- गैस वितरकों, राशन डीलरों के मन नहीं चढ़ी परवान
- सिक्योरिटी और गैस मूल्य की कामर्शियल दरें लागू होने के कारण उपभोक्ताओं ने नहीं दिखाई रुचि
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत छोटे परिवारों के लिए दो और पांच किलो गैस वाले मिनी सिलेंडर राशन विक्रेताओं के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने की योजना को ग्रहण लग रहा है। इसके लिए सिक्योरिटी और गैस मूल्य की कॉमर्शियल दरें लागू होने के कारण गैस वितरकों और राशन डीलरों ने वितरण में असमर्थता जताई है। वहीं इस महंगे पड़ने वाले सिलेंडर को खरीदने में छोटे उपभोक्ता भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
एक माह पूर्व सात फरवरी को विकास भवन में जिले भर के गैस वितरकों की बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने प्रदेश मुख्यालय से जारी किए गए निर्देश से अवगत कराया था। बैठक में जारी दिशा-निर्देश के अनुपालन में जनपद में मौजूद 81 गैस एजेंसियों के माध्यम से हर राशन विक्रेता के यहां पांच-पांच मिनी गैस सिलेंडर फरवरी के मध्य तक उपलब्ध कराने को कहा गया था।
उस समय कहा गया था कि गैस कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले दो किलो और पांच किलो के इन मिनी सिलेंडर की जमानत राशि 500 रुपये और गैस की कीमत अलग रहेगी। इन सिलेंडरों को राशन विक्रेता के यहां बेचने और रिफलिंग कराने की व्यवस्था के बारे में योजना बनाई गई, लेकिन एक माह की अवधि बीत जाने के बावजूद किसी भी राशन विक्रेता के माध्यम से मिनी सिलेंडर उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का कोई उपक्रम नहीं किया जा सका।
जनवाणी संवाददाता ने गैस वितरकों से लेकर अधिकारियों तक से बात करके इस योजना की जमीनी हकीकत जानने का प्रयास किया। दो अलग-अलग गैस वितरण कंपनियों के वितरकों ने नाम गुप्त रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि चाहे कितना भी महंगा हुआ हो, लेकिन आम घरेलू उपभोक्ताओं के बीच मौजूदा 14.2 किग्रा गैस वाला सिलेंडर ही लोकप्रिय रहा है। इससे पहले भी कंपनियों ने करीब डेढ़ दशक पहले पांच किग्रा का मिनी सिलेंडर निकाला था।
जो आज तक गैस एजेंसियों पर भेजे जा रहे हैं। जबकि इनकी जमानत राशि और गैस मूल्य व्यवसायिक रखे गए हैं। इसी प्रकार 19 किग्रा के व्यवसायिक सिलेंडर भी ऐजेंसियों पर भेजे जाते हैं। जबकि इनके खरीदार बहुत कम होते हैं। दुकानदार हों, या शादी विवाह के आयोजन, हर अवसर पर अधिकांश लोग घरेलू सिलेंडरों का प्रयोग करते हुए देखे जा सकते हैं। ऐसे में नए सिरे से दो किग्रा और पांच किग्रा के मिनी सिलेंडर भेजे जाने का कोई औचित्य ही नहीं है।

सभी प्रकार के उपभोक्ताओं की पहली पसंद 14.2 किग्रा वाले घरेलू सिलेंडर बन चुके हैं। इसी कारण राशन विक्रेताओं ने भी इन मिनी सिलेंडरों को बेचने में असमर्थता जता दी है। इस संबंध में गैस एजेंसियों के जिला कोआॅर्डिनेटर गौरव गर्ग का कहना है कि वितरकों के माध्यम से कुछ राशन विक्रेताओं के यहां मिनी सिलेंडरों को रखवाने का प्रयास किया जरूर गया था,
लेकिन इन्हें राशन विक्रेताओं ने गैस वितरकों को लौटा दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गैस वितरकों और अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। वहीं जिला पूति अधिकारी विनय कुमार सिंह का कहना है कि सिलेंडर के वितरण में मात्र पांच रुपये कमीशन मिलने के कारण भी राशन डीलर कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।
कंपोजिट सिलेंडर भी नहीं कर सके ग्रोथ
अभी तक इंडेन गैस ने 10 और पांच किग्रा गैस वाले कंपोजिट रसोई गैस सिलेंडर बाजार में उतारे हैं। इनकी विशेषता की बात की जाए, तो स्टील वाले 30 किग्रा वजन के मुकाबले फाइबर की तीन लेयर से बने इस 10 किग्रा गैस भरे सिलेंडर में केवल 15.900 किग्रा वजन ही होता है। यानि खाली सिलेंडर का वजन केवल 5.900 किग्रा होता है, जबकि स्टील वाले खाली लाल सिलेंडर का वजन 16 किग्रा होता है।
कंपनी के दावे के अनुसार यह सुरक्षा के मामले में स्टील वाले सिलेंडर से कहीं बेहतर है। आग लगने की स्थिति में जहां कई अवसरों पर लाल सिलेंडर विस्फोटक का रूप धारण कर लेता है, वहीं फाइबर की तीन लेयर से बना यह सिलेंडर आग लगने की स्थिति में सिलेंडर में मौजूद केमिकल गैस को स्वत: ही समाप्त कर देता है। जिससे विस्फोट होने का कोई अंदेशा नहीं होता है। इसके अलावा फाइबर पारदर्शी होने के कारण गैस का मात्रा दिखाई देती रहती है।
जिससे एकाएक गैस खत्म होने की स्थिति नहीं बनती, उपभोक्ता समय रहते नया सिलेंडर मंगा सकते हैं। मेरठ जिले की अगर बात की जाए, तो यहां मौजूद 40 इंडेन गैस वितरकों के यहां करीब एक साल से कंपोजिट सिलेंडर उपलब्ध कराए जा चुके हैं, लेकिन इस अवधि में पूरे जनपद में केवल दो हजार के करीब उपभोक्ता ही इसे अपना सके हैं।
इसका कारण गैस वितरक यह बताते हैं कि प्रचलित स्टील वाले लाल सिलेंडर की जमानत राशि 2200 रुपये है, वहीं कंपोजिट सिलेंडर की जमानत राशि 3350 रुपये रखी गई है। अगर कोई उपभोक्ता कंपोजिट सिलेंडर लेना चाहता है, तो उसे बढ़ी हुई जमानत राशि जमा करनी होगी। अधिकारी और गैस वितरक बताते हैं कि जमानत राशि का यह अंतर भी फाइबर से बने कंपोजिट सिलेंडरों की ग्रोथ में बाधा बना हुआ है।

