Wednesday, May 29, 2024
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कर्नाटक में कौन बनेगा मुख्यमंत्री, …तो यह फार्मूला हो जाएगा कामयाब

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नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब मुख्यमंत्री तय करने के लिए पार्टी के अंदर बैठकों का दौर जारी है। फिलहाल दो चेहरे सामने दावेदारी के लिए आ रहे हैं।

पहले नंबर पर वरिष्ठ कांग्रेसी सिद्धारमैया और दूसरे नंबर पर हैं प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार। एक और पेंश फंस रहा है, कांग्रेस ने यह चुनाव जातिगत आधार पर अलग अलग समुदाय के लोगों को किसी भी प्रकार से अपने पक्ष में खींचा इस कार्य में उन समुदायों के मुखिया/नेताओं का अहम रोल रहा है। जिस कारण से उनकी भी मंत्रिमंडल सहभागिता करनी होगी। क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और 2024 का चुनाव भी फतह करना है। ऐसे में निर्णय काफी चुनौतीपूर्ण है।

कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय सूत्रों ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया रहेंगे। उनके साथ तीन और उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। बावजूद इसके मुस्लिम समाज से भी एक डिप्टी सीएम पद देने की मांग उठाई जा रही है। हालांकि कर्नाटक में सरकार बनने का फॉर्मूला लगभग तय है।

कुरुबा समुदाय के सिद्धारमैया का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए फाइनल है। साथ ही तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, ऐसी बातें चल रही हैं। ये तीनों अलग-अलग समुदाय से होंगे। इनमें वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके शिवकुमार, लिंगायत समुदाय से आने वाले एमबी पाटिल और नायक/वाल्मिकी समुदाय के सतीश जारकीहोली हैं।

कर्नाटक में कुरुबा आबादी 7 फीसदी, लिंगायत 16 फीसदी, वोक्कालिगा 11 फीसदी, SC/ST करीब 27 फीसदी हैं, यानी कांग्रेस इस फैसले से 61 फीसदी आबादी को साधना चाहती है।

हालांकि कांग्रेस संगठन से जुड़े लोगों ने डीके शिवकुमार की ऑर्गेनाइजेशनल स्किल को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की है। ये तर्क दिया जा रहा है कि सिद्धारमैया विपक्ष के नेता और मुख्यमंत्री दोनों ही रह चुके हैं। उनकी उम्र भी ज्यादा है, इसलिए डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

पुख्ता सूत्रों का दावा है कि रात तक मुख्यमंत्री का नाम तय होने की उम्मीद है। उन्होंने ये भी कहा कि पब्लिक ओपिनियन डीके शिवकुमार के पक्ष में है, ज्यादातर विधायकों का सपोर्ट सिद्धारमैया के साथ है।

कांग्रेस हाईकमान इस विकल्प के बारे में भी सोच रहा है कि डीके शिवकुमार को 2024 के लोकसभा चुनाव तक प्रदेश अध्यक्ष बनाकर रखा जाए। ताकि जिस तरह उन्होंने विधानसभा चुनाव को मैनेज किया है, उसी तरह लोकसभा चुनाव में भी पार्टी बड़ी जीत हासिल कर सके। हालांकि, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना ज्यादा है।

कांग्रेस पार्टी चाहती है कि अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में 28 में से कम से कम 25 सीटें पार्टी के खाते में आए। इसलिए अभी सरकार अलग-अलग समुदायों के वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए बनाने की कोशिश है।

एक और फार्मूले पर हो रही है चर्चा

कांग्रेस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सरकार के 5 साल के कार्यकाल में तीन साल सिद्धारमैया और आखिरी के दो साल डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय से आते हैं और पिछड़ी जातियों के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। कांग्रेस इसी का फायदा लोकसभा चुनाव में उठाना चाहती है।

वहीं, डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर वोक्कालिगा और एमबी पाटिल के जरिए लिंगायतों को साधने की तैयारी है। लिंगायत के प्रमुख मठ से जुड़े महंत भी कह चुके हैं कि कांग्रेस को लिंगायत समुदाय से एक उपमुख्यमंत्री जरूर बनाना चाहिए।

