
सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात, दिखने में साफ-सुथरी बनावट की होते हुए भी संवेदनशील त्वचा बीमारियों का घर होती है। इस त्वचा में तरह-तरह के दाने हमेशा निकलते रहते हैं। ये दाने मुंहासे न होकर, लाल-गुलाबी चकत्ते होते हैं जिन पर बार-बार हाथ फेरने से एक प्रकार की खुजली होती है और छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं।
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इस प्रकार की त्वचा को संवेदनशील त्वचा कहा जाता है। ऐसी त्वचा किसी भी तरह के मौसम का बदलाव सह नहीं पाती है। धूप के संपर्क में आने, तापमान के घटते-बढ़ते रहने, साबुन या अल्कोहल आदि के अधिक इस्तेमाल से त्वचा प्रभावित होकर संवेदनशील बन जाती है।
संवेदनशील त्वचा सर्दी में अधिक फटने लगती है। कभी-कभी त्वचा इतनी संवेदनशील हो जाती है कि अचानक कोई आवाज सुनते ही, अचानक कोई भय होते ही त्वचा पर छोटे-छोटे लाल चकत्ते हो उठते हैं। अगर कोई अचानक पीछे से आकर शरीर पर हाथ का स्पर्श कर देता है तो भी देह में सिहरन होकर त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं।
प्रीति शादी करके जब अपने ससुराल पहुंची तो कुछ दिनों तक तो सब कुछ सामान्य चलता रहा किंतु कुछ दिनों के बाद उसके हाथों एवं पेट की कोमल त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते होने लगे और उनमें अजीब-सी जलन महसूस होने लगती। चिकित्सक के पास जाने पर उसे यह जानकारी मिली कि उसकी त्वचा संवेदनशील हो चुकी है। चिकित्सक के उपचार से उसकी त्वचा की संवेदनशीलता समाप्त हो गई।
संवेदनशील त्वचा को सामान्य रखने के लिए साफ-सफाई का अधिक ध्यान रखना होता है। त्वचा की सफाई के लिए मुलायम कपड़े को गुनगुने पानी में निचोडकर धीमा-धीमा साफ करें ताकि दानेदार स्कर्व को हानि न पहुंचे। कैक्टस से बनी क्रीम से त्वचा की सफाई करनी चाहिए। इससे त्वचा अन्दर तक साफ हो जाती है।
संवेदनशील त्वचा पर रसायन युक्त प्रसाधन तथा बिना पानी मिलाए एस्ट्रीजेन्ट लोशन एवं स्किन टॉनिक कभी नहीं लगाना चाहिए। अगर आप भी त्वचा की संवेदनशीलता से परेशान हों और अचानक त्वचा पर किसी भी कारण से लाल-लाल चकत्ते हो जाएं तो इन विधियों को अपना सकती हैं। मैंने अपने ब्यूटी पार्लर में आने वाली अनेक महिलाओं पर इन विधियों को अनेक बार आजमाया है और उनकी त्वचा की संवेदनशीलता को दूर किया है।
मसूर दाल का पाउडर एक बड़ा चम्मच, जौ का आटा एक छोटा चम्मच लेकर कच्चे दूध के साथ मिला लें। इसे तैयार करके दस मिनट तक छोड़ दें। इसके बाद पेस्ट को शरीर की त्वचा पर लगा कर लगभग पन्द्रह मिनट तक छोड़ दें। अब हल्के हाथों से इस पेस्ट को छुड़ा कर ऊपर से शहद लगा दें। पन्द्रह मिनट बाद गुनगुने पानी से त्वचा को साफ कर दें।
मलमल या पतले कपड़े में चोकर डालकर पोटली बना लें। इस पोटली को दूध में भिगोकर धीरे-धीरे चेहरे एवं गर्दन के साथ ही सीना एवं स्तनों पर भी रगड़ें। इससे वहां की त्वचा की संवेदनशीलता कम होगी एवं त्वचा में कोमलता एवं निखार भी आएगा।
आबा हल्दी, संतरे का रस तथा एक चम्मच मिल्क पाउडर मिलाकर हर दूसरे-तीसरे दिन संपूर्ण शरीर की त्वचा पर मलते रहने से मौसम का प्रभाव त्वचा पर नहीं पड़ता और त्वचा में एलर्जी उत्पन्न नहीं होती। इस विधि से त्वचा कोमल एवं मुलायम-चमकदार भी रहती है।
एक कप कच्चा दूध लेकर उसमें हाफ चम्मच हल्दी की डस्ट डालकर दोनों को अच्छी तरह मिला लें। नहाने से आधा घंटा पहले इसे संपूर्ण शरीर की त्वचा पर हल्के हाथों से मलें। आधा घण्टा बाद स्नान करें। आपकी त्वचा इस विधि से हर मौसम में कोमल व चमकदार बनी रहेगी।
आरती रानी


