जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने कहा है कि बड़ी विचित्र बात है कि जिन बोगस व शेल कम्पनियों का जिक्र लगभग सभी बड़ी ईडी, आई टी व मनी लांड्रिगं के मामलों में बड़े जोर शोर से होता है, उनकी कोई अधिकृत परिभाषा आज तक कम्पनी एक्ट में नहीं है और ना ही आगे सरकार की इसे परिभाषित करने की कोई योजना है।उनके प्रतिनिधि विपिन जैन ने बताया कि सांसद इमरान मसूद द्वारा पूछे गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में कॉरपोरेट मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने जानकारी साझा की है कि वर्ष 2023 से 16 जुलाई 2025 तक कुल 40,949 कंपनियों को गैर-कार्यशील मानते हुए कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा बंद किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश से कुल 2,838 कंपनियां हटाई गई हैं, जबकि अकेले सहारनपुर जिले से यह संख्या 23 है।
सांसद इमरान मसूद के संसदीय कार्य प्रभारी विपिन जैन ने बताया कि सांसद मसूद ने सरकार से पूछा था कि शेल कम्पनी की परिभाषा क्या है? क्या सरकार देशभर में बड़ी संख्या में शेल कंपनियों को बंद कर रही है और इसका क्या आधार है। तथा और इस संबंध में सरकार की नीति क्या है। देश, प्रदेश व सहारनपुर में चिन्हित शेल कम्पनियों की संख्या क्या है?मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने जवाब में बताया कि शेल कंपनी की कोई कानूनी परिभाषा कंपनी अधिनियम, 2013 में नहीं है। फिलहाल शेल कंपनियों की स्पष्ट परिभाषा लाने की कोई योजना नहीं है लेकिन वे कंपनियाँ जो पिछले दो वित्तीय वर्षों से कोई व्यवसाय नहीं कर रहीं उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया जाता है।
इसके अलावा, कुछ कंपनियाँ स्वयं अपने नाम हटवाने के लिए आवेदन करती हैं।सरकार द्वारा जवाब में यह भी बताया गया कि कंपनियों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘सी-पेस’ की स्थापना की गई है, जिससे कंपनी बंद करने की प्रक्रिया तेज और केंद्रीकृत हो गई है। सरकार अब तकनीकी टूल्स की मदद से कंपनियों के संचालन में पारदर्शिता लाने के प्रयास कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कंपनी बंद करने की प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरती जाती है और अगर किसी को लगता है कि उसकी कंपनी गलती से हटाई गई है, तो वह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है।

