आखिर महानगर में क्यों नहीं रुक रहा प्रदूषण का स्तर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/मोदीपुरम: महानगर में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो रहा है। लगातार इस स्तर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। प्रदूषण विभाग लाचार दिखाई दे रहा है। हालांकि महानगर में प्रदूषण रोकने के लिए विभाग लगातार दावे कर रहा है, लेकिन अगर आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो उससे तस्वीर कुछ और ही बया कर रही है।
इस समय में महानगर में प्रदूषण का स्तर 298 चल रहा है। जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। अगर यह प्रदूषण का स्तर नहीं रुका तो आने वाले समय में जहां मानव जीवन पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा ही साथ ही सांस लेना तक दूभर हो जाएगा। ऐसे में अब इस प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा, लेकिन इस स्तर को रोकने में कोई भी विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है।
रोकथाम को 34 विभागों को किया था शामिल
प्रदूषण को रोकने के लिए एनसीआर में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गे्रप सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम में 34 विभागों को शासन द्वारा शामिल किया गया है, लेकिन इस प्रदूषण की रोकथाम में कोई भी विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है। नगर निगम, जल निगम, पीडब्ल्यूडी, समेत 34 विभाग इसमें शामिल है, लेकिन प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई इन विभागों द्वारा नहीं की जा रही है। इन विभागों की लापरवाही के कारण ही प्रदूषण में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
प्रदूषण फैलाकर खुलेआम विभाग को दे रहे चुनौती
अगर शहर में देखे तो यहां गन्ने के कोल्हुओं में पन्नी लगातार जलाई जा रही है। मेरठ के खरदौनी गांव लगभग दो दर्जन से अधिक ऐसे कोल्हू है। जिनमें कार्रवाई के बाद भी पन्नी खुलेआम जलाई जा रही है। ऐसे में आखिर प्रदूषण की रोकथाम कैसे होगी। औद्योगिक ईकाईयों पर नजर डाली जाए तो कई औद्योगिक ईकाईयां ऐसी है। जो प्रदूषण को लगातार बढ़ावा दे रही है। यहां भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
हाइवे पर निर्माण कार्यों से उड़ रही धूल
एनएच-58 हाइवे परतापुर से लेकर रामपुर तिराहे तक 78 किमी की दूरी है। इस हाइवे पर जगह-जगह फ्लाईओवर फुट ओवर ब्रिज और सर्विस रोड का काम चल रहा है। ऐसे में धूल उड़ने के कारण प्रदूषण की स्थिति लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मानकों के अनुरूप हाइवे पर निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। प्रदूषण की रोकथाम के लिए भी कोई साधन नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में एनएचएआई पर भी सवाल उठते हैं। आखिर इस प्रदूषण की रोकथाम कैसे होेगी।
प्रदूषण की महानगर में स्थिति
- गंगानगर 280
- पल्लवपुरम 287
- जयभीमनगर 275
शहरों में प्रदूषण की स्थिति
- बागपत 285
- गाजियाबाद 326
- ग्रेटर नोएडा 298
- मेरठ 298
- मुजफ्फरनगर 220
- नोएडा 306
- दिल्ली 296
- बुलंदशहर 308
- हापुड़ 290
प्रदूषण को कम करने के लिए टीम बनाई गई है। टीम द्वारा मॉनिटीरिंग की जा रही है। जिन औद्योगिक ईकाईयों में कमी है। उन पर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे है। -डा. योगेंद्र कुमार क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी |
![]() हाईवे पर निर्माण कार्य कर रही कंपनी को निर्देशित किया है कि निर्माण कार्य के दौरान ध्ूाल न उड़े। इसके लिए प्रबंध किए जाए। हालांकि हाइवे पर धूल के लिए प्रतिदिन पानी का छिड़काव कराया जा रहा है, लेकिन उसके बाद भी कंपनी को सख्त हिदायत दी गई है। -डीके चतुर्वेदी परियोजना निदेशक एनएचएआई |


प्रदूषण को कम करने के लिए टीम बनाई गई है। टीम द्वारा मॉनिटीरिंग की जा रही है। जिन औद्योगिक ईकाईयों में कमी है। उन पर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे है। -डा. योगेंद्र कुमार क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी