- कोई शादी के लिये तो कोई बीमारी के कारण ड्यूटी से बचना चाहता है
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को होगा। इसके लिये तैयांरियां जोरों पर शुरू हो गई है, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है जो चुनाव ड्यूटी से बचना चाहते हैं और उनसे बचने के लिये जुगाड़ ढूंढने में लग गए हैं। ऐसे लोग हर चुनाव में ड्यूटी कटवाने में साम, दाम और दंड का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं। सबसे ज्यादा प्रार्थनापत्र शादी से जुड़े आ रहे हैं।
मतदान के दिन प्रशासन स्कूल और कालेज से लेकर हर विभाग के कर्मचारियों को पीठासीन अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाता है। इसके लिये सभी लोगों से विभागीय सूची मांग ली जाती है। बैंक, एलआईसी और तमाम अर्द्धसरकारी संस्थान भी इसी जद में आ जाते हैं। मतदान होने में अभी बीस दिन बाकी हैं और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में ऐसे लोगों के आवेदन आने शुरू हो गए हैं जो चुनाव की ड्यूटी से बचना चाहते हैं।
एक कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि कालेजों के प्राचार्य सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाये जाते हैं, लेकिन उनको पीठासीन अधिकारी बना दिया गया है जो पूरी तरह से गलत है। पति और पत्नी दोनों की ड्यूटी कई जगह लगने के कारण भी लोग परेशान है। वहीं, सरकारी कर्मचारी नेताओं से लेकर मीडियाकर्मियों तक से जुगाड़ लगवा रहे हैं कि उनकी ड्यूटी कट जाए। कोई अपनी बीमारी की बात कर रहा है तो परिवार में होने वाली शादी के कारण परेशान है। ड्यूटी कटवाने से जुड़े आवेदन जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी कार्यालय में प्राप्त किए जा रहे हैं।
पति और पत्नी में से एक की ड्यूटी काटने के आवेदन भी बड़ी संख्या में हैं। सीडीओ शशांक चौधरी ने बताया कि दो पालियों में कुल 2920 पीठासीन अधिकारियों और प्रथम मतदान अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके लिए 175 मास्टर ट्रेनर लगाए गए थे। पहले दिन दोनों पालियों में कुल 360 कार्मिक गैर हाजिर रहे।
1460 पीठासीन अधिकारियों में से 1233 पहुंचे और 227 गैर हाजिर रहे। प्रथम मतदान अधिकारी 1460 में से 1327 पहुंचे। 133 गैरहाजिर रहे। सीडीओ ने बताया कि गैरहाजिर रहने वाले कार्मिकों को 21 जनवरी दूसरी पाली में प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, ऐसा कोई दिन नहीं जा रहा है जब लोग विकास भवन में ड्यूटी कटवाने के लिये प्रार्थनापत्र लेकर न घूम रहे होें। कुछ के बाजिव तर्क हो सकते हैं तो कोई कामचोरी के कारण चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहता है।

