठक तक तान्या मीट प्लांट का जींद कैसे पहुंच गया?
पीएनबी ने राज स्नेह की सपत्ति की दीवार गिरवाई
बैंकों के करोड़ों रुपये का कर्ज न चुका पाने के कारण राज स्नेह आॅटो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अशोक जैन ने पंजाब नेशनल बैंक को अंधकार में रखने के लिये उन प्लॉटों को अपनी कोेठी में शामिल दिखाने के लिये बाउंड्री करवा दी जो प्लॉट बैंक में बंधक बनाकर रखे गए थे। बैंक ने मंगलवार को जेसीबी मशीन लगाकर 13 प्लॉटों को घेरने के लिये बनाई गई बाउंड्री को गिरवा दिया। 11 फरवरी को इन प्लॉटों की नीलामी होनी है।
ध्यानचंद नगर निवासी अशोक जैन ने राज स्नेह आॅटो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और राज स्नेह आॅटो व्हीलर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक से 31 अगस्त 2017 को 43 करोड़ 86 लाख रुपये का लोन लिया था। बार-बार नोटिस देने के बाद अशोक जैन लोन नहीं चुका रहे थे। बैंक ने बार-बार नोटिस दिया, लेकिन अशोक जैन ने इसे दरकिनार कर दिया था।
बैंक ने इसके लिये डीएम आॅफिस में प्रत्यावेदन किया था। डीएम से अनुमति मिलने के बाद बैंक ने राज स्नेह पर सील लगा दी थी। राज स्नेह पर पीएबी के अलावा सिंडीकेट बैंक समेत कई बैंकों के लोन भी चल रहे हैं। इस बीच बैंक ने 43 करोड़ 86 लाख रुपये लोन लेने के लिये 13 प्लॉटों को बैंक में बंधक बनवाया था। बैंक अपना पैसा वसूलने के लिये 11 फरवरी को इन प्लॉटों की नीलामी करवाने जा रहा है। इसके लिये काफी संख्या में लोगों ने बिड डाल रखी है।
बिड डालने वालों ने बैंक में आपत्ति दर्ज कराई कि अशोक जैन के प्लॉट स्वतंत्र रूप से नहीं दिख रहे हैं। जब बैंक अधिकारियों ने मौका मुआयना किया तो मौके पर प्लाटों के चारों तरफ बाउंड्री मिली। इस पर बैंक अधिकारियों ने जेसीबी मशीन लेकर बाउंड्री गिरवा दी। बैंक अधिकारियों ने बताया कि अशोक जैन को ओटीएस का मौका भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने पैसा जमा नहीं कराया था इस कारण प्लॉटों की नीलामी कराई जा रही है।

