Thursday, April 25, 2024
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चर्चित मामलों की फाइल कमिश्नर ने की निरस्त

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  • अब हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे अवैध निर्माणकर्ता

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर के अवैध निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. और डीएम दीपक मीणा की अदालत में विचाराधीन थे। इन सभी को कमिश्नर और डीएम ने फिलहाल निरस्त कर दिया है। इन मामलों में कमिश्नर और डीएम के यहां से कोई राहत नहीं मिली। इसी वजह से अब अवैध निर्माणकर्ता हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं। हाल ही में बड़ा मामला सुर्खियों में रहा भाजपा नेता विक्रांत चौधरी का।

पल्हैड़ा चौराहे पर उनका अवैध कॉम्प्लेक्स बना हुआ है। इस भू-उपयोग आवासीय है और निर्माण व्यवसायिक कर दिया गया है। इस मामले की सुनवाई डीएम के यहां चल रही थी। डीएम ने सुनवाई निरस्त कर दी है। उन्होंने अवैध निर्माण को गलत मानते हुए फाइल को ही रिजेक्ट कर दिया है, जिसके बाद अवैध निर्माणकर्ता भाजपा नेता विक्रांत चौधरी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। दूसरा मामला है दो आब होटल का।

इनकी जांच पुन: शासन से चालू हुई थी, जिसमें अवैध निर्माण समेत कई बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। इसकी जांच रिपोर्ट को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण में हड़कंप की स्थिति बनी रही। दिवाली से पहले ही इसकी जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से भेज दी गई है। जांच गोपनीय रखी गई हैं। कमिश्नर स्तर पर इसकी भी सुनवाई चल रही थी, जिसे कमिश्नर ने रिजेक्ट कर दिया।

इसके बाद ही मामला शासन में पहुंच गया है। ठीक इसी तरह का मामला पाकी इंटरप्राइजेज का है, जो शताब्दीनगर स्थित डिवाइडर रोड पर फैक्ट्री निर्माणाधीन है। इस फैक्ट्री का निर्माण भी मानचित्र के विपरीत बना दिया गया है। पूरी बिल्डिंग पिलर पर खड़ी होनी चाहिए थी, लेकिन छज्जे पर दीवार लगा कर दो मंजिल लगा दी गई है। दमकल की गाड़ी भी इसमें नहीं घूम सकती। इसकी एनओसी दमकल विभाग ने कैसे दे दी, यह भी बड़ा सवाल है।

इसकी भी सुनवाई चल रही थी। कंपाउंडिंग के नाम पर पूरी फाइल को ही अवर अभियंता संजीव तिवारी दबाकर बैठे है। एक वर्ष में भी कपाउंडिंग होगी या फिर नहीं, यह एमडीए तय नहीं कर पा रहा हैं। इसमें मानचित्र गलत है, फिर भी ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया जा रहा हैं? अवर अभियंता के स्तर से बड़ा खेल किया जा रहा हैं।

अधिकारियों को भी गुमराह कर रहे हैं। गांधी आश्रम स्थित नाले पर श्रीजी पेठा की अवैध बिल्डिंग सरकारी जमीन पर बना दी गई है। इस बिल्डिंग को पूर्व में भी मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से गिरा दिया गया था, लेकिन फिर से जमीन में अवैध निर्माण कर बिल्डिंग बना दी गई है।

इसमें भी मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की है। ये तमाम चर्चित मामले हैं, जिनको लेकर एमडीए इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कई मामले शासन में पहुंच गए हैं, फिर भी एमडीए की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।

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