हालांकि सूत्र बताते हैं कि विधायक दल की बैठक में डीके शिवकुमार ने इस फॉर्मूले से असहमति जताई है। उनका कहना है कि हम दूसरे राज्यों में देख चुके हैं कि ये फॉर्मूला कामयाब नहीं हुआ है।

इस कारण से डीके हो सकते हैं पीछे

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भ्रष्टाचार का केस होने से कांग्रेस डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने से हिचकिचा रही है। केंद्र सरकार ने जिन प्रवीण सूद को सीबीआई का नया डायरेक्टर बनाया है, वे अब तक कर्नाटक पुलिस के डीजीपी थे। उनकी और डीके शिवकुमार की बिल्कुल नहीं पटती। धमकी दी थी कि सरकार में आने के बाद उन पर कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में यदि डीके को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो भ्रष्टाचार का मामला हाईलाइट होगा। ऐसा होने पर कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद की रेस में इसलिए भी आगे बताया जा रहा है, क्योंकि उनकी पकड़ पिछड़ों के साथ ही दलित और मुसलमानों में भी है। राज्य के हर तबके में उनका प्रभाव है। डीके शिवकुमार ओल्ड मैसूरु रीजन में ही पॉपुलर हैं, बाकी जगह उनकी पकड़ सिद्धारमैया के मुकाबले थोड़ी कम है।

डीके ने इस बार उन्होंने चुनावी हलफनामे में खुद की संपत्ति 1,413 करोड़ रुपए बताई है। 2018 में उनकी संपत्ति 840 करोड़ रुपए थी।

पार्टी के ऑब्जर्वर्स मल्लिकार्जुन खड़गे को रिपोर्ट देंगे

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली बुलाया है। कांग्रेस की तरफ से नियुक्त किए गए तीन सेंट्रल ऑब्जर्वर रिपोर्ट लेकर दिल्ली लौट चुके हैं। ऑब्जर्वर्स ने सभी विधायकों से उनकी राय ली।

इसकी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तक पहुंचा दी गई है। खड़गे ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी जितेंद्र सिंह और पूर्व जनरल सेक्रेटरी दीपक बाबरिया को ऑब्जर्वर नियुक्त किया था। इनके साथ में AICC जनरल सेक्रेटरी और कर्नाटक के इंचार्ज रणदीप सिंह सुरजेवाला भी थे। ऑब्जर्वर्स ने हर एक विधायक से अलग-अलग रायशुमारी की।

कांग्रेस की 34 साल बाद कर्नाटक में सबसे बड़ी जीत

कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में से 135 सीटें जीती हैं। उसे 43 फीसदी वोट मिले हैं। राज्य में सरकार चला रही भाजपा को 66 और जेडीएस को 19 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने कर्नाटक में 34 साल बाद सबसे बड़ी जीत हासिल की है। इससे पहले 1989 में उसने 178 सीटें जीती थीं। 1999 में उसे 132 सीटें मिली थीं।

कर्नाटक में किसी पार्टी का दोबारा सत्ता में न लौटने का रिकॉर्ड भी बरकरार रहा। राज्य में 38 साल से सरकार रिपीट नहीं हुई है। आखिरी बार 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व वाली जनता पार्टी ने सत्ता में रहते हुए चुनाव जीता था।

पिछले 5 चुनाव यानी 1999, 2004, 2008, 2013 और 2018 में सिर्फ दो बार 1999 और 2013 में सिंगल पार्टी को बहुमत मिला। BJP 2004, 2008, 2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। तब उसने बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी।

कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन होगा?

कांग्रेस कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए मंगलवार को नाम का ऐलान कर सकती है। पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री पर विधायकों की राय जानने के लिए ऑब्जर्वर्स ने बेंगलुरु में होटल शांगरी-ला में 4-5 घंटे तक बात की थी। कांग्रेस लीडर बीके हरि प्रसाद ने बताया कि मीटिंग में सीक्रेट बैलट वोटिंग भी हुई।

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