- चार बार मुख्यमंत्री के कार्यकाल में दर्जनों बार क्रांतिधरा पर आए मुलायम सिंह यादव
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/सरधना: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव का मेरठ से गहरा नाता था। चाहे वह राजनीतिक कारणों से आए हो या फिर सामाजिक कारणों से, जिनके घर भी एक बार गए, वो उनके दिलों में हमेशा के लिए बस गया।
नेताजी उनको इसलिए कहा गया, क्योंकि मेरठ में चाहे कार्यकर्ता की बेटी की शादी हो या फिर विक्टोरिया पार्क का भीषण अग्निकांड हो, नेताजी इन सबकी मदद के लिए आगे रहे। यही कारण रहा कि क्रांतिधरा को मुलायम सिंह यादव ने न केवल विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित किया, बल्कि ऐतिहासिक जेल को भी अपने राजनीतिक गुरु चौधरी चरण सिंह के नाम समर्पित कर दिया।
मुलायम सिंह के राजनीति जीवन को हर कोई याद कर रहा है। मुलायम सिंह यादव अपने काम के लिए सख्त मिजाज के रूप में जाने जाते थे। मगर कहा जाता है कि वह दिल से बेहद मुलायम यानी नर्म थे। अपने राजनीति जीवन में एक बार रक्षामंत्री व तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह के नाम तमाम उपलब्धियां हैं। उनके जाने के बाद सरधना के लोग भी मुलायम सिंह को याद कर रहे हैं।

सरधना की जनता का मुलायम सिंह काफी लगाव रहा है। इतिहास पर नजर डालें तो मुलायम सिंह सरधना में तीन बार चुनाव प्रचार के दौरान आए। एक बार बतौर सीएम वह सरधना की सरजमीं पर पहुंचे थे। तमाम पुराने लोग आज भी उनकी कार्यशैली और अंदाज के कायल हैं। मुलायम सिंह यादव सर्वप्रथम वर्ष 2002 में सरधना की सरजमीं पर आए थे।
उस समय विधानसभा चुनाव में सत्यप्रकाश भराला मैदान में थे। पहली बार सरधना आए मुलायम सिंह यादव भराला समर्थन में नगर के श्रीरामलीला मैदान में जनता से रूबरू हुए थे। इसके बाद बतौर मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह वर्ष 2007 में सरधना पहुंचे थे। तब प्रो. रविंद्र पुंडीर विधानसभ के चुनाव में खड़े थे। पुंडीर के समर्थन में मुलायम सिंह ने मंडी समिति के विशाल मैदान में भीड़ को संबोधित किया था।
तब भी मुलायम सिंह ने यहीं कहा था कि उनका सरधना की जनता से विशेष लगाव है। साथ ही उन्होंने कहा था कि जाति-धर्म में कभी नहीं बटना है। हमेशा सौहार्द के साथ आस में मिल जुलकर संगठित रहना है। तीसरी व अंतिम बार मुलायम सिंह यादव 2009 में सरधना की जनता के बीच पहुंचे थे। यह तीसरा दौरा भी चुनावी दौरा रहा था। सरधना की जनता ने भी मुलायम सिंह यादव व सपा को खूब बरसाया है।
सरधना के मुख्तार खान बताते हैं कि नेता जी अपने काम के लिए सख्त मिजाज के रूप में जाने जाते थे। मगर वह दिल से हमेशा ही नर्म रहे। उन्होंने कभी कार्यकर्ता या वोटर में भेदभाव नहीं किया। आज उनके दुनिया से जाने के बाद सरधना की जनता भी मुलायम सिंह यादव को नम आंखों से याद कर रही है।
किसान राजनीति को दूसरा बड़ा आघात
मेरठ: दो साल के भीतर किसान राजनीति को दूसरा बड़ा झटका मुलायम सिंह यादव के निधान के रूप में लगा हैं। किसानों की सड़क से लेकर संसद तक में आवाज बुलंद करने वाले मुलायम सिंह यादव का जाना किसानों के लिए बड़ी क्षति हैं। आजाद भारत में किसान और समाजवादी राजनीति के दो बड़े योद्धाओं, चौधरी चरणसिंह और डा. राम मनोहर लोहिया के संयुक्त शिष्य भारत के पूर्व रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन किसान राजनीति का ऐसा अध्याय है, जो बड़ा झटका किसान वर्ग को दे गया।
