Tuesday, May 5, 2026
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क्यों हजम नहीं हो पाते आयोग से चयनित प्राचार्य?

  • माछरा समेत आधा दर्जन डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों ने दिए त्यागपत्र
  • जीजीआईसी किठौर की प्राचार्य पर भी हुई थी कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: शिक्षा और अनुशासन एक सिक्के के दो पहलू हैं, एक के अभाव में दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन यदि शिक्षा के मंदिर में ही अनुशासनहींनता इस हद को पहुंच जाए कि फजीहत के साथ इस्तीफों और विभागीय कार्रवाई का दौर चल पड़े तो फिर सवाल उठने लाजिम हैं।

हाल ही में इंटर और डिग्री कॉलेजों के कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जिनसे लगा कि सुस्ती, अकर्मण्यता और धूर्त सियासत के चंगुल से शिक्षण संस्थान भी अछूते नहीं। नियम-कायदों की बात करने वाले यहां कार्रवाई की भेंट चढ़ते हैं या मैदान छोड़ भागते हैं।

स्कूल, कॉलेज अध्ययन, अध्यापन के साथ अनुशासन के प्रशिक्षण केंद्र भी हैं। जहां शिक्षक, छात्र-छात्राओं और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षा व अनुशासन सिखाते हैं। यही उनका कर्तव्य है, लेकिन यदि वहां भी अनुशासन को लेकर शिक्षकों या शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के बीच फजीहत और रार कार्रवाई व इस्तीफे की नौबत को पहुंचे तो यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं? इंटर और डिग्री कॉलेजों में आयोग से चयनित होकर पहुंच रहे प्राचार्यों के साथ यही रवैया देखने को मिल रहा है।

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज किठौर की बात करें तो यहां रिदा जोशी गतवर्ष सितंबर में आयोग से प्राचार्य चयनित होकर आईं थीं। बीती 22 फरवरी को सुस्ती और लापरवाही पर उन्होंने यहां नियुक्त सहायक अध्यापिका प्रतिभा शर्मा को डांट दिया। जिससे आहत अध्यापिका को दौरा पड़ गया और उन्हें आनंद हॉस्पिटल के आईसीयू में रखना पड़ा। मामला तूल पकड़ गया।

शिक्षक संघ ने विरोध में जिविनि कार्यालय पर धरना दे दिया। नतीजा प्राचार्य रिदा जोशी डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध कर दी गई। हालांकि बाद में उन्हें पुन: जीजीआईसी किठौर भेज दिया गया। गतवर्ष अक्तूबर में आयोग से चयनित केके जैन डिग्री कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता अरविंद कुमार माछरा डिग्री कॉलेज में प्राचार्य के पद पर नियुक्त हुए। बिन बताए अनुपस्थित रहने पर उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चंद्रपाल और सुबोध को नसीहत कर दी।

बात बढ़ी तो कई शिक्षणेत्तर कर्मचारी उनके विरुद्ध लामबंद हो गए और अरविंद कुमार को अपने पद से न सिर्फ इस्तीफा देना पड़ा बल्कि सुबोध ने उन पर एससी-एसटी के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी। यही नहीं आयोग द्वारा मेरठ कॉलेज के प्रो. सतीश कुमार एसएसवी डिग्री कॉलेज हापुड़ और प्रो. ललित कुमार डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर में और प्रो. राजेश गर्ग डीएवी कॉलेज बुलंदशहर में प्राचार्य नियुक्त किए गए थे, लेकिन कॉलेजों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से तालमेल न बिठा पाने के कारण तमाम लोग एक वर्ष से पूर्व ही इस्तीफे देकर अपने कॉलेजों को लौट गए।

…और बिगड़ जाती है बात

कुछ अनुभवी शिक्षकों का मानना है कि आयोग से चयनित अधिकारी अनुशासित और नियम-कायदों के तहत काम करने का प्रयास करते हैं। उच्च पद और नए संस्थानों में नियुक्ति के साथ स्वयं की तरह वह अधीनस्थों से भी नियम फोलों कराना चाहते हैं। जबकि कॉलेजों में मठाधीश शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी नियमों से बेपरवाह रहकर मनमानी करते हैं। जिससे विवाद उत्पन्न होने के साथ बात बिगड़ जाती है।

ये है कर्मचारी आचार संहिता का नियम

कर्मचारी आचार संहिता के मुताबिक प्राचार्य शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का नियोक्ता होता है। इसलिए शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को चाहिए कि वह प्राचार्य के आदेशों का अक्षरश: पालन करें।

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