Thursday, March 4, 2021
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विदेशी फूड देसी छौंक 

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भारतीय खाने की पूरी दुनिया में जबरदस्त धाक है।  इसका दुनिया का छठा सबसे बड़ा बाजार  है।  क्षेत्रीय व्यंजन विदेशी व्यंजनों के साथ मिलकर नए रूप-रंग के व्यंजन अब मंहगे रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि स्टार्टअप कंपनियों की बदौलत सामान्य लोगों की पहुंच में आ चुके हैं। ई-कामर्स कंपनियों ने इसे और विस्तार दिया है।  भारतीय खाने को अपने आहार में शामिल करने के मकसद से विदेशी शेफ सीखने लगे हैं। वे पूर्वी, पश्चिमी और उत्तर भारत के राज्यों से लेकर दक्षिण भारत के पकवान बनाने के तरीके सीख रहे हैं। उनकी निगाह धार्मिक प्रभाव और विभिन्न पर्व-त्योहार वाले व्यंजनों पर भी है।

 

कोरोना वायरस संक्रमण प्रकोप के कम होते ही लोग स्ट्रीट फूट से लेकर फास्ट फूड कॉनर और रेस्टोरेंट पर टूट पड़े हैं। कहीं नूडल्स या पास्ता समोसा में भरा जाने लगा है, तो तले मोमोज, सोया रोल्स, फ्रैंच आलू या तरह-तरह के आॅमलेट को मिर्च-लहसून की चटनी और मायोनीज के साथ परोसा जाने लगा है। बर्गर, पीजा, हॉटडॉग, इडली, डोसा, कटलेट, रोल्स, सूप, चाउमिन और दूसरे फूड कई रूप में ललचाने लगे हंै। पारंपरिक खाने के साथ-साथ किसी को चाइनीज का चस्का लग चुका है, तो कोई इटालियन, थाई, कैरेबियन या मेक्सिकन फूड का दीवाना बन गया है। उनके मूल स्वाद को भारतीयकरण करने की कोशिश में सफलता मिली है। डोसे को क्रंची, और टेस्टी बनाने के लिए रागी, ओट, लाल चावल, उड़द दाल एवं सूजी का साथ मिलाकर बनाने का प्रयोग किया गया, तो कई विदेशी डिश में देसी मसाले और सामग्री शामिल कर चटखदार बना दिया गया।

भोजन और जायकेदार आहार के शौकीनों के लिए पारंपरिक भारतीय व्यंजनों से हटकर कई  बदलाव किए गए हंै। यूट्यूबर, फूड ब्लॉगर, फूड फेस्टिवल, कुक बुक्स और विभिन्न तरह के रेस्टोरेंटों ने महानगरों से लेकर शहरों, कस्बों औंर गांव तक के लोगों का जायका बदलकर रख दिया है। उनके नाम तक बदल गए हैं। एक किस्म के व्यंजन में दूसरे तरह के व्यंजनों और खाद्य सामग्रियों को मिलाकर बेहद आकर्षक ढंग से परोसने का चलन बढ़ा है। न्यूट्रिशियन के घालमेल को नजरंदाज करते हुए लोगों ने खाने के तौर-तरीके बदल लिए हैं। कुछ फास्ट फूड, तो कुछ फ्यूूजन फूड कहलाते हैं।

भारतीय खाने की पूरी दुनिया में जबरदस्त धाक है।  इसका दुनिया का छठा सबसे बड़ा बाजार  है।  क्षेत्रीय व्यंजन विदेशी व्यंजनों के साथ मिलकर नए रूप-रंग के व्यंजन अब मंहगे रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि स्टार्टअप कंपनियों की बदौलत सामान्य लोगों की पहुंच में आ चुके हैं। ई-कामर्स कंपनियों ने इसे और विस्तार दिया है।  भारतीय खाने को अपने आहार में शामिल करने के मकसद से विदेशी शेफ सीखने लगे हैं। वे पूर्वी, पश्चिमी और उत्तर भारत के राज्यों से लेकर दक्षिण भारत के पकवान बनाने के तरीके सीख रहे हैं। उनकी निगाह धार्मिक प्रभाव और विभिन्न पर्व-त्योहार वाले व्यंजनों पर भी है।

भारत में क्षेत्रीय व्यंजनों की अपनी एक अलग पहचान और खासियत रहंी है। उनका  व्यापक विस्तार हुआ है। चाहे वे शाकाहारी, मांसाहारी, भारतीय मिठाई, चटनी, स्नैक्स और अचार ही क्यों न हो। कई रेसिपी के साथ किया गया फ्यूजन प्रयोग लोगों की लार टपकाने वाला साबित हुआ है। वह अनोखा ट्रेंडी फूड बन चुका है। इसमें भारतीय शेफ ंने बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडू, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, कोलकाता, मध्यप्रदेश, गुजरात से लेकर चाइनीज, थाई, मैक्सिकन, इटली, लेबनीज, इंडोनेशियन, कैरैबियन आदि के फूड में अनूठे प्रयोग किए हैं। यहां तक कि विदेशी शेफ भारतीय सामग्री को अपने व्यंजनों में जगह दी हैं। जैसे सालमन में हल्दी और टमाटर सॉस का इस्तेमाल, तो फास्ट फूड में भारतीय मसाले का प्रयोग।