एक वर्ष वहले चौधरी अजित सिंह के देहांत से किसानों को बड़ा आघात दिया था। देश की किसान राजनीति के इन दोनों दिग्गजों को धुरी माना जाता था। किसानों की आवाज उठाने में मुलायम सिंह यादव और चौधरी अजित सिंह पीछे नहीं हटते थे। लाठी-डंडे तक किसानों के लिए खाने को तैयार रहते थे।
दोनों की पहचान भी किसान राजनीति के रूप में थी। हमेशा किसानों की बात करना। लोकसभा में जब भी अपनी बात रखते तो किसानों की समस्याओं को ही प्राथमिकता के साथ उठाया जाता था। इन दोनों किसान दिग्गजों नेताओं के जाने के बाद किसान राजनीति को बड़ा झटका लगा हैं।
चौधरी चरण सिंह कारागार नाम रखा था मुलायम ने
मेरठ: मुलायम सिंह यादव जब 1994 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तब उन्होंने मेरठ जेल का नाम बदलकर चौधरी चरण सिंह कारागार कर दिया था। तभी से इस जेल को इस नाम से जाना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के खास माने जाने वाले मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री के दूसरे कार्यकाल में किसान नेता चौधरी चरण सिंह के नाम पर कई महत्वपूर्ण संस्थानों और एयरपोर्ट का नाम भी बदला था।
वेस्ट यूपी की सबसे बड़ी मंडलीय जेल 1994 से पहले मेरठ जेल के नाम से जानी जाती थी। 1857 की क्रांति से जुड़े जिला कारागार का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम से करने पर मुलायम सिंह यादव की वेस्ट यूपी में काफी लोकप्रियता बढ़ी थी। इस वक्त इस जेल में ढाई हजार से अधिक बंदी है और इनमें कई व्यवसायिक गतिविधियां भी चलाई जा रही है जो बंदियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है।
औघड़नाथ मंदिर भी पहुंचे थे मुलायम सिंह
मेरठ: जब मुलायम सिंह यादव केन्द्रीय रक्षा मंत्री थे, तब एक बार मेरठ आये थे और औघड़नाथ मंदिर में पहुंचकर दर्शन किये थे तथा जलाभिषेक भी किया था। उस समय कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मुलायम सिंह से मिलने के लिए बेताब थी। लोग अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए ले जाने के लिए तैयारी कर चुके थे। हालांकि वह एक विशेष कार्यक्रम में आए थे, जिसकी वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा।
एक ये भी किस्सा…
मेरठ: वर्ष 2007 में सपा का विक्टोरिया पार्क में तीन दिवसीय राष्टÑीय सम्मेलन हुआ था। तब मुलायम सिंह यादव तीन दिन तक क्रांतिधरा पर ही मौजूद रहे। सुबह की चाय लेकर जयवीर सिंह उनके पास जाते थे। उन्हें एक दिन बुलाया और बोले कि हमें अपने घर नहीं ले चलोंगे…यह सुनकर जयवीर सिंह अचंभित हो गए।
क्योंकि उनका मुलायम सिंह यादव से कोई खास परिचय भी नहीं था। सिर्फ चाय लेकर सुबह को हर रोज जा रहे थे। उनके सैनी गांव स्थित आवास पर मुलायम सिंह यादव पहुंचे और परिवार के साथ फोटो शूट भी कराया। इस तरह से मुलायम सिंह यादव अपने कार्यकर्ताओं से बेहद प्यार करते थे। कार्यकर्ताओं को खास तव्वजों देते थे। इसी वजह से कार्यकर्ताओं के बीच मुलायम सिंह यादव लोकप्रिय थे।

