Tuesday, May 19, 2026
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मदरसों की सरकार से ‘पर्देदारी’ क्यों?

  • आखिर सरकारी सर्वे के विरोध की वजह क्या है?
  • जब पाक साफ होने का दावा तो फिर सर्वे की मुखालफत क्यों?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकारी गलियारों से एक मैसेज पास होता है कि सरकार अब प्राइवेट मदरसों की मॉनिटरिंग करेगी। फिर मॉनिटरिंग रिपोर्ट के आधार पर शासन इन मदरसों के कामकाज की समीक्षा करेगा। इस समीेक्षा में जो मदरसे फर्जी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और जो मदरसे सरकारी इमदाद के हकदार हैं उनको अनुदान भी दिया जाएगा। बस इतनी-सी बात है और इसी बात को लेकर बवंडर मचा हुआ है।

दरअसल, सरकार चाहती है कि मदरसे के छात्र भी आधुनिकता से कदमताल करें। धार्मिक किताबों के साथ साथ विज्ञान की किताबों का अध्ययन करें। दीन के साथ दुनियादारी भी सीखेें, ताकि देश की मुख्य धारा से जुड़ सकें। भले ही सरकार की मंशा में कोई खोट नहीं दिखती, लेकिन मुस्लिम हलकों में इस सर्वे को लेकर हलचल जरुर दिखाई दे रही है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मदरसों पर विरोधियों द्वारा आतंकी गतिविधियों के आरोप लगते हैं

तब मदरसा संचालकों से लेकर बड़े बड़े उलेमा और बड़े मुस्लिम धार्मिक संगठन अपनी सफाई में अक्सर कहते हैं कि मदरसे पाक साफ हैं, इनका कहीं से कहीं तक भी आतंकी कनेक्शन नहीं है और यह खुली किताब की तरह है, जो जब चाहे इस खुली किताब को पढ़ सकता है। जो बात लोगों को हजम नहीं हो रही वो यह कि जब मदरसे खुद ही खुद को क्लीन चिट दे चुके हैं तो फिर सर्वे से परहेज क्यों?

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कई मुस्लिम स्कॉलर्स की तो मदरसा संचालकों के लिए यहां तक राय है कि वो विरोधियों का मुंह बंद करने के लिए खुद सर्वे में सहयोग करें, ताकि मदरसों को लेकर कुछ लोगों में जो भ्रम की स्थिति है वो स्वंय ही समाप्त हो जाए। जिस तरह से मंगलवार को दिल्ली में जमीयत उलेमा ए हिन्द के बैनर तले ‘मदरसों की सुरक्षा’ विषय पर उलेमा सिर जोड़ कर मंथन के लिए बैठे और 24 सितम्बर को देवबंद में जिस प्रकार इजलास का ऐलान हुआ है

उससे एक बात तो साफ है कि मदरसा संचालक यह कतई नहीं चाहते कि मदरसों का सर्वे हो, लेकिन क्यों? इस पर सब चुप हैं। दलील में सिर्फ इतना कहते हैं कि मदरसों में दीनी तालीम देने के अलावा कुछ नहीं होता। मुस्लिम स्कॉलर्स मदरसा संचालकों की इसी दलील को कोड करते हुए कहते हैं कि ‘अगर आप खुद मुतमईन हैं, तो दूसरोें को इतमिनान दिलाने में क्या हर्ज है, उन्हें सर्वे करने दीजिए’।

कुछ स्कॉलर्स यहां तक कहते हैं कि इस सर्वे से मदरसों को उस तोहमत से छुटकारा मिल जाएगा जो उन पर बरसों से लगती आ रही है। ‘पाक साफ हैं तो दिखने भी चाहिएं’ वाली तर्ज पर एक मुस्लिम बुद्धिजीवी का कहना है कि सर्वे का विरोध आपको खुद कठघरे में खड़ा कर सकता है। जब हमने वेस्ट यूपी के कुछ बड़े मदरसों के संचालकों से बात की तो उनका साफ तौर पर यह कहना था कि सरकार जब उन्हें अनुदान के रुप में कोई आर्थिक मदद नहीं करती तो फिर उनके वित्तीय लेनदेन में दखलअंदाजी क्यों?

जबकि सरकार का पक्ष यह है कि इस सर्वे में जो मदरसे सरकारी अनुदान के हकदार होंगे उन्हें बाकायदा यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता भी दिलवाई जाएगी। मदरसों के सर्वे के संबंध में कई बड़े उलेमाओं से बातचीत के आधार पर अभी तक जो तस्वीर सामने आई है उससे यही लगता है कि देश के मुसलमान यह नहीं चाहते कि मदरसोें का सरकारी सर्वे हो।

देखिए मदरसों में मानवता का पाठ पढ़ाया जाता है। मदरसे नैतिक मूल्यों के रक्षक भी हैं। मदरसों के सर्वे को लेकर सरकार की सोच अगर पॉजिटिव है तो किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।

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क्योंकि सकारात्मक सोेंच के साथ अगर कोई भी काम शुरु किया जाए तो उसमें कोई हर्ज नहीं।
-मौलाना मशहूद उर रहमान, प्रधानाचार्य, मदरसा इमदादुल इस्लाम, मेरठ

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