- 30 जून को हुआ था स्थानांतरण, 20 सितंबर तक भी नहीं किए रिलीव
- परदेश में हैं साहब, कहां से मिलेगी परिवार का खर्च चलाने को उधारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम से 30 जून को स्थानांतरित हुए कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी 20 सितंबर तक भी रिलीव नहीं हो सके। स्थानांतरित हुए अधिकारी एवं कर्मचारियों का कहना है कि पहले तो उन्हें निगम से कार्यमुक्त कर रिलीव नहीं किया गया। वहीं, दूसरी ओर शासन के आदेश पर नगरायुक्त द्वारा उनका वेतन तक रोक दिया गया। स्थानांतरण हुए करीब ढाई महीना से अधिक का समय बीत चुका है।
उन्हें न तो रिलीव किया गया और न ही उनका वेतन ही दिलवाया जा सका है। इस संबंध में उनके द्वारा नगरायुक्त को पत्र तक भी लिखा गया। जिसमें बताया गया कि साहब वह परदेश में हैं। वेतन नहीं मिलने से परिवार में आर्थिक संकट पैदा होने लगा है। परदेश में उन्हें कौन उधारी देगा, उनको रिलीव कर उनका वेतन जारी कराया जाए। फिलहाल स्थानांतरित अधिकारी खुद को त्रस्त महसूस कर रहे हैं।
नगर निगम से 10 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण 30 जून को हुए थे। जिसमें स्थानांतरण होने के साथ ही उन्हें नई तैनाती पर ज्वाइनिंग के लिए आदेशित किया गया। साथ ही यदि ज्वाइनिंग निर्धारित समय अवधि में नहीं की तो उनका वेतन तक रोक दिया जाएगा। सहायक नगरायुक्त इंद्र विजय, बृजपाल सिंह, समेत कई का स्थानांतरण होने के बाद उन्हें रिलीव कर दिया गया,
लेकिन मुख्य अतिक्रमण अधिकारी डा. पुष्पराज गौतम, खाद्य निरीक्षक सफाई कुलदीप एवं विपिन कुमार के साथ दिल्ली डिपो इंचार्ज दिलशाद हसन को रिलीव नहीं किया गया। जिसमें दिलशाद के द्वारा तो जैडएसओ के पद पर उसे प्रोन्नत किया गया था, उस प्रोन्नती को न लेने ओर स्थानांतरण रद्द करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन डा. पुष्पराज गौतम व कुलदीप एवं विपिन लगतार रिलीव होने के लिए नगरायुक्त से संपर्क बनाए हुए हैं।
जिसमें डा. पुष्पराज गौतम का कहना है कि उनके द्वारा नगरायुक्त से मिलकर मौखिक रूप से कई बार अवगत कराया गया और दो बार दो लिखित में भी इस संबंध में आवेदन किया गया, लेकिन उन्हें बावजूद उसके रिलीव नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में नगरायुक्त डा. अमित पाल शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। नगरायुक्त एवं कुछ अधिकारियों के द्वारा शासन की गाइड लाइन को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से कार्य करने के मामले पूर्व में सामने आते रहे हैं।
इसी मनमाने तौर-तरीकों को लेकर शहर में विकास कार्यों को लेकर अधिकतर पार्षद एवं स्वयं महापौर भी नगरायुक्त से लेकर निगम के कुछ अधिकारियों से खासे नाराज नजर आ रहे हैं। शासन के आदेश एवं गाइड लाइन को ताक पर रखकर कुछ कार्य आज भी निगम में अधिकारियों के द्वारा मनमाने ढंग से किए जाने के बाद उनकी फजीहत बढ़ती जा रही है, उसके बाद भी उनकी कार्यशैली में कोई सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा है। गांवड़ी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट निर्माण का मामला हो या फिर नियम विरुद्ध बीवीजी कंपनी को करोड़ों रुपये का प्रति माह भुगतान का मामला हो।
बीवीजी कंपनी से जो अनुबंध हुआ था। उसमें गीला एवं सूखा कूड़ा डोर-टू-डोर एकत्रित करने का हुआ था, लेकिन अनुबंध को दरकिनार कर कंपनी के द्वारा गीला एवं सूखा कूड़ा एक ही वाहन में एक साथ एकत्रित कर कूड़ा निस्तारण केंद्र तक पहुंचाया जा रहा है। उधर दूसरी तरफ मंगतपुरम स्थित लिगेसी वेस्ट प्लांट निर्माण के टेंडर का मामला नियम विरुद्ध खोलने का रहा हो। जिसमें टेंडर डाले जाने के बाद 24 घंटे के भीतर ही खोल दिया गया।
जिसको लेकर कुछ ठेकेदारों ने आपत्ति भी दर्ज कराई। जहां एक तरफ निगम के आलाधिकारियों से पार्षद एवं शहर की जनता परेशान नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ जिन अधिकारी एवं कर्मचारियों का निगम से 30 जून को स्थानांतरण हो गया है। वह भी अब पीड़ितों की लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। उनके द्वारा त्रस्त होकर अब नगरायुक्त को पत्र लिखकर रुका वेतन दिलवाने ओर निगम से रिलीव करने की गुहार लगाई है।
मेरा स्थानांतरण 30 जून को नगर निगम में अतिक्रमण अधिकारी के पद से हरदोई नगर निगम में किया गया था। जिसमें मुझे कार्यमुक्त कर रिलीव नहीं किया गया। मेरे द्वारा मौखिक तौर पर एवं दो बार लिखित में भी शिकायत की गई। मेरे द्वारा नगरायुक्त को भी अवगत कराया गया कि परदेश में हैं, बिना वेतन परिवार कैसे चले, परदेश में कोई उधारी भी नहीं देता। न तो रिलीव किया जा रहा न ही वेतन दिलवया जा रहा है, ऐसे में परिवार की गुजर बसर कैसे होगी, बिना गलती के ही उन्हें वेतन नहीं मिलने का आखिर उन्हें क्यों दोषी माना जा रहा है। -डा. पुष्पराज गौतम, मुख्य अतिक्रमण अधिकारी नगर निगम मेरठ।

