Thursday, March 19, 2026
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जख्म बन रहा नासूर, नहीं जागते जिम्मेदार

  • लगभग साढेÞ तीन किलोमीटर की दूरी में 500 से अधिक छोटे-बढ़े गड्ढों से मुश्किल हुआ सफर
  • मेडिकल से हापुड़ अड्ढे, हर 50 मीटर पर गड्ढे, पैचवर्क करके हो रही खानापूर्ति

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल से हापुड़ अड्ढे तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर तक हर 50 मीटर पर गड्ढों का साम्राज्य फैला हुआ है। ऐसे में अपने घर से स्कू ल, कार्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान और चिकित्सा जैसी काफी सारी सुविधाओं के लिये इस राह पर निकलने से पहले आम ओ खास को बार-बार सोचना पढ़ता है। उधर इस सबसे अंजान जिम्मेदार विभाग और उनके अधिकारी उस वक्त का इंतजार करते हैं जब तक छोटे गड्ढे विकराल रूप लेकर वाहन चालकों और राहगीरों के लिये जानलेवा न साबित हो जाये। ऐसा होने पर विभाग पैचवर्क करके खानापूर्ति कर लेता है।

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सड़क पर पसरी समस्याओं का जायजा लेने बुधवार को जब जनवाणी टीम हापुड़ अड्डे से मेडिकल कालेज और वहां से वापसी के सफर पर निकली तो उसे भी अंदाजा नही था कि स्थिति इतनी ज्यादा खराब है। करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे रूट पर लगभग 10 से 15 अस्पताल, 7 से 8 छोटे-बड़े रेस्टोरेंट, कॉम्प्लेक्स, पेट्रोल पंप और विवाह मंडप आदि हैं। इसके साथ ही केएल इंटरनेशनल, नोबेल पब्लिक स्कूल, पीजीएम इंटरनेशनल, राधागोविंद कालेज भी इसी रूप पर हैं। इसी रूट पर सोहराब गेट बस भी पड़ता है और इसे पुराने शहर से गढ़मुक्तेश्वर जाने वालों के लिये मुफीद भी माना जाता है,

लेकिन इस पर सफर करना काफी मुश्किल माना जाता है। यहां हर 50 मीटर पर गड्ढे हो रहे हैं। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है और इनसे यहां हादसे भी होते हैं। रेलवे स्टेशन से लेकर मेडिकल तक सिटी स्टेशन तक बसे भी इस रूट से होकर निकलती है। यूं तो इस रूट पर समस्याएं काफी गंभीर हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम उठाने की जहमत कम ही उठाई जाती है और अक्सर खानापूर्ति करके जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली जाती है।

राहगीरों के लिए बना परेशानी का सबब

गोविंद का कहना है कि सड़क अच्छी बन जाये तो काफी समस्याओं का समाधान हो जायेगा। मेडिकल कालेज और अन्य अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में आसपास के जिलों से लोग इलाज के लिये आते हैं। एंबुलेंस चालकों को यहां काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वाहन चालकों को हो रही परेशानी

शुभम का कहना है कि सड़क पर गड्ढे पहले छोटे थे और समय के साथ-साथ यह बड़े हो गये हैं। इससे वाहनों चालकों को काफी परेशानी होती है। बजरी पर लोग फिसल कर गिर जाते हैं।

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सड़क नाप-तौल तक ही सीमित

अंकित का कहना है कि यहां से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं, अक्सर ई-रिक्शा, बाइक, कार और बसों में सवार यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। कभी-कभी सड़क बनाने वाले आते हैं और नपाई आदि करते हैं।

मेडिकल के सामने स्थिति ज्यादा नाजुक

कमल का कहना है कि मेडिकल के सामने पहले स्थिति इससे भी ज्यादा खराब थी। अब जाकर थोड़ा सुधार आया है। सिसौली से यहां तक सड़क बनाने की योजना तो है, बस इस पर धरातल पर अमल हो जाये तो काम बने।

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