Monday, May 11, 2026
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याकूब 60 दिन की न्यायिक हिरासत में

  • दिल्ली के चांदनी महल इलाके से किया गिरफ्तार, गैंगस्टर याकूब बेटे समेत गया जेल
  • कचहरी में समर्थकों की रही भीड़, छावनी में तब्दील हुआ परिसर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पूर्व मंत्री और अलफहीम मीटेक्स कंपनी के संचालक याकूब कुरैशी और पुलिस के बीच दस महीने तक चले लुका छिपी के खेल का अंत हो गया। पुलिस याकूब कुरैशी और उसके बेटे इमरान कुरैशी को दिल्ली के चांदनी महल इलाके से गिरफ्तार कर लाई और शनिवार को गैंगस्टर कोर्ट में पेश किया

जहां स्पेशल जज किरण बाला ने दोनों आरोपियों को 60 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जिस वक्त याकूब को अदालत में पेश करने के लिये लाया गया उस वक्त परिसर में जबरदस्त भीड़ थी, लेकिन छावनी में तब्दील की गई कचहरी परिसर में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। बाद में पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर जेल गई और दाखिल करा दिया।

याकूब से मिलने आये यूसुफ

अपने भाई हाजी याकूब से मिलने उनके भाई और कांग्रेस नेता यूसुफ कुरैशी भी गैंगस्टर कोर्ट में पहुंचे थे। कोर्ट परिसर में ही दोनों भाइयों के बीच काफी देर बातचीत हुई। हाजी याकूब की ओर से अधिवक्ता महावीर त्यागी, हरिओम शर्मा ने और पुलिस की तरफ से सरकारी वकील नीरज सोम से बहस की। पुलिस की ओर से रिमांड पर लेने की कोई अर्जी नहीं दी गई थी। लगभग 30 मिनट केस डायरी पर बहस चली।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायधीश किरण बाला ने याकूब और उसके बेटे को 60 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। इस दौरान कोर्ट के बहार क्यूआरटी फोर्स और सिविल लाइन सर्किल का फोर्स तैनात था। किसी को भी कोर्ट के अन्दर जाने की अनुमति नहीं थी। कचहरी के बाहर याकूब समर्थकों का बड़ी संख्या में जमावड़ा लगा था, लेकिन पुलिस सख्ती के चलते किसी को पास नहीं आने दिया गया।

भारी मात्रा में मीट बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो लाख 40 हजार किलो प्रोसेस मीट बरामद किया था। इसके साथ ही 6 हजार 700 किलो बिना प्रोसेस हुआ बरामद किया था। इस मीट की अवैध तरीके से पैकेजिंग और प्रोसेसिंग की जा रही थी। पूर्व मंत्री की फैक्ट्री में छापेमारी की जानकारी मिलते ही मौके पर आला अधिकारी, जांच टीमें पहुंच गई थी। हापुड़ रोड स्थित अलीपुर में पूर्व मंत्री हाजी याकूब की अल फईम मीटेकस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फैक्ट्री है।

पिता से लिपट गया भूरा

याकूब और इमरान के जेल में दाखिल होने के थोड़ी देर बाद बेटा फिरोज उर्फ भूरा अपने पिता से मिला और गले लगकर भावुक हो गया। थोड़ी देर बात करने के बाद बाप-बेटे अलग हो गए।

सभासद से मंत्री तक रहे

हाजी याकूब ने नगर पालिका मेरठ के कमेले का ठेका लिया तो वर्ष 1995-96 में सभासद चुने गए और फिर डिप्टी मेयर बन गए। 2002 की बसपा सरकार में याकूब का यह सफर खरखौदा से जीतने के बाद राज्यमंत्री बनने तक रहा। वर्ष 2016 में याकूब ने सिटी अस्पताल भी खरीद लिया।

वर्ष 2007 में याकूब ने यूडीएफ नाम से अपनी पार्टी बनाई और मेरठ शहर सीट विधायक भी चुने गए। जीत के बाद उन्होंने यूडीएफ का बसपा में विलय कर दिया। याकूब कुरैशी राजनीति में दलित और मुस्लिम गठजोड़ के दम पर वोट बटोरने में कामयाब होते रहे।

