जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: टेलीग्राम की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि NEET जैसी बड़ी और संवेदनशील परीक्षा की सुरक्षा के लिए सरकार को आपातकालीन कदम उठाने और सीमित अवधि के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगाने का पूरा कानूनी अधिकार है। इसी के साथ 22 जून तक टेलीग्राम पर लागू पाबंदियां जारी रहेंगी।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि मामले की परिस्थितियां आपातकालीन प्रकृति की थीं, इसलिए संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप है। कोर्ट ने यह भी माना कि सरकार का कदम “प्रोपोर्शनैलिटी” यानी जरूरत और संतुलन की कसौटी पर खरा उतरता है।
अदालत के अनुसार, यह प्रतिबंध एक सीमित समय के लिए और एक विशेष परीक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे असंगत या अत्यधिक नहीं माना जा सकता।
टेलीग्राम के फीचर्स पर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार टेलीग्राम के कुछ फीचर्स जांच और निगरानी में बाधा डाल रहे थे।
इनमें शामिल प्रमुख समस्याएं थीं:
- यूजर्स की पहचान छिपाने वाली गुमनामी और क्लाउड-आधारित सिस्टम
- बड़े चैनल, फॉरवर्डिंग सिस्टम और ऑटोमेटेड बॉट्स का दुरुपयोग
- अवैध कंटेंट हटाने के बाद मिनटों में नए ग्रुप और चैनल बन जाना
1.46 लाख अकाउंट्स तक नेटवर्क की पहुंच
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने बताया कि NEET से जुड़े फर्जी प्रश्न पत्र और पेपर लीक मामलों में शामिल नेटवर्क की पहुंच लगभग 1.46 लाख अकाउंट्स तक थी।
सरकार का कहना था कि बार-बार कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क तेजी से दोबारा सक्रिय हो जाता था, जिससे इसे पूरी तरह रोकना मुश्किल हो गया था।
22 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला
NEET UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद लगभग 22 लाख उम्मीदवारों के लिए 21 जून को री-एग्जाम आयोजित किया जा रहा है। सरकार ने तर्क दिया कि परीक्षा की निष्पक्षता और शुचिता बनाए रखने के लिए कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर रोक जरूरी थी।
टेलीग्राम की दलील क्यों खारिज हुई?
टेलीग्राम ने अदालत में कहा था कि पूरे देश में सेवा बंद करना और फीचर्स सीमित करना बहुत सख्त कदम है, जिससे लाखों सामान्य यूजर्स प्रभावित होंगे।
लेकिन अदालत ने कहा कि प्रतिबंध सीमित अवधि के लिए है। यह केवल एक विशेष परीक्षा से जुड़ा है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक हित और परीक्षा की शुचिता बनाए रखना है। इसलिए इसे गैर-कानूनी या असंतुलित नहीं माना जा सकता।
सरकार का कानूनी आधार
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की स्थिति में आपातकालीन ब्लॉकिंग आदेश जारी करना कानूनी रूप से उचित है।
सरकार ने यह भी बताया कि टेलीग्राम से कई बार अवैध और आपत्तिजनक सामग्री हटाने का अनुरोध किया गया, लेकिन पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
फिलहाल क्या स्थिति रहेगी?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद टेलीग्राम को तत्काल राहत नहीं मिली है। 21 जून को होने वाली NEET री-एग्जाम तक पूरे देश में प्रतिबंध लागू रहेंगे, ताकि परीक्षा प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।

