Tuesday, April 28, 2026
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मुश्किल नहीं है मोतियाबिंद का इलाज

Sehat 8


सत्यनारायण भटनागर |

वृद्धावस्था में आंखों की रोशनी वैसे भी कम होने लगती है और एक अवस्था ऐसी आती है कि एकदम से दिखना बंद हो जाता है। इस अवस्था में परेशानी का प्रारंभ होता है। भारतवर्ष में अंधत्व के प्रमुख कारणों में मोतिया बिंद प्रमुख है। अस्सी प्रतिशत अंधत्व का कारण मोतियाबिंद नामक बीमारी है। मोतियाबिंद एक रोग है जिसका संबंध हमारी आयु से होता है। वृद्धावस्था में आमतौर से मोतियाबिंद हो जाता है। हमारी आंख में एक पारदर्शी लेंस होता है। यह लेंस धुंधला पड़ जाता है और अपनी पारदर्शिता खो देता है। इसी को मोतियाबिंद कहते हैं। मोतियाबिंद पुरुष, स्त्री किसी को भी वृद्धावस्था में हो सकता है। इसका कोई विशेष कारण नहीं है लेकिन अत्यधिक धूम्रपान, मदिरा पान, निरंतर तेज रोशनी में कार्य करने या आंख में चोट लगने से यह रोग कम उम्र में भी हो सकता है।

मधुमेह के रोगियों को भी यह कम उम्र में हो सकता है। इसलिए चालीस वर्ष की उम्र के बाद आंखों की जांच के प्रति सावधानी बरतना नितान्त आवश्यक है। यदि आंखों की जांच उसके बाद होती रहे तो अच्छा है। मोतियाबिन्द एक ऐसा रोग है जिसे रोकने के लिए कोई उपचार, सावधानियां नहीं है इसलिए मोतियाबिन्द को उम्र के साथ रोका नहीं जा सकता।

मोतियाबिंद की पदचाप

मोतियाबिंद आपको उम्र के साथ आकर घेरे इसके पूर्व उसकी पदचाप सुन लीजिए। मोतियाबिंद बिना किसी शोर गुल के धीरे-धीरे बिना दर्द के आता है। इसके आगमन पर कम दिखाई देने लगता है। दूर और पास की वस्तु का भेद करने में दिक्कत आती है। पुतली का रंग बदल कर धुंधला अथवा सफेद हो जाता है। कभी-कभी एक वस्तु दो वस्तु के रूप में दिखाई पड़ती है। रंगों को पहचानने में परेशानी आती है। ये संकेत यदि दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि मोतियाबिंद रोग का आगमन हो गया है।

मोतियाबिंद को ठीक कैसे करें

मोतियाबिंद का दवा के रूप में कोई उपचार नहीं है। इसका एक मात्र इलाज एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। इस आपरेशन में आंख पर आ गई झिल्ली को लेंस को हटा दिया जाता है इस (लेंस) हटा देने से पूर्ववत दिखाई देने लगता है। यही एक मात्र हल है।

आपरेशन टालने का खतरा

मोतियाबिंद आपरेशन एक छोटा सा साधारण आपरेशन है। लाखों लोग भारत में यह आपरेशन करा चुके हैं। हमारे ग्राम, शहर, मोहल्ले में ऐसे व्यक्ति मिल सकते हैं जो मोतियाबिंद का आपरेशन करा कर देखने में सक्षम हो गए हैं। अत: मोतियाबिंद के आपरेशन में कोई खतरा नहीं है, यह हमें समझ लेना चाहिए। लेकिन मोतियाबिंद का आपरेशन यदि हम नहीं कराएं तो अपारदर्शी लेंस के न हटाने से व्यक्ति अंधा हो जाता है। इस खतरे से बचने के लिए जैसे ही पता चले कि मोतियाबिंद है,आपरेशन के लिए स्वयं अस्पताल जाकर जांच करा लेना चाहिए और आपरेशन भी करा लेना सर्वोत्तम होगा।

आपरेशन का समय

उत्तर भारत में यह अन्ध विश्वास व्याप्त है कि आपरेशन के लिए उचित समय शीत ऋतु है, इसलिए अक्तूबर से फरवरी तक अधिकतम मोतियाबिंद के आपरेशन्स इस अवधी में होते हैं, किंतु यह एक भ्रम है। यह इतना छोटा और साधारण आपरेशन होता है कि किसी भी समय इसे कराया जा सकता है। यदि मोतियाबिंद के आपरेशन में विलंब होता है तो लाइलाज अंधापन अवश्य हो सकता है। मोतियाबिन्द का आपरेशन अत्यन्त साधारण आपरेशन है। इसमें कोई दर्द और कष्ट नहीं है। आपरेशन करते वक्त व्यक्ति को बेहोश नहीं किया जाता।

आपरेशन के बाद की सावधानियां

सफल आपरेशन के बाद भी रोगी को एक माह तक सावधानी रखनी आवश्यक है। नेत्र सर्जन जो दवा देते हैं, उसे नियमित रूप से लेना, आंख को हरी पट्टी से ढक कर रखना, तेज रोशनी, धुआं, धूल से आंख को बचाना बहुत आवश्यक है। इतना ही नहीं, यदि कोई शिकायत हो तो तत्काल डॉक्टर को बताना चाहिए और सलाह अनुसार कार्य करना चाहिए। मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद दो सप्ताह तक सिर न धोने, भारी परिश्रम न करने, अधिक झुकने, मुडने के कार्य न करने की सलाह डॉक्टर देते हैं। इस आपरेशन वाली आंख को छूना, दबाना खतरनाक रहता है।


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