अस्पताल भी हुआ सील

हाजी याकूब कुरैशी के स्वामित्व वाले एक अस्पताल को मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कथित तौर पर बिना लाइसेंस के चलाने के लिए सील कर दिया था। शास्त्री नगर में परिवार के स्वामित्व वाले एक स्कूल को भी बंद कर दिया गया,

क्योंकि प्रतिष्ठान चलाने वाले किसी भी वैध शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त होने का कोई प्रमाण प्रस्तुत करने में विफल रहे। याकूब कुरैशी का परिवार हमेशा विवादों में रहा है। खुद पिता याकूब ने भी कई बार राजनीतिक दल बदले। मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, खरखौदा से विधायकी का और मुरादाबाद से सांसदी का चुनाव लड़ा था।

जेल के गेट पर बवाल

सीओ सिविल लाइन अरविन्द चौरसिया दोनों आरोपियों को लेकर जिला कारागार गए। भारी पुलिस बल के साथ जब याकूब गाड़ी से उतरकर जेल की तरफ जाने लगे तो गाड़ी अपनी दवाइयां आदि भूल गए। इस पर याकूब ने सीओ से कहा कि दवाइयां भी साथ में जाएंगी। इस पर जेल प्रशासन ने आपत्ति जताई तो याकूब का पारा हाई हो गया। जेल के गेट में प्रवेश करने से पहले याकूब ने पुलिस अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ कर शुक्रिया कहा। जेल में याकूब और उसके बेटे को मुलाहजा में रखा गया है।

याकूब कुरैशी का विवादों से है नाता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में याकूब कुरैशी का विवादों से गहरा नाता रहा है। याकूब कुरैशी का नाम सबसे पहले तब सुर्खियों में आया था, जब साल 2006 में एक विवादित कार्टून से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की बात कहते हुए जब उन्होंने डेनमार्क के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ का इनाम देने की घोषणा की थी।

उस समय भी इस नेता ने कई बार विवादित बयान देकर मीडिया की सुर्खियां बटोरी थीं। कभी उनकी बेटी फातिमा ने एक स्कूल में हंटर से छात्राओं की पिटाई करने के सुर्खियों में आई थी। 2017 में याकूब कुरैशी ने सिपाही चमन सिंह को थप्पड़ मारा था। काफी बवाल भी हुआ था। बेटा भूरा भी कई बार विवादों में घिरा रहा।

फिरोज उर्फ भूरा पहले ही गया जेल

याकूब कुरैशी के छोटे बेटे फिरोज को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। भगोड़े हाजी याकूब व पुत्र इमरान की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही थी, लेकिन आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पा रहे थे।

गुड़ के व्यापार से मीट तक का सफर

हापुड़ रोड की मीट फैक्टरी में पांच करोड़ का अवैध मीट पकड़े जाने के मामले में गिरफ्तार हुए पूर्व मंत्री हाजी याकूब का एक दौर में गुड़ का व्यापार करते थे। याकूब के पिता फईमुद्दीन कुरैशी कभी कबाड़ी बाजार के चौपले पर गुड़ का व्यापार करते थे। हालांकि खुद याकूब कुरैशी नींबू भी बेचा करते थे। बाद में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया और फिर मीट के कारोबार में आए तो सियासत में उतर गए।

पुराने मीट ने खड़े किए सवाल

फैक्ट्री कहने के लिए तो पिछले तीन साल से बंद थी, लेकिन यहां मीट पैकिंग आदि का कार्य लगातार जारी था। फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में खुले में रखा ऐसा मीट मिला जो तीन से चार दिन पुराना था। हालांकि फैक्ट्री में पशुओं का कटान होने के साक्ष्य नहीं मिले थे। अधिकारी भी हैरान थे कि बंद फैक्ट्री में इतनी बड़ी मात्रा में मीट कैसे हो सकता है।

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