Sunday, February 25, 2024
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कई दशक से खाली नहीं हो पा रही कैलाश प्रकाश स्टेडियम की जमीन

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  • मवाना बस स्टैंड, कई दर्जन दुकानें और पेट्रोल पंप न हट पाने के कारण रुका हुआ है खेलों का विकास

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम की करीब छह एकड़ भूमि पर कई दशक से चल रहे पेट्रोल पंप कई दर्जन दुकानें और मवाना बस स्टैंड के कारण खेलों का विकास रुका हुआ है। विभाग इस भूमि को खाली कराकर कई हॉल्स बनाने के लिए प्रयासरत है। लेकिन इस सरकारी भूमि से अभी तक अदालत की प्रक्रिया के चलते कब्जे खाली नहीं कराए जा सके हैं। प्रभारी आरएसओ ने इस बाबत डीएम को पत्र लिखकर अवैध कब्जे खाली करने की गुहार लगाई है। जिस जगह कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम संचालित है, उसके ठीक बगल में मवाना बस स्टैंड, कई दर्जन दुकानें और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का एक पंप कई दशक से चले आ रहे हैं।

स्टेडियम के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह भूमि कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम खेल विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के स्वामित्व की है। अलग-अलग वर्षों में यह आदेश भी शासन स्तर से जारी हो चुके हैं कि खेल के स्टेडियम की भूमि को किसी अन्य कार्य के लिए प्रयोग में नहीं लाया जाए। इस मामले को लेकर स्टेडियम की ओर से वर्ष 2004 में हाई कोर्ट की शरण ली गई। जहां से स्टेडियम के हक में फैसला जारी करते हुए दुकानों, पेट्रोल पंप और मवाना बस स्टैंड को खाली करने के आदेश जारी किए गए। बताया गया है कि इस आदेश के विरुद्ध प्रतिपक्ष के लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जहां से वर्ष 2007 में एक आदेश जारी किया गया।

जिसमें कहा गया कि वे लोग सक्षम प्राधिकारी के पास अपना प्रकरण लेकर जाएं। इस मामले के सक्षम प्राधिकारी जिलाधिकारी होते हैं, जहां से यह मामला एसीएम-2 के यहां चला गया। 2015 में एससीएम-2 के यहां से भी स्टेडियम के पक्ष में फैसला आया, लेकिन इसके विरुद्ध अपील करते हुए प्रतिपक्ष के लोगों ने जनपद न्यायालय में शरण ली हुई है। तब से अब तक यह मामला लंबित चल आ रहा है। बताया गया है कि वर्तमान में 105 कैसे न्यायालय में चल रहे हैं जिसमें 74 एसीएम-2 और 31 जनपद न्यायालय में विचाराधीन है। विभाग इस भूमि पर कई हाल और आवासीय सुविधा देने का प्रयास कर रहा है। लेकिन कब्जे खाली न होने के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

10 साल के अनुबंध से हुई थी शुरुआत

कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम की ओर से जो दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए जा रहे हैं उसके अनुसार वर्ष 1961 में कमिश्नर के भारत काउंसलिंग में 10 साल के लिए दुकानों और पेट्रोल पंप को किराए पर दिया गया था। इस एग्रीमेंट में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि स्टेडियम जब चाहे अपनी भूमि खाली कर सकता है। इसके बाद से यह मामला विवादों में घिरा रहा है। दुकानों के किरायेदार और पेट्रोल पंप के संचालकों के अनुसार एग्रीमेंट का नवीनीकरण कराकर बराबर निर्धारित किराया दिया जाता रहा है।

हालांकि स्पोर्ट्स स्टेडियम के मुताबिक उनके पास किराये के संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इस सिलसिले में प्रभारी आरएसओ योगेंद्र पाल सिंह का कहना है कि स्टेडियम की ओर से छह एकड़ भूमि को खाली करने के संबंध में सक्षम अधिकारी डीएम मेरठ को पत्र लिखा जा चुका है। इस संबंध में रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जगाई जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद भूमि से अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो सकेगी।

पांच साल पहले जारी हुए थे पेट्रोल पंप हटाने के आदेश

स्पोर्ट्स स्टेडियम की जमीन से पेट्रोल पंप की बेदखली के आदेश पांच वर्ष पूर्व 2019 में जारी किए गए थे। जिसमें पंप मालिक से क्षतिपूर्ति धनराशि 18.80 लाख रुपये वसूले जाने के भी आदेश भी हुए थे। पेट्रोल पंप को करीब 700 गज जमीन साल 1961 में 10 साल के लिए लीज पर दी गई थी। जिसे 10 साल के लिए फिर से बढ़ा दिया गया। जब वर्ष 1988 में लीज समाप्त हुई तो पेट्रोल पंप को जमीन से बेदखल करने का आदेश जारी कर दिया गया। तब से यह मामला अदालत में विचाराधीन चला आ रहा है।

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