Friday, December 9, 2022
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तब नैना साहनी अब श्रद्धा वाकर

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दिल्ली में श्रद्धा वाकर मर्डर केस ने हर किसी को हिला कर रख दिया। श्रद्धा के लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला पर ही आरोप है कि उसने जघन्य तरीके से हत्या को अंजाम दिया। फिर शव के टुकड़े टुकड़े कर फ्रिज में रखे और फिर कई दिन तक आधी रात को उन्हें जंगल में फेंका गया। इस हत्याकांड ने दिल्ली में ही 27 साल पहले हुए तंदूर मर्डर केस की याद दिला दी। तब सुशील शर्मा ने 29 साल की नैना साहनी की हत्या करने के बाद उसके शव के टुकड़े कर तंदूर के हवाले कर दिए थे। जहां तक श्रद्धा वाकर की हत्या का सवाल है तो बहस आरोपित शख़्स के धर्म को लेकर ज्यादा अटकी है। मेरी नजर में बहस अन्य पहलुओं पर किए जाना ज्यादा जरूरी है।

1995 में नैना साहनी हो या अब 2022 में श्रद्धा वॉकर, दोनों की जान पुरुष मित्रों पर जरूरत से भरोसा करने की वजह से गई। इतना भरोसा कि जिन्होंने जन्म दिया उन तक की नहीं सुनी। ये सच है कि महानगरों में आईटी और अन्य आधुनिक सेक्टर्स में काम करने वाली युवा पीढ़ी के पास धन की कमी नहीं है। लेकिन इस आत्मनिर्भरता के साथ कई बाई-प्रोडक्ट्स भी उनके जीवन में आए हैं। हर वक्त नौकरी में परफॉर्म करने का तनाव, अन्यथा सिर पर छंटनी की तलवार, एकाकी जीवन में सही मार्गदर्शन करने वालों का अभाव, उधार (लोन) के दम पर हाई लाइफ स्टाइल, स्वच्छंता, अवसाद (डिप्रेशन) आदि।

ये सब ऐसी अंधी गली में ले जा रहा है जहां से बाहर निकलने का न कोई रास्ता सूझता है और न कोई रौशनी दिखाने वाला नजर आता है। युवा पीढ़ी जरा सोचे, आधुनिकता की दौड़ में ठहराव भी कितना जरूरी है- वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां, दम ले ले घड़ी भर, ये छइयां पाएगा कहां…

सलमा को सलाम, प्रियंका को प्रणाम

यूपी के लखनऊ की रहने वाली मिर्ज़ा सलमा बेग और बिहार के पटना में पूर्णिया से रोजगार की तलाश में आकर बसी प्रियंका गुप्ता। सलमा 28 साल की हैं तो प्रियंका 24 साल की। सलमा लखनऊ से 12 किलोमीटर बाहर मल्हौर रेलवे क्रॉसिंग पर गेट खोलने-बंद करने की जिÞम्मेदारी संभालती हैं। वहीं प्रियंका को ‘ग्रेजुएट चाय वाली’ के नाम से जाना जाता है। सलमा के पिता भी रेलवे गेट मैन थे लेकिन कानों से न सुनाई देने और अन्य बीमारियों के घेर लेने की वजह से सलमा के पिता को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनी पड़ी।

सलमा की मां को लकवा था। सलमा की एक छोटी बहन ही और थी, कोई भाई नहीं था। सलमा उस वक्त 19 साल की ही थी। घर का गुजारा कैसे चले, ऐसे में सलमा ने पिता की जगह रेलवे गेट संभालने की अर्ज़ी रेलवे में लगाई जो मंजूर हो गई। इस तरह सलमा का नाम देश की पहली रेलवे गेट वुमन के तौर पर दर्ज़ हो गया। लेकिन काम आसान नहीं था। ट्रेनों के आने-जाने पर लीवर और भारी चक्के को घुमा कर गेट मुस्तैदी से बंद करना-खोलना पड़ता है। देखने और जानने वालों ने कहा कि सलमा कुछ ही दिन में इस काम से तौबा कर लेगी।

लेकिन आज नौ साल से भी ऊपर हो गए सलमा को ये जिम्मेदारी संभालते हुए। इस बीच सलमा की शादी भी हो गई और एक बेटा भी है। घर और नौकरी दोनों जगह सलमा हंसते हंसते सभी कामों को अंजाम देती है। अब बात प्रियंका गुप्ता की। प्रियंका के पिता पूर्णिया जिÞले में किराना दुकान चलाते हैं। प्रियंका ने वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से 2019 में अर्थशास्त्र में स्नातक किया। प्रियंका को एमबीए चायवाला के युवा फाउंडर प्रफुल्ल बिलोरे का एक वीडियो देखकर प्रेरणा मिली। प्रियंका खुद अपने पैरों पर खड़ा होने के इरादे से इस साल जनवरी में पटना आ गईं।

प्रियंका ने दोस्तों से 30,000 रुपए उधार लिए। प्रियंका ने 11 अप्रैल 2022 से पटना के बेली रोड पर वीमन्स कॉलेज के बाहर ह्यग्रेजुएट चाय वालीह्ण के नाम से स्टाल लगा कर चाय बेचना शुरू किया शीघ्र ही प्रियंका को मीडिया-सोशल मीडिया के जरिए प्रसिद्धि मिल गई। लेकिन प्रियंका के उद्यमी बनने के सफर पर पटना नगर निगम की ओर से बार-बार ब्रेक लगाया जाता है। हाल में नगर निगम की ओर से प्रियंका की टी-कार्ट को सीज किया गया।

इसके बाद प्रियंका से रहा नहीं गया। प्रियंका ने सोशल मीडिया पर जज्बाती वीडियो शेयर कर बिहार सरकार और नगर निगम से सवाल किए- क्या एक लड़की को खुद कुछ बनने के सपने देखने का अधिकार नहीं है। क्या उसके लिए शादी करना और घर में किचन संभालना ही नियति है। खैर पटना नगर निगम की ओर से प्रियंका को टी-कार्ट लगाने के लिए अस्थाई तौर पर जगह मिल गई है। इस सारे घटनाक्रम से प्रियंका का कामयाब उद्यमी बनने का इरादा और मजबूत हुआ है।

स्लॉग ओवर

मैथ्स टीचर ने स्टूडेंट से 55 लिखने के लिए कहा।                                                                              स्टूडेंट : कैसे लिखूं?
टीचर : पहले 5 लिखो फिर उसके साइड में एक और 5 लिखो।
स्टूडेंट ने 5 लिखा और फिर रुककर कुछ सोचने लगा।
टीचर : किस बात का इंतजार कर रहे हो?
स्टूडेंट : सर समझ नहीं आ रहा, दूसरा 5 पहले लिखूं या बाद में।

                                                                                                                खुशदीप सहगल


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