Sunday, January 23, 2022
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कैसा है आपके बढ़ते बच्चों का आहार

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आज एकल परिवार में जहां माता-पिता दोनों नौकरी पेशे में तथा अपने सामाजिक जीवन में व्यस्त हैं, वहां वे बच्चों के खाने-पीने के प्रति उतने सचेत नहीं हैं, जितनी माताएं पहले हुआ करती थीं। प्राकृतिक आहार की बजाए बच्चों के स्वादानुसार उन्हें फास्ट फूड दे कर माताएं अपने कार्य की इतिश्री समझ लेती हैं।

बच्चों के भोजन में रोटी, सब्जी व चावल की जगह पिजा, बर्गर, समोसे, पैटीज, नूडल्स आदि चीजों ने ले ली है। फास्ट फूड में कार्बोहाइडेÑट एवं वसा की अधिकता होती है। प्रोटीन का उपयोग बहुत ही कम या नहीं के बराबर होता है। यही कारण है कि ऐसे बच्चे मोटापे का शिकार हो जाते हैं। प्रोटीन की कमी के कारण बच्चों में कुछ विशेष प्रकार के एन्जाइम की कमी हो जाती है जिसके कारण उनकी शारीरिक व मानसिक दृष्टि रुकने की आशंका होती है। बच्चों का लिवर खराब हो जाता है एवं दस्त की शिकायत रहती है। चूंकि फास्ट फूड में लौह तत्व व विटामिनों का भी अभाव होता है अत: बच्चों में रक्ताल्पता तथा विटामिनों की कमी से अन्य रोग भी होने लगते हैं।
सर्वेक्षण करें तो पता चलता है कि अधिकांशत: किशोर व किशोरियों में विटामिन ए, बी-6, फालिक एसिड, कैल्शियम व लौह तत्व की कमी रहती है। भविष्य में इन सभी के घातक परिणाम सामने आते हैं।

अत: यह अत्यन्त आवश्यक है कि अभिभावक अपने सामाजिक जीवन व रोजमर्रा की आपाधापी के बीच बच्चों के खान-पान की अवहेलना न करें ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की घातक बीमारियों का सामना न करना पड़े। अभिभावक स्वयं स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो कर उन्हें किशोरावस्था से ही खाने की लाभ-हानि की जानकारी देते हुए सन्तुलित व पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक रखें।
सच्चाई से अवगत कराएं
सबसे पहले बच्चों को बताया जाए कि ईश्वर ने सभी प्राणियों को अलग-अलग शारीरिक सुंदरता प्रदान की है, अत: यह आवश्यक नहीं है कि सभी को सही अनुपात में शारीरिक ढांचा मिले किन्तु हम सभी उचित आहार व व्यायाम व स्वस्थ मन द्वारा अपने शरीर को सुन्दर बना सकते हैं।

कुछ जिमेदारियां दें

यह तो सर्वविदित है कि किशोरावस्था में बच्चों को अधिक फल, साग, सब्जियां, दूध आदि के भोजन में शामिल होने के साथ-साथ चीनी, वसा, फास्ट फूड आदि से परहेज करना अनिवार्य है किंतु यह सत्य है कि बच्चों को इन सब खानों से पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता। अत: उनके समक्ष बैठ कर उन्हें कुछ जिम्मेदारी दें जैसे इस हफ्ते के मेनू के विषय में वे ही तय करेंगे कि कौन-कौन सी सब्जियां आनी हैं, क्या शॉपिंग करनी है आदि। अगर इस बीच वे बाहर खाने की बात करते हैं जैसे पिजा, बर्गर आदि तो आप सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बार खाने की सहमति दें ताकि वे भी खुश और आप भी निश्चिंत। माता-पिता दोनों की जिम्मेदारीयहां भी ध्यान देने योग्य बात है कि माता-पिता दोनों को ही इस विषय पर सचेत होना होगा। कहीं ऐसा न हो कि पापाजी आइस्क्र ीम, चॉकलेट व बर्गर से बच्चों का बहला रहे हैं और उधर मम्मीजी बच्चों की सेहत पर अथक परिश्रम कर रही हैं। बच्चे तो वहीं दौड़ेंगे जहां उन्हें उनकी रूचि के अनुसार व स्वादानुसार वस्तु उपलब्ध हो रही हो। अगर आप चाहती हैं कि बच्चे शीतल पेय, चिप्स आदि वस्तुओं से दूर रहें तो यथासंभव इन वस्तुओं को घर पर न ही लाएं तो बेहतर है क्योंकि आपने फ्रिज में शीतल पेय रखा है और डिब्बे में चिप्स, तो तय है कि बच्चे आपके गाजर व नारंगी के रस को न पीकर शीतल पेय की ओर दौड़ेंगे।

अपनी भावनाओं को दबाएं

आपको भी बुरा लगेगा जब आपके बच्चे को कुछ खाना पसंद हो और आप उसे न दे रही हों किन्तु बच्चे के स्वाद से अधिक उसकी सेहत है अत: अपनी संवेदना को दबा कर बच्चों को पौष्टिक व उचित मात्रा में आहार दें। जबरदस्ती उसे डांट कर खाना कतई न खिलाएं।

वसायुक्त भोजन का कम प्रयोग करें

यथासंभव तलने के बजाए भाप द्वारा, उबाल कर तथा भून कर खाना बनाएं। मक्खन के बजाए रिफाइंड तेल का प्रयोग अधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है। आपको और बच्चों को भविष्य में दिल की बीमारी जैसे घातक बीमारियां नहीं होंगी।
आहार में रेशेदार पदार्थ बढ़ाएं
आहार में रेशों की अधिकता से कब्ज साफ होती है। पाचन संस्थान ठीक से काम करता है। भोजन में चोकरयुक्त रोटियां, सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फलों को शामिल कर सकते हैं।
चर्बीयुक्त भोजन का कम प्रयोग
महीने में एक दो बार आइस्क्र क्रीम व चॉकलेट का आकर्षण अवश्य रखें किन्तु रोजमर्रा के भोजन में क्रीम, सॉस, क्रीम सूप, सजावट में क्रीम आदि का प्रयोग न करें, बिना क्रीम वाला सूप, शर्बत, फलों का शेक, लस्सी आदि परोसें।
नमक का प्रयोग
बच्चों को आरंभ से ही कम नमक का ही प्रयोग करवाएं ताकि भविष्य में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना न करना पड़े।
विभिन्न प्रकार से भोजन परोसें
बच्चों को भोजन में पूर्ण पौष्टिकता प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार से आकर्षक भोजन परोसने की आवश्यकता है। बर्गर बनाएं तो उसमें सोयाबीन की बड़ियां, गाजर, हरे मटर, टमाटर, और थोड़े आलू का मिश्रण भर कर आकर्षक रूप से सजा कर परोसें। केवल आलू के रोल व समोसे बनाने के बजाए उनमें अन्य सब्जियों का मिश्रण भर सकती हैं। उस मिश्रण को तलने के बजाए ओवन में बेक कर सकती हैं।

अगर बच्चे चाइनीज खाना पसंद करते हैं तो यह अत्यंत आवश्यक है कि घातक रसायन अजीनोमोटो का प्रयोग न किया जाए। विभिन्न प्रकार की सब्जियों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाए। अगर मांसाहारी सैंडविच बनाना है तो चिकन के साथ-साथ आप विभिन्न प्रकार की सब्जियों का प्रयोग करें जैसे गाजर, बींस, शिमला मिर्च आदि। दूध से बनी मिठाइयां बच्चों को दें। उचित मात्र में मीठी वस्तुओं का प्रयोग भी शरीर के लिए आवश्यक माना गया है।


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