Thursday, April 2, 2026
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चार रेडियो स्टेशनों की तरंगों से झंकृत हो उठता है मन

  • शहर में आकाशवाणी समेत चार एफएम स्टेशनों के चाहने वालों की कोई कमी नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मन का रेडियो बजने दे जरा, गम को भूलकर जी ले तू जरा, स्टेशन कोई नया टयून कर ले जरा, फुल टू एटीटयूड दे दे तू जरा…। फिल्म रेडियो में हिमेश रेशमिया का यह गाना अक्सर लोगों की जुबां पर रहता है। आज विश्व रेडियो दिवस है। मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में आज भी रेडियो की दीवानगी लोगों पर देखने को मिलती है।

समय के साथ रेडियो के स्वरूप में भी बदलाव हुआ है। बावजूद इसके रेडियो की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी मन की बात के लिए रेडियो को माध्यम चुना और लोगों की दीवानगी को और बढ़ा दिया। वहीं, रेडियो पर जैसे ही अमीन सयानी की आवाज रेडियो सेट पर सुनाई देती थी, लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। विविध भारती पर हवामहल की नाटिकाएं और जयमाला में सैनिकों की पसंद के फिल्मी गीतों की यादें आज भी लोगों के जहन में ताजा होंगी।

इंटरनेट मीडिया के इस दौर में भी रेडियो अपनी पहुंच और लोकप्रियता के कारण बुलंद आवाज के साथ पूरी शान से लोगों के दिलों पर आज भी राज कर रहा है। वहीं, शहर में आकाशवाणी समेत चार एफएम स्टेशन के चाहने वालों की बढ़ती तादाद इस माध्यम की लोकप्रियता की गवाही देती है।

गीत-संगीत से लेकर इंटरव्यू तक के दीवाने

मेरठ में आकाशवाणी केंद्र समेत चार रेडियो स्टेशन हैं। इसमें आकाशवाणी केंद्र मेरठ से स्थानीय प्रसारण नहीं है, लेकिन जल्द ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति के कार्यक्रम 101.7 पर प्रसारित होंगे। वहीं, रेडियो आइआइएमटी 90.4 व रेडियो नगीन 107.8 पर दिन रात गीत-संगीत के साथ सामाजिक, आर्थिक, खेल, व्यापार आदि विषयों पर कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।

बिनाका गीतमाला की बात ही अलग थी

फूलबाग निवासी दीवानगिरी गोस्वामी ने बताया कि बिनाका गीतमाला की बात ही निराली थी। अमीन सयानी के मनमोहक आवाज सुनने के लिए हम हमेशा दीवाने रहे। उन्होंने बताया कि बिना कार्यक्रम को सुने बिना नींद नहीं आती थी। आज भी रेडियो पर पुराने गीत सुनने के शौकीन हैं।

सीढ़ी लगाकर सुनते थे रेडियो

सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त अशोक कुमार बताते हैं कि उनके आसपास केवल एक ही रेडियो सेट हुआ करता था। शाम के समय लोग सीढ़ी लगाकर छत पर बैठ जाते थे और रेडियो पर प्रसारित गीतों के कार्यक्रम को सुनते थे। उन्होंने बताया कि आज भी उनके पास तीन अलग-अलग कंपनियों के रेडियो सेट हैं। इसे वह अपनी पोती के साथ बैठकर सुनते हैं। बिनाका गीतमाला और विविध भारती उनके पसंदीदा कार्यक्रम रहे।

निखिल शर्मा का कहना है कि रेडियो एक ऐसा मनोरंजन का साधन है जिसके लिए अलग से वक्त निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। रेडियो दुनिया का सबसे सस्ता व सुगम माध्यम है। पढ़ने लिखने में असमर्थ लोगों को रेडियो से जानकारी मिलती है। आरजे आयूषी शर्मा का कहना है कि रेडियो से लोगों को जोड़ने का मौका मिलता है। जब किसी श्रोता के गाने की रिक्वेस्ट उसके मान से पूरी होती है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता।

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