- सभी की निगाहें एग्जिट पोल पर लगी, जनता टीवी से चिपकी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जैसे ही लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान शाम 6 बजे समाप्त हुआ, उसके ठीक आधा घंटे बाद टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल चालू हो गए। सभी की निगाहें एग्जिट पोल पर लगी हुई है। जनता टीवी से चिपक गई हैं। क्योंकि मेरठ में दूसरे चरण में मतदान हुआ था। इसको लंबा समय बीत गया हैं, जिसके बाद उत्सुकता भी बढ़ी हैं। ऐसे में मेरठ लोकसभा सीट से कौन प्रत्याशी जीतेगा? इसको लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। हर किसी की निगाहें एग्जिट पोल पर लगी हुई हैं।
मेरठ लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के अरुण गोविल और सपा की सुनीता वर्मा के बीच ही चुनाव हुआ। बसपा मुकाबले में आ ही नहीं पाई। भाजपा ने बड़ा नाम अरुण गोविल को चुनाव मैदान में उतारा था, जिसके बाद विपक्षी दलों में खलबली मच गई थी। सपा ने पहले भानू प्रताप सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था। फिर उनको भी बदल कर सपा के सरधना विधायक अतुल प्रधान को प्रत्याशी घोषित कर दिया था। अतुल प्रधान ने नामांकन भी दाखिल कर दिया था। मतदान के एक दिन बचा था, उसी दिन फिर से सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अतुल प्रधान का टिकट काटकर पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी एवं पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया था।
इसके बाद भाजपा और सपा के बीच चुनाव आमने-सामने का हो गया था। अरुण गोविल की पहले एक तरफा जीत मानी जा रही थी, लेकिन सुनीता वर्मा के आने के बाद चुनावी समीकरण बदल गए। अब चुनाव दोनों के बीच कांटे का हुआ। राजनीति के जानकार बता रहे हैं कि दोनों के बीच कुछ ही हजार की हारजीत होगी। यहां मुकाबला कड़ा है, इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। एक तो कम वोट प्रतिशत ने भी प्रत्याशियों की नींद हराम कर रखी हैं, वहीं बसपा ने त्यागी समाज में भी कुछ वोट में सेंध लगाई हैं, जिससे भाजपा को नुकसान हुआ हैं। दलितों और मुस्लिमों की एकजुट वोटिंग सपा में पक्ष में हुई, जो तमाम समीकरणों को बिगाड़ रहा हैं।
इस बात को भाजपा के नेता भी मान रहे हैं, फिर कैंट विधानसभा क्षेत्र में कम वोट प्रतिशत ने भी भाजपा की पेशानी पर बल ला रखे हैं। हालांकि सट्टा बाजार अरुण गोविल को जिता रहा है और सुनीता वर्मा को द्वितीय पायदान पर रख रहा है। कैंट विधानसभा ही भाजपा को संजीवनी देने वाली सीट मानी जाती है। इस बार यहां भी कम मतदान हुआ है। ऐसे में भाजपा यहां से कितनी लीड लेगी, सपा यहां से कितने वोट पा रही है, इस पर भी हारजीत का अंतर तय होगा। चार जून को सब कुछ साफ हो जाएगा।