वैसे टेस्टी फ्यूजन फूड लोगों की पसंद बन गए हंै, जिसमें  कई जायके से तृप्ति और संतुष्टि मिलती है। इसने भले ही हमारे खानेपान की संस्कृति और मन-मिजाज को बदल डाला हो, लेकिन इसकी मांग और डिजिटल जमाने के फूड कल्चर की उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता।  फ्यूजन फूड का कॉन्सेप्ट का असर ही है कि 12 से 60 साल के लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं। ये ट्विस्टेड टेस्ट के साथ हर पार्टी की शान बन चुके हैं।

चाइनीज फूड में नूडल्स, फ्राइड राइस, वेज व नॉनवेज मंचूरियन तीन दशक पहले आया और धीरे-धीरे इसका काफी क्रेज बन गया। अब इसके साथ चाइनीज पिज्जा, चाइनीज बर्गर और कई तरह के चाइनीज सूप्स ने भी जगह बना ली है। इसके ढाबे, रेस्टोरेंट और उनके फ्रेंचाइजी अमूमन भारत के हर शहर और कस्बे में देखे जा सकते हैं। इटालियन फूड का स्वाद भी लोगों की जीभ पर चढ़ चुका है।  इसके डिश जीरा पास्ता, टेमरिंड पास्ता, लेमन चिकन पास्ता, रोस्टेड गार्लिक एंड चिकन और अल्फ्रेडो पास्ता जैसे फ्लेवर्स में युवाओं की पसंद हैं। इसकी मांग बढ़ने के कारण ही खास तरह के गेहूं से तैयार ऐरेबिएटा पास्ता को टोमैटो बेसिल सॉस के साथ बाजार में उतारा गया है। यही हाल पिज्जा का भी है। इसकी मूल पहचान कैप्सिकम व चीज की टॉपिंग से जुड़ी है, जबकि इन दिनों यह पिज्जा विद पनीर, चाइनीज पिज्जा, गार्लिक, अनियन, पोटैटो स्मैकर्स और स्पाइसी ट्विस्टीज जैसी कई वैराइटी में ट्रेंडी फूड बन चुका है।

देसी थाली में थाई फूड को भी अच्छी-खासी जगह मिली है। ऐसा फूड फेस्टिवल और यूट्यूबर के जरिए भी हुआ। थाई ग्रीनकरी, सोमटैम (स्पाइसी पपाया सलाद), टोमयम करी, टोमखाकी (चिकन इन कोकोनेट), पैनथाई (फ्राइड नूडल्स) पसंद किया जाने लगा। कई किस्म  के सलाद और सूप का जायका भी लोगों का पसंदीदा है। लेबनीज मेंग्रिल्ड, लेबनीज क्विजीन और किबेटा बटाटा भी सामान्य रेस्टोरेंट में मिलने लगा है, तो मेक्सिकन और इंडोनेशियन फूड भी भारतीय प्लेट में अपनी जगह बना चुका है। विदेशी होकर भी देशी छौंक के साथ परोसे जाने वाले कैरेबियन फूड दरअसल अफ्रीकन, अमेरिकन-इंडियन, यूरोपियन, ईस्ट इंडियन और चाइनीज का कॉम्बिनेशन है। इस फ्यूजन टेस्ट में कैरेबियन चिली, कैरेबियन जर्कविंग्स, चिलीडॉग, कॉम्बोपाई, करीआलूएंड एग, करी पोक लोकप्रिय है।

फ्यूजन फूड ने खाने के स्वाद और न्यूट्रिशन के साथ-साथ उसे परोसने के तरीके भी बदले हंै। वह रेस्टोरेंट की कल्पनाशीलता और कल्चर को दर्शाता है। उसके साथ फ्यूजन फूड को भी विशिष्ट बनाता है और जायके की दोहरी अनुभूति का एहसास देता है। इसमें पौष्टिकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि दोहरे पैमाने पर उसकी मांग बनी रहे। न्यूट्रिशन का वैल्यू के स्तर पर फ्यूजन फूड को कमतर नहीं आंका जा सकता है। उदाहरण के लिए रोल की तरह दिखाई देने वाली इटालियन डिश शिकागो हॉटडॉग डेजर्ट को ही लें। इसमे ंचीज और चॉकलेट भरे होते हैं। साथ ही न्यूट्रीशंस को बढ़ाने के लिए इसमें मशरूम, फल और पत्तियां भी डाल दी जाती हैं। इसे भारतीय स्वाद के अनुरूप बनाया जाता है ताकि लोगों को देसीपन का स्वाद मिले। जैसे भारत में बनाए जाने वाले हॉटडॉग में ब्रेड के बीच हरे धनिए की चटनी लगाकर आलू की टिक्की और छोले के साथ परोसा जाता है। जबकि नूडल्स व चाइनीज पर इमली की चटनी, मोमोज में गोभी और पिज्जा पर सेव डालकर इसका देशीकरण कर दिया जाता है। सामान्य स्पैगिटी नूडल्स की तुलना में लोगो ंको इंडियन, चाइनीज और इटैलियन फ्यूजन के साथ तैयार किए गए स्पैगिटी नूडल्स खाने में मजा आता है।

प्रस्तुति: शंभु सुमन

 


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