Wednesday, July 1, 2026
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बीएसए में चलता है निलंबन-बहाली का खेल

  • नियमों को ताक पर रखकर दिया जाता है लाभ, वसूल की जाती है रकम, सचिव बेसिक ने मांगी रिपोर्ट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेसिक शिक्षा विभाग में चलता है निलंबन-बहाली का खेल। शिक्षकों के निलंबन के बाद उन्हें मनचाही जगह स्थानांतरण देने के लिए पहले निलंबित किया जाता है, जिसके बाद दूसरी जगह सम्बद्ध करते हुए जांच का नाटक होता है फिर मनमाफिक जगह बहाली कर दी जाती है। इस मामलें को लेकर सचिव उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने पत्र भेजकर एक सप्ताह में की गई कार्रवाई की सूची मांगी है।

ऐसे होता है खेल

यदि कोई शिक्षक किसी कारणवश निलंबित होता है तो उसे वर्तमान विद्यालय से हटा दिया जाता है। इसके बाद जांच चलने तक दूसरे विद्यालय में अटैच कर दिया जाता है। जांच पूरी होने के बाद यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसका दूसरे विद्यालय में स्थानांतरण कर दिया जाता है, लेकिन बीएसए कार्यालय में निलंबन के बाद होने वाली कार्रवाई के नाम पर खेल किया जाता है।

पहले शिक्षक को निलंबित किया जाता है उसके बाद कार्रवाई के नाम पर दूसरी जगह भेजा जाता है, जो शिक्षक के मनमाफिक होती है। साथ ही यहां से कोई अनुशासनत्मक कार्रवाई नहीं होती, बल्कि उसे कार्रवाई के नाम पर लाभ पहुंचाया जाता है। मामले को लेकर एडी बेसिक राजेश श्रीवास का कहना है कि उनके पास अभी शासन से पत्र आया है, वह इसकी जांच करने के बाद ही अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।

नियमों के विपरीत होती है बहाली

  • केस-1

प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक राजकुमार को पहले 5 अक्टूबर 21 को निलंबित किया गया। जिसके बाद उन्हें जांच होने तक परिक्षितगढ़ के खरसाली विद्यालय में अटैच कर दिया गया। 4 जनवरी 22 को रिपोर्ट भेजी गई, 25 मार्च को गगोल में बहाली कर दी गई। खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट कें शिक्षक को दोषी पाया गया, लेकिन बीएसए ने इस मामले में बताया था कि शिक्षक निर्दोष है, ऐसे में शिक्षक को उसी विद्यालय में क्यों नहीं रखा गया।

बताया जा रहा है कि शिक्षक का घर शताब्दी नगर में है जहां से बहरामपुर विद्यालय लगभग 35 किमी दूर था। ऐसे में शिक्षक को लाभ देने के लिए उसके घर के पास ही गगोल में ट्रांसफर कर दिया गया। बहरामपुर में कम आवास भत्ता मिलता था। जबकि गगोल में आवास भत्ता ज्यादा है। पूर्व में इस शिक्षक के रिश्तेदारों भी आसपास ही नियुक्त है।

  • केस-2

दौराला ब्लॉक वलीदपुर में कुल 11 अध्यापक है, जिनका निरीक्षण किया। जिसमें शिक्षिका संगीता चौधरी को किसी कारणवश निलंबित किया गया। उसके बाद उसे ट्रांसफर का लाभ देने के लिए हस्तिानापुर के उस विद्यालय में भेज दिया गया। जहां उसके पति भी पहले से ही कार्य कर रहे हैं। इसी विद्यालय में जितेन्द्र व पूनम नाम के दंपति भी कार्यरत है। नियमों के अनुसार दंपति एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में हो तो उसकी दूरी छह किमी से अधिक होनी चाहिए।

  • केस-3

2018 से पहले शिक्षक चंचल वर्मा लगातार अनुपस्थित रहने पर नंगला कबूलपुर खरखौदा से निलंबित हुई थी। जिसके बाद शिक्षिका ने किसी तरह स्थानांतरण वापस खरखौदा में हो गया। इसके बाद इस शिक्षक को गगोल-दो विद्यालय में बहाल किया गया, यह शिक्षक इंद्रा नगर शहर की रहने वाली है।

इस शिक्षिका को स्थानांतरण का लाभ देते हुए गगोल में लाया गया। यहां पर एक साल रहने के बाद सौलाना चली गई, यहां पर आठ दिन अनुपस्थित रहने के बाद इसे फिर निलंबित किया गया। इसके बाद यह शिक्षक कोर्ट चली गई, पारिस्पारिक ट्रांसफर को गलत बताते हुए वापस गगोल आ गई। यहां पर वरिष्ठता के आधार पर विद्यालय की इंचार्ज बनी। इसके बाद यहां पर शिक्षका खाद्यान्न में लापरवाही बरतने पर फिर सस्पेंड हुई।

कार्यालय के एक वरिष्ठ लीपिक द्वारा इस शिक्षक को लाभ दिया जाता है। जनवरी 21 में भी यह शिक्षक विद्यालय में हरे पेड़ कटने पर जांच के दायरे में आई थी। इसके बाद 2022 में शिक्षक किताबों के वितरण में लापरवाही बरतने पर सस्पेंड हुई, इसी दौरान एक शिक्षिका के साथ हाथापाई करने के मामले में यह शिक्षक फिर सस्पेंड हुई। यह शिक्षिका 925 मेडिकल अवकाश लेने पर भी जांच के दायरे में आ चुकी है।

वहीं पूरी सेवा में हाफ-पे अवकाश महज 10 मिलते हैं। जो इस शिक्षिका 648 ले रखे हैं। विभाग में इसकी शिकायत होने के बाद भी शिक्षिका को पूरा वेतन दिया गया। इस समय यह शिक्षक परिक्षितगढ़ में तैनात है। जहां पर यह लगातार अनुपस्थित रहने की बात सामने आ रही है।

विद्यालय परिवर्तन में डीएम का अनुमोदन आवश्यक

बेसिक शिक्षा को लेकर 2017 में सरकार ने नियम बनाया था। जिसमें किसी भी शिक्षक का विद्यालय परिवर्तन करने पर जिलाधिकारी का अनुमोदन लिया जाना जरूरी है, लेकिन मेरठ में यह नहीं होता है। साथ ही निलंबन की प्रक्रिया को एक माह में निस्तारित करने का प्रावधान है, लेकिन जिला बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसे कई मामलों में शिक्षको को लाभ पहुंचाने के लिए एक से अधिक महीनों का समय लिया गया है। इसी प्रकरण को लेकर सचिव उप्र बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने बीएसए कार्यालय की रिपोर्ट मांगी है।

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