Wednesday, April 29, 2026
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स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है जिंक

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पंकज कु. पंकज |

भोजन के आवश्यक अवयवों में खनिज पदार्थों का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। जिंक, लोहा, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि ऐसे खनिज हैं जो शरीर के विभिन्न कार्य कलापों को नियंत्रित, संचालित और प्रभावित करते हैं। इनकी कमी या अधिकता विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा करती है। अत: इनके बारे में पर्याप्त जानकारी होना बहुत जरूरी है। आइये, इन्हीं में से एक खनिज जिंक के बारे में कुछ जानकारी हासिल करें।

यह एक आवश्यक खनिज पदार्थ है जो शरीर की प्राय: प्रत्येक कोशिका (सेल) में पाया जाता है। यह सैकड़ों एन्जाइम्स को उत्तेजना प्रदान करता है जिससे शरीर की जैव रसायनिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। जिंक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने में मदद करता है। घावों को जल्द भरता है। डीएनए संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था, बाल्यावस्था और किशोरावस्था में समुचित वृद्धि और विकास के लिये अत्यंत आवश्यक है।

जिंक बहुत सारे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। मांस और मुर्गे में इसकी काफी मात्रा पायी जाती है। इसके अतिरिक्त बींस, मेवे, कुछ समुद्री खाद्य, साबुत अनाज और दूध से बने भोज्य पदार्थों में भी जस्ता पाया जाता है इसका सबसे प्रमुख स्रोत है कठोर आवरण वाला सीप-घोंघा समुदाय का जन्तु।

जिंक की कमी क्यों होती है?

इसकी कमी प्राय: चार कारणों से होती है।
-भोजन द्वारा समुचित मात्रा में इसे ग्रहण नहीं करना।
-हमारे शरीर द्वारा पूर्ण रूप से इसका अवशोषण नहीं होना।
-शरीर से निष्कासन ज्यादा बढ़ जाना।
-शरीर में जस्ते की जरूरत का बढ़ जाना।

जिंक की कमी के लक्षण

वृद्धि अवरोधित हो जाती है, बाल झड़ने लगते हैं, डायरिया (अतिसार), कामेन्द्रियों के विकास में देर होती है और नामर्दगी, त्वचा की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, भूख कम हो जाती है, आंखें कमजोर ही जाती हैं, वजन कम होने लगता है, घाव देर से भरते हैं, सही स्वाद नहीं मिल पाता, मानसिक थकान होने लगती है।
इनमें से कई लक्षण ऐसे हैं जो कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं इसलिए सही पड़ताल के लिए मेडिकल डॉक्टर से सलाह लेना हितकर है।

जिंक की अतिरिक्त आवश्यकता किसे होती है

ऐसा कोई एक पैमाना नहीं जो जिंक के पोषण स्तर को माप सके। डॉक्टर कई तथ्यों को यथा-पाचन संबंधी दोष, शराब की लत, समुचित मात्रा में कैलोरी नहीं लेना, शिशुओं और बच्चों के अवरोधित विकास आदि को ध्यान में रखते हुए जस्ते को अतिरिक्त खुराक (जिंक सप्लीमेंट) की मात्रा निर्धारित करते हैं। शाकाहारी व्यक्तियों को मांसाहारी लोगों की तुलना में ज्यादा जस्ते की जरूरत होती है, कारण पौधों से प्राप्त भोजन में जिंक की मात्रा बहुत कम होती है। मां में जिंक की कमी बच्चों के विकास को अवरोधित करती है।

दूध पिलाने वाली माताओं में चूंकि जिंक की खपत ज्यादा बढ़ जाती है इसलिए इस समय शरीर में जिंक की आवश्यकता मात्रा बनाए रखने के लिए जस्ते के अच्छे स्रोतों को भोजन में अवश्य शामिल करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही विटामिन और मिनरल पूरक लेना चाहिए। उन बच्चों में जिनमें जिंक का कुपोषण पाया गया, जिंक की अतिरिक्त खुराक के आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिले। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि सात माह से बड़े बच्चों के लिए मां का दूध आवश्यक जिंक (जस्ता) पोषण नहीं दे पाता, इसलिए इस उम्र के बच्चों को भी ऐसा भोजन दिया जाना आवश्यक है जिसमें जिंक उपलब्ध हो या फिर जिंक पूरक भी दिया जा सकता है।

अत्यधिक जिंक के कुप्रभाव

150 से 450 मिलीग्राम जिंक का प्रतिदिन भोजन में लेना कई प्रकार की परेशानी भी पैदा कर देता है, यथा शरीर में तांबे के स्तर को घटा देना, लोहे का कार्य विकृत हो जाना और लाइपोप्रोटीन की मात्रा कम कर देना इत्यादि। अत: इसकी उचित मात्रा का सेवन ही किया जाना चाहिए।


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