- खोदाई में उत्तरकालीन चमकीली मृदभांड की मिली डिलक्स वैरायटी
- मौर्यकालीन सिक्के समेत अन्य अवशेष भी मिले
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: धर्मराज युधिष्ठिर की जन्म भूूमि और भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि में पुरातत्व विभाग की ओर से ऐतिहासिक साक्ष्यों की खोज के लिए महाभारतकालीन तीर्थ नगरी स्थित उल्टाखेड़ा टीले पर उत्खनन किया जा रहा है। अभी तक मिले अवशेषों के आधार पर खंडित मूर्ति लंबी दीवार मिली हैं।
जो सुर्खी और चूने से बना है। खंडहर की जर्जर दीवार, बुलंद इमारत की दास्तां बयां करती है। ठीक इसी तर्ज पर पुरातत्वविद टीले से प्राप्त लौह अयस्क किल, हसिया, ताम्र सलाका, टेराकोटा की मूर्तियां, शतरंज की मोहरें, मंकी, चूड़िया, लैम्पी, कौड़ी, बर्तनों में इंकपाट, कटोरा, थाली, गिलास, कटोरी, घड़ा, खाना बनाने का बर्तन उत्तर कालीन चमकीली मृदभांड की डिलक्स वैरायटी, मौर्य कालीन सिक्का समेत अन्य अवशेष मिले को देखकर यहां के प्राचीन इतिहास का अनुमान लगा रहे हैं।

प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के आर्थिक सहयोग से उल्टाखेड़ा टीले का उत्खनन एवं शोध कार्य चल रहा है। उत्खनन विभाग के अधिकारियों की माने तो अब तक पाच खातों का उत्खनन एवं टीले को सेक्शन डीपींग की गई। इनमें से तीन खातों में प्राकृतिक मिट्टी का जमाव तक उत्खनन हुआ। सेक्शन डीपिंग के दौरान टीले के पश्चिमी तथा दक्षिणी हिस्से में शुंग, कुषान कालीन पक्की र्इंटों के आठ तह के संरचनात्मक अवशेष पाए गए हैं।
पिछले कई सप्ताहों से चल रहे उत्खनन में पुरातत्व की टीम अभी तक राजपूताना काल के अवशेषों को निकाल कर साफ करने में जुटी है। उत्खनन अधिकारी ने बताया की उत्खनन के दौरान मिले साक्ष्यों को एकजुट किया जा रहा है। जिसके बाद तमाम साक्ष्यों की जांच कर हस्तिनापुर के राज खोले जायेगे।
हथियार के साथ-साथ मिल रहे मिट्टी के अवशेष
जिस हस्तिनापुर को बाढ़ ने अपनी चपेट में बरसों तक रखा। आज उसी हस्तिनापुर की मिट्टी में उत्खनन के समय जो अवशेष मिल रहे हैं। वह अपने आपमें ऐतिहासिक उल्लेख हैं। विभाग द्वारा की जा रही खोदाई में जहां लोहे के हथियार मिल रहे हैं। वहीं, सिलबट्टा, प्राचीन मृदभांड, टेराकोटा के खिलौने, गाड़ी का एक पहिया, टेराकोटा का प्राचीन झावा, हड्डियों के अवशेष देखने को मिल रहे हैं। विभाग द्वारा उन सभी अफसरों को एक जगह एकत्रित कर जांच की जा रही है।
मिट्टी की जांच के लिए भी आएगी विशेष टीम
उत्खनन के बीच जो भी अवशेष मिल रहे हैं। उस स्थान की मिट्टी की जांच के लिए भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की एक टीम जल्द आएगी। बताते चले कि लंबे समय से यह मांग उठती आ रही है कि हस्तिनापुर की उस ऐतिहासिक धरोहर संस्कृति को एक बार फिर से उजागर किया जाए।
तीन दिन प्रभावित रहेगा उत्खनन का कार्य
टीम के सदस्यों की मानने तो अगल तीन दिन महाभारतकालीन तीर्थ नगरी में चल रहा उत्खनन का कार्य प्रभावित रहेगा। टीम के मुख्य सदस्यों के उपस्थित न होने के कारण अभी तक उत्खनन में मिले अवशेषों की साफ-सफाई का कार्य किया जायेगा